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‘कलियुग में श्रीराम कथा से ही मोक्ष’
Updated Thu, 11 Jan 2018 01:21 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/डोईवाला।
श्रीराम कथा के श्रवण और मनन से प्राणी को जीवन जीने का सार मिल जाता है। कलियुग में श्रीराम कथा से ही मोक्ष का मार्ग मिल सकता है। ये बातें कथावाचक नीलकंठ महाराज ने बुधवार को प्राचीन शिव मंदिर कान्हरवाला में आयोजित श्रीराम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर कहीं। इस दौरान हवन-यज्ञ भी हुआ और महिलाओं ने भजन-कीर्तन किए।
श्रीराम कथा के अंतिम दिन नीलकंठ महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा से प्राणी को जीवन में धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उन्नति मिल जाती है। प्रभु श्रीराम ने अपने मर्यादित जीवन से समाज को संबंधों की सच्ची व्याख्या दी है। श्रीराम का चरित्र व्यक्ति को लक्ष्यगामी बनाने का काम करता है। कथा समापन पर श्रद्धालुओं ने भंडारा ग्रहण किया। इस अवसर पर हरपाल सिंह सैनी, बचन सिंह, राजेन्द्र रावत, दिगबंर सिंह बिष्ट, देवेन्द्र चौहान, महावीर नेगी, निर्मल नेगी, भगवान सिंह, पदम सिंह चौधरी, देवेश्वरी भंडारी, धीरणमणि, धीरेन्द्र चौहान, प्रवेश चौहान आदि मौजूद रहे।
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श्रीराम कथा के श्रवण और मनन से प्राणी को जीवन जीने का सार मिल जाता है। कलियुग में श्रीराम कथा से ही मोक्ष का मार्ग मिल सकता है। ये बातें कथावाचक नीलकंठ महाराज ने बुधवार को प्राचीन शिव मंदिर कान्हरवाला में आयोजित श्रीराम कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर कहीं। इस दौरान हवन-यज्ञ भी हुआ और महिलाओं ने भजन-कीर्तन किए।
श्रीराम कथा के अंतिम दिन नीलकंठ महाराज ने कहा कि श्रीराम कथा से प्राणी को जीवन में धार्मिक, आध्यात्मिक और सामाजिक उन्नति मिल जाती है। प्रभु श्रीराम ने अपने मर्यादित जीवन से समाज को संबंधों की सच्ची व्याख्या दी है। श्रीराम का चरित्र व्यक्ति को लक्ष्यगामी बनाने का काम करता है। कथा समापन पर श्रद्धालुओं ने भंडारा ग्रहण किया। इस अवसर पर हरपाल सिंह सैनी, बचन सिंह, राजेन्द्र रावत, दिगबंर सिंह बिष्ट, देवेन्द्र चौहान, महावीर नेगी, निर्मल नेगी, भगवान सिंह, पदम सिंह चौधरी, देवेश्वरी भंडारी, धीरणमणि, धीरेन्द्र चौहान, प्रवेश चौहान आदि मौजूद रहे।
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