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Dehradun News: उत्तराखंड की 6379 सहकारी समितियों नए व्यवसाय कर सकेंगी
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-सहकारी प्रबंधन संस्थान के डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताए नए बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड में 25 विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 6379 सहकारी समितियां नया व्यवसाय भी कर सकेंगी। सहकारिता मंत्रालय की डिजिटल क्रांति इन समितियों के कार्यों में पारदर्शिता, तेज निर्णय निर्माण और कुशल निगरानी में सुधार ला रही है।
सहकारिता मंत्रालय के सहकारी प्रबंधन संस्थान देहरादून के डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि इन समितियों में न केवल व्यावसायिक गतिविधियां मजबूत होंगी बल्कि नए क्षेत्रों में व्यवसाय भी कर सकेंगी और नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधि में बढ़ोतरी होगी। डॉ. शर्मा ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय ने एकीकृत सहकारी डाटाबेस तैयार किया है, जिसमें आठ लाख से अधिक सहकारी समितियों की जानकारी दर्ज हो चुकी है। इनसे 30 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं।
नाबार्ड के सहयोग से 63 हजार कृषि सहकारी समितियों को उद्यम संसाधन नियोजन प्रणाली आधारित सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को केवल ऋण देने के बजाए बहुद्देशीय इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है। मल्टी परपज मॉडल लाया गया है, जिसके तहत ये समितियां डेयरी, मत्स्य, गोदाम, ई-मार्केटिंग, एलपीजी वितरण, जन औषधि जैसी सेवाओं में आ रही हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। उत्तराखंड में 25 विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 6379 सहकारी समितियां नया व्यवसाय भी कर सकेंगी। सहकारिता मंत्रालय की डिजिटल क्रांति इन समितियों के कार्यों में पारदर्शिता, तेज निर्णय निर्माण और कुशल निगरानी में सुधार ला रही है।
सहकारिता मंत्रालय के सहकारी प्रबंधन संस्थान देहरादून के डॉ. आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि इन समितियों में न केवल व्यावसायिक गतिविधियां मजबूत होंगी बल्कि नए क्षेत्रों में व्यवसाय भी कर सकेंगी और नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधि में बढ़ोतरी होगी। डॉ. शर्मा ने बताया कि सहकारिता मंत्रालय ने एकीकृत सहकारी डाटाबेस तैयार किया है, जिसमें आठ लाख से अधिक सहकारी समितियों की जानकारी दर्ज हो चुकी है। इनसे 30 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं।
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नाबार्ड के सहयोग से 63 हजार कृषि सहकारी समितियों को उद्यम संसाधन नियोजन प्रणाली आधारित सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को केवल ऋण देने के बजाए बहुद्देशीय इकाई के रूप में विकसित किया जा रहा है। मल्टी परपज मॉडल लाया गया है, जिसके तहत ये समितियां डेयरी, मत्स्य, गोदाम, ई-मार्केटिंग, एलपीजी वितरण, जन औषधि जैसी सेवाओं में आ रही हैं।
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