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स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो अनदेखी न करें
Updated Wed, 28 Feb 2018 02:16 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
स्वाइन फ्लू के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह होते हैं, इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं होती। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ सावधानियां बरत स्वाइन फ्लू से बचाव किया जा सकता है। शुरूआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर जमा प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल बीमारी से निपटने में करता है। लेकिन इसके बाद अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
-लगातार नाक बहना और छींकें आना।
-लगातार खांसी और बहुत अधिक बलगम।
-सिर में बहुत तेज दर्द।
-बहुत ज्यादा थकान, अनिद्रा।
-मांसपेशियों में अकड़न और दर्द।
-गले में खुश्की और खरास।
-लगातार बुखार बढ़ना।
...................
बचाव के उपाय
-खांसी-जुकाम को हल्के में ना लें।
-भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
-हाथ मिलाने और गले लगने से बचें।
-बिना मास्क पहने भीड़भाड़ में ना जाएं।
-अस्पताल जाते समय सावधानी बरतें।
-स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में ना जाएं।
-खांसते और छींकते समय रुमाल रखें।
....................
रिपोर्ट में देरी से फिर परेशानी
प्रदेश में स्वाइन फ्लू की जांच की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। एनसीडीसी पर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों के सैंपल की जांच का बोझ भी है। साथ ही वह प्रदेश से दूर भी है। ऐसे में वहां सैंपल भेजने और जांच रिपोर्ट आने में कई दिन का समय लगता है। ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट आने से पहले ही मरीज की मौत हो जाती है। चिकित्सक अन्य बीमारियों का उपचार कर रहे होते हैं जबकि स्वाइन फ्लू से मौत हो जाती है। दून में एक प्राइवेट स्वाइन फ्लू लैब है लेकिन प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसे मान्यता नहीं देता। अगर इस लैब को मान्यता दी जाए तो सैंपल की जांच और रिपोर्ट मिलने में तेजी आएगी। जिससे समय रहते मरीज का उपचार शुरू किया जा सकता है।
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स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच शुरूआत में अंतर नहीं किया जाता है। लेकिन स्वाइन फ्लू बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए। समय पर उपचार देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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डॉ. वाईएस थपलियाल, सीएमओ
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स्वाइन फ्लू के मामले में थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। वायरल होने के कारण इसके प्रारंभिक लक्षण अन्य सामान्य मौसमी बीमारियों की तरह होते हैं, इसलिए इसकी पहचान आसानी से नहीं होती। ऐसे मामलों में चिकित्सक तुरंत उपचार शुरू करने का परामर्श देते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, कुछ सावधानियां बरत स्वाइन फ्लू से बचाव किया जा सकता है। शुरूआती चरण में मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती। शरीर जमा प्रतिरोधक क्षमता का इस्तेमाल बीमारी से निपटने में करता है। लेकिन इसके बाद अगर बीमारी पर नियंत्रण नहीं हुआ तो रोग जानलेवा साबित हो सकता है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
-लगातार नाक बहना और छींकें आना।
-लगातार खांसी और बहुत अधिक बलगम।
-सिर में बहुत तेज दर्द।
-बहुत ज्यादा थकान, अनिद्रा।
-मांसपेशियों में अकड़न और दर्द।
-गले में खुश्की और खरास।
-लगातार बुखार बढ़ना।
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बचाव के उपाय
-खांसी-जुकाम को हल्के में ना लें।
-भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
-हाथ मिलाने और गले लगने से बचें।
-बिना मास्क पहने भीड़भाड़ में ना जाएं।
-अस्पताल जाते समय सावधानी बरतें।
-स्वाइन फ्लू प्रभावित क्षेत्रों में ना जाएं।
-खांसते और छींकते समय रुमाल रखें।
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रिपोर्ट में देरी से फिर परेशानी
प्रदेश में स्वाइन फ्लू की जांच की कोई सरकारी व्यवस्था नहीं है। एनसीडीसी पर प्रदेश के साथ ही अन्य राज्यों के सैंपल की जांच का बोझ भी है। साथ ही वह प्रदेश से दूर भी है। ऐसे में वहां सैंपल भेजने और जांच रिपोर्ट आने में कई दिन का समय लगता है। ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट आने से पहले ही मरीज की मौत हो जाती है। चिकित्सक अन्य बीमारियों का उपचार कर रहे होते हैं जबकि स्वाइन फ्लू से मौत हो जाती है। दून में एक प्राइवेट स्वाइन फ्लू लैब है लेकिन प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग इसे मान्यता नहीं देता। अगर इस लैब को मान्यता दी जाए तो सैंपल की जांच और रिपोर्ट मिलने में तेजी आएगी। जिससे समय रहते मरीज का उपचार शुरू किया जा सकता है।
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स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम के बीच शुरूआत में अंतर नहीं किया जाता है। लेकिन स्वाइन फ्लू बढ़ने पर जानलेवा साबित हो सकता है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि मरीज को सही समय पर अस्पताल पहुंचाया जाए। समय पर उपचार देने से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
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डॉ. वाईएस थपलियाल, सीएमओ