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सपा की प्रदेश कार्यकारिणी भंग
Updated Mon, 17 Dec 2018 02:08 AM IST
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सपा की प्रदेश कार्यकारिणी भंग
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक पार्टियों में उठापटक का दौर भी शुरू हो गया है। शुरुआत समाजवादी पार्टी से हुई है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ी राजनीतिक कार्रवाई करते हुए पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस कार्रवाई को नगर निकाय चुनाव में पार्टी की करारी हार के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत व अन्य पदाधिकारियों के बीच जारी राजनीतिक विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले माह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने दो प्रदेश महासचिव अतुल शर्मा और नरेंद्र्र गूजर समेत तीन पदाधिकारियों को संगठन से बाहर कर दिया था। बाद में यह मामला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचा था। उन्होंने तीन दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष के फैसले पर रोक लगाते हुए तीनों पदाधिकारियों को यथावत बने रहने का फरमान जारी कर दिया था। इस राजनीतिक उठापटक के बाद पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के बीच इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि लोकसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है।
अब कार्यकारिणी भंग की कार्रवाई को राज्य में हुए नगर निकाय चुनाव में पार्टी की करारी हार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि चुनाव के दौरान पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने पार्टी अध्यक्ष से अनुमति लिए बगैर ही हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर व कोटद्वार जैसी सीटों पर कांग्रेस को समर्थन दे दिया था। इस बात को लेकर भी पार्टी आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष से खफा हो गया था। पार्टी सूत्रों की मानें तो नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन जल्द किया जाएगा, ताकि पार्टी के भीतर लोकसभा चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का राजनीतिक संकट न हो। सूत्राें के मुताबिक जिला कार्यकारिणी यथावत काम करती रहेंगी, लेकिन नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन होने के बाद इनमें भी बदलाव हो सकता है।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। आगामी लोकसभा चुनाव से पहले ही राजनीतिक पार्टियों में उठापटक का दौर भी शुरू हो गया है। शुरुआत समाजवादी पार्टी से हुई है। सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बड़ी राजनीतिक कार्रवाई करते हुए पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। इस कार्रवाई को नगर निकाय चुनाव में पार्टी की करारी हार के साथ ही प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत व अन्य पदाधिकारियों के बीच जारी राजनीतिक विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि पिछले माह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने दो प्रदेश महासचिव अतुल शर्मा और नरेंद्र्र गूजर समेत तीन पदाधिकारियों को संगठन से बाहर कर दिया था। बाद में यह मामला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव तक पहुंचा था। उन्होंने तीन दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष के फैसले पर रोक लगाते हुए तीनों पदाधिकारियों को यथावत बने रहने का फरमान जारी कर दिया था। इस राजनीतिक उठापटक के बाद पार्टी पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं के बीच इस बात के कयास लगाए जा रहे थे कि लोकसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा फेरबदल हो सकता है।
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अब कार्यकारिणी भंग की कार्रवाई को राज्य में हुए नगर निकाय चुनाव में पार्टी की करारी हार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि चुनाव के दौरान पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप सिंह रावत ने पार्टी अध्यक्ष से अनुमति लिए बगैर ही हरिद्वार, रुद्रपुर, काशीपुर व कोटद्वार जैसी सीटों पर कांग्रेस को समर्थन दे दिया था। इस बात को लेकर भी पार्टी आलाकमान प्रदेश अध्यक्ष से खफा हो गया था। पार्टी सूत्रों की मानें तो नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन जल्द किया जाएगा, ताकि पार्टी के भीतर लोकसभा चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार का राजनीतिक संकट न हो। सूत्राें के मुताबिक जिला कार्यकारिणी यथावत काम करती रहेंगी, लेकिन नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन होने के बाद इनमें भी बदलाव हो सकता है।
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