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फोटो:: नियमों की धज्जियां उड़ाते मिले दो मदरसे
Updated Thu, 27 Sep 2018 01:40 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। बाल आयोग की टीम ने बुधवार को दो मदरसों में छापेमारी कर भारी अनियमितताएं पकड़ी हैं। हाल यह था कि दोनों मदरसों में न एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जा रहीं थी और न इनमें मिड-डेे-मील की कोई व्यवस्था थी। जबकि इन मदरसों को लगातार मिड-डे-मील का राशन सप्लाई किया जा रहा है। इनमें केवल धार्मिक किताबें पढ़ाई जाती मिली।
बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी टीम के साथ परिविक्षा कार्यालय से आजाद कॉलोनी स्थित दो मदरसों का निरीक्षण करने पहुंची। इस दौरान टीम को दोनों मदरसों में कई खामियां मिलीं। सरकार की सख्ती के बावजूद इन मदरसों के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ाई जा रही थी। इस पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष उषा नेगी ने मदरसों के संचालकों से एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने चेताया नियमों को उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिड-डे-मील न बनने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संचालकों से साफ शब्दों में कहा कि मदरसों के छात्रों को धार्मिक ज्ञान के अलावा अंग्रेजी और हिंदी का ज्ञान होना भी जरूरी है। तभी कोई छात्र मोलवी के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर आदि बन सकता है। टीम में शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, संपूर्णा भट्ट, जितेंद्र राणा आदि मौजूद रहे।
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देहरादून। बाल आयोग की टीम ने बुधवार को दो मदरसों में छापेमारी कर भारी अनियमितताएं पकड़ी हैं। हाल यह था कि दोनों मदरसों में न एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जा रहीं थी और न इनमें मिड-डेे-मील की कोई व्यवस्था थी। जबकि इन मदरसों को लगातार मिड-डे-मील का राशन सप्लाई किया जा रहा है। इनमें केवल धार्मिक किताबें पढ़ाई जाती मिली।
बाल आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी टीम के साथ परिविक्षा कार्यालय से आजाद कॉलोनी स्थित दो मदरसों का निरीक्षण करने पहुंची। इस दौरान टीम को दोनों मदरसों में कई खामियां मिलीं। सरकार की सख्ती के बावजूद इन मदरसों के छात्रों को एनसीईआरटी की किताबें नहीं पढ़ाई जा रही थी। इस पर नाराजगी जताते हुए अध्यक्ष उषा नेगी ने मदरसों के संचालकों से एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने चेताया नियमों को उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मिड-डे-मील न बनने पर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने संचालकों से साफ शब्दों में कहा कि मदरसों के छात्रों को धार्मिक ज्ञान के अलावा अंग्रेजी और हिंदी का ज्ञान होना भी जरूरी है। तभी कोई छात्र मोलवी के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर आदि बन सकता है। टीम में शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, संपूर्णा भट्ट, जितेंद्र राणा आदि मौजूद रहे।
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