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मध्याह्न भोजन योजना के निजीकरण का विरोध

Sat, 09 Feb 2019 01:31 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 09 Feb 2019 01:31 AM IST
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मध्याह्न भोजन योजना के निजीकरण का विरोध
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
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स्कूलों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना को किसी गैर सरकारी संगठन को सौंपे जाने का उत्तराखंड भोजनमाता कामगार यूनियन ने विरोध किया है। इसके अलावा भोजनमाता कामगार यूनियन मानदेय समेत विभिन्न मांगों के समर्थन में केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा है।

उत्तराखंड भोजन माता कामगार यूनियन का कहना है कि 19 नवंबर को दिल्ली में संसद भवन पर प्रदर्शन के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भोजनमाताओं के लिए योजनाएं लागू करने, मानदेय बढ़ाने पर सहमत जताई थी, लेकिन देश की ढाई लाख भोजनमाताओं को अभी तक कोई लाभ नहीं मिल पाया है। इस बाबत यूनियन ने शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजकर भोजनमाताओं को न्यूनतम 18000 मानदेय, विद्यालय बंद करने पर रोक, भोजनमाताओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बनाने, भोजनमाताओं से अतिरिक्त कार्य लेने, सेवा से निकाली गई भोजनमाताओं को दोबारा नियुक्ति देने, सेवानिवृत्त ग्रेच्युटी व पेंशन का लाभ देने आदि मांग की है।
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