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दून अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत, लापरवाही का आरोप
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:41 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरतने का एक और मामला सामने आया है। बृहस्पतिवार को अस्पताल में हिमाचल से इलाज कराने आई एक प्रसूता और उसके नवजात की मौत हो गई। मृतका के पति ने दून अस्पताल पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
जानकारी के मुताबिक पांवटा हिमाचल प्रदेश के नरेंद्र सिंह अपनी पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा होने पर दून अस्पताल लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने उनकी जांच के बाद उन्हें भर्ती कर लिया। बृहस्पतिवार को प्रसव हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। नरेंद्र सिंह का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही की है। उनसे बताया गया था कि सामान्य प्रसव हो जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें खून की व्यवस्था करने को कहा गया। अस्पताल आपात स्थिति में खून तक उपलब्ध नहीं करा पाया। हालांकि दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप भारती गुप्ता ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि अधिक रक्तस्राव के कारण प्रसूता की मौत हुई है। नवजात जन्म के साथ ही सांस नहीं ले पा रहा था। चिकित्सकों ने जच्चा-बच्चा को बचाने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि प्रसूता का ब्लड ग्रुप एबी निगेटिव था, जो कि ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं था। इसके पहले कि बाहर से व्यवस्था कर रक्त चढ़ाया जाता तब तक प्रसूता की मौत हो चुकी थी।
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दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरतने का एक और मामला सामने आया है। बृहस्पतिवार को अस्पताल में हिमाचल से इलाज कराने आई एक प्रसूता और उसके नवजात की मौत हो गई। मृतका के पति ने दून अस्पताल पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
जानकारी के मुताबिक पांवटा हिमाचल प्रदेश के नरेंद्र सिंह अपनी पत्नी ललिता को प्रसव पीड़ा होने पर दून अस्पताल लेकर आए। यहां चिकित्सकों ने उनकी जांच के बाद उन्हें भर्ती कर लिया। बृहस्पतिवार को प्रसव हुआ और जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई। नरेंद्र सिंह का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में लापरवाही की है। उनसे बताया गया था कि सामान्य प्रसव हो जाएगा, लेकिन ऐन वक्त पर उन्हें खून की व्यवस्था करने को कहा गया। अस्पताल आपात स्थिति में खून तक उपलब्ध नहीं करा पाया। हालांकि दून मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल प्रदीप भारती गुप्ता ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि अधिक रक्तस्राव के कारण प्रसूता की मौत हुई है। नवजात जन्म के साथ ही सांस नहीं ले पा रहा था। चिकित्सकों ने जच्चा-बच्चा को बचाने की अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। उन्होंने बताया कि प्रसूता का ब्लड ग्रुप एबी निगेटिव था, जो कि ब्लड बैंक में उपलब्ध नहीं था। इसके पहले कि बाहर से व्यवस्था कर रक्त चढ़ाया जाता तब तक प्रसूता की मौत हो चुकी थी।
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