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आशाओं ने दी सर्वे के बहिष्कार की चेतावनी
Updated Tue, 31 Jul 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
आयुष्मान भारत योजना के सर्वे के लिए दैनिक भत्ता देने समेत अन्य मांगों के समर्थन में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन ने सोमवार को मुख्य चिकित्सक अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। आशा कार्यकत्रियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सर्वे का बहिष्कार किया जाएगा।
आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष शिवा दूबे ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड के सर्वे के लिए आशाओं के क्षेत्र तो बांट दिए गए हैं, लेकिन इस कार्य के लिए दैनिक भत्ते का प्रावधान नहीं है। इसके अलावा सर्वे का फॉर्म अंग्रेजी में होने के कारण कम पढ़ी-लिखी आशाओं को फॉर्म भरने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि आधार नंबर बैंक खातों से जुड़े होने के कारण लोग आधार नंबर देना नहीं चाहते, लेकिन फॉर्म में आधार नंबर लिखना जरूरी है। शिवा दूबे ने आरोप लगाया कि पिछली बार भी स्वास्थ्य कार्ड के फॉर्म भरने का भत्ता नहीं दिया गया था। बिना मानदेय के कार्य कर रहीं आशाओं को राज्य सरकार ने दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं किया गया। ज्ञापन देने वालों में सुनीता चौधरी, नीलम, रेखा आर्य, शीतल, रजनी, अनीता, गीता, किरन, संगीता समेत कई आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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आयुष्मान भारत योजना के सर्वे के लिए दैनिक भत्ता देने समेत अन्य मांगों के समर्थन में आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन ने सोमवार को मुख्य चिकित्सक अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता को ज्ञापन सौंपा। आशा कार्यकत्रियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो सर्वे का बहिष्कार किया जाएगा।
आशा स्वास्थ्य कार्यकत्री यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष शिवा दूबे ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य कार्ड के सर्वे के लिए आशाओं के क्षेत्र तो बांट दिए गए हैं, लेकिन इस कार्य के लिए दैनिक भत्ते का प्रावधान नहीं है। इसके अलावा सर्वे का फॉर्म अंग्रेजी में होने के कारण कम पढ़ी-लिखी आशाओं को फॉर्म भरने में दिक्कत आ रही है। उन्होंने कहा कि आधार नंबर बैंक खातों से जुड़े होने के कारण लोग आधार नंबर देना नहीं चाहते, लेकिन फॉर्म में आधार नंबर लिखना जरूरी है। शिवा दूबे ने आरोप लगाया कि पिछली बार भी स्वास्थ्य कार्ड के फॉर्म भरने का भत्ता नहीं दिया गया था। बिना मानदेय के कार्य कर रहीं आशाओं को राज्य सरकार ने दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं किया गया। ज्ञापन देने वालों में सुनीता चौधरी, नीलम, रेखा आर्य, शीतल, रजनी, अनीता, गीता, किरन, संगीता समेत कई आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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