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सीईओ ने की छात्राओं से छेड़छाड़ के आरोपी शिक्षकों पर कार्रवाई की संस्तुति
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देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तरकाशी जिले के एक राजकीय इंटर कॉलेज के दो प्रवक्ताओं को कॉलेज की छात्राओं के साथ छेड़छाड़ करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। इन प्रवक्ताओं को अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। इस घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों व अभिभावकाें में जबरदस्त आक्रोश था।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व उत्तरकाशी जिले के एक राजकीय इंटर कॉलेज के दो प्रवक्ताओं पर स्कूल की छात्राओं ने छेड़छाड़ करने के साथ मानसिक उत्पीड़न करने व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। छात्राओं का यह भी कहना था कि बात न मानने पर दोनों प्रवक्ता प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी देते हैं। प्रकरण के उजागर होने के बाद छात्राओें के परिजनोें के साथ क्षेत्रीय लोगों ने विद्यालय में जमकर हंगामा किया था।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से इसकी जांच कराई गई। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा रामकृष्ण उनियाल ने प्रकरण की जांच मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी और खंड शिक्षा अधिकारी भटवाड़ी को सौंपी थी। विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने व जांच मेें प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद अपर निदेशक ने दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। अपर निदेशक का कहना है कि निलंबित किए गए दोनों प्रवक्ताओं को आरोपपत्र अलग से जारी किए जाएंगे।
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पुलिस टीम ने गांव जाकर की पूछताछ
उत्तरकाशी। क्षेत्र के एक राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों द्वारा नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने भी गांव पहुंचकर पूछताछ की। थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि छेड़खानी के इस मामले की जांच महिला एसआई मनीषा नेगी को सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने संबंधित गांव जाकर ग्रामीणों से पूछताछ की। जल्द ही इस मामले में पीड़ित छात्राओं के बयान लिए जाएंगे। इधर बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक पंकज कुमार ने इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि छह दिसंबर को छात्राओं द्वारा लिखित शिकायत देने के बावजूद इस मामले को रफा दफा करने की नीयत से इतने दिनों तक दबा कर रखा गया। संज्ञान में होने पर भी विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सीईओ ने इस मामले में पुलिस को सूचित नहीं किया। यह पोक्सो अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने बताया कि मामले में प्रधानाचार्य से भी विद्यालय में इस तरह की अनुशासनहीनता को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। ब्यूरो
पुलिस टीम ने गांव जाकर की पूछताछ
उत्तरकाशी। क्षेत्र के एक राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों द्वारा नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने भी गांव पहुंचकर पूछताछ की। थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि छेड़खानी के इस मामले की जांच महिला एसआई मनीषा नेगी को सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने संबंधित गांव जाकर ग्रामीणों से पूछताछ की। जल्द ही इस मामले में पीड़ित छात्राओं के बयान लिए जाएंगे। इधर बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक पंकज कुमार ने इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि छह दिसंबर को छात्राओं द्वारा लिखित शिकायत देने के बावजूद इस मामले को रफा दफा करने की नीयत से इतने दिनों तक दबा कर रखा गया। संज्ञान में होने पर भी विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सीईओ ने इस मामले में पुलिस को सूचित नहीं किया। यह पोक्सो अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने बताया कि मामले में प्रधानाचार्य से भी विद्यालय में इस तरह की अनुशासनहीनता को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। ब्यूरो
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व उत्तरकाशी जिले के एक राजकीय इंटर कॉलेज के दो प्रवक्ताओं पर स्कूल की छात्राओं ने छेड़छाड़ करने के साथ मानसिक उत्पीड़न करने व अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। छात्राओं का यह भी कहना था कि बात न मानने पर दोनों प्रवक्ता प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी देते हैं। प्रकरण के उजागर होने के बाद छात्राओें के परिजनोें के साथ क्षेत्रीय लोगों ने विद्यालय में जमकर हंगामा किया था।
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प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से इसकी जांच कराई गई। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा रामकृष्ण उनियाल ने प्रकरण की जांच मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी और खंड शिक्षा अधिकारी भटवाड़ी को सौंपी थी। विभागीय स्तर पर जांच पूरी होने व जांच मेें प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद अपर निदेशक ने दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा गढ़वाल मंडल कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। अपर निदेशक का कहना है कि निलंबित किए गए दोनों प्रवक्ताओं को आरोपपत्र अलग से जारी किए जाएंगे।
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पुलिस टीम ने गांव जाकर की पूछताछ
उत्तरकाशी। क्षेत्र के एक राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों द्वारा नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने भी गांव पहुंचकर पूछताछ की। थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि छेड़खानी के इस मामले की जांच महिला एसआई मनीषा नेगी को सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने संबंधित गांव जाकर ग्रामीणों से पूछताछ की। जल्द ही इस मामले में पीड़ित छात्राओं के बयान लिए जाएंगे। इधर बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक पंकज कुमार ने इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि छह दिसंबर को छात्राओं द्वारा लिखित शिकायत देने के बावजूद इस मामले को रफा दफा करने की नीयत से इतने दिनों तक दबा कर रखा गया। संज्ञान में होने पर भी विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सीईओ ने इस मामले में पुलिस को सूचित नहीं किया। यह पोक्सो अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने बताया कि मामले में प्रधानाचार्य से भी विद्यालय में इस तरह की अनुशासनहीनता को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। ब्यूरो
पुलिस टीम ने गांव जाकर की पूछताछ
उत्तरकाशी। क्षेत्र के एक राजकीय इंटर कालेज में शिक्षकों द्वारा नाबालिग छात्राओं के साथ छेड़छाड़ के मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद पुलिस टीम ने भी गांव पहुंचकर पूछताछ की। थानाध्यक्ष महादेव उनियाल ने बताया कि छेड़खानी के इस मामले की जांच महिला एसआई मनीषा नेगी को सौंपी गई है। शुक्रवार को उन्होंने संबंधित गांव जाकर ग्रामीणों से पूछताछ की। जल्द ही इस मामले में पीड़ित छात्राओं के बयान लिए जाएंगे। इधर बचपन बचाओ आंदोलन के राज्य समन्वयक पंकज कुमार ने इस मामले में विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं मुख्य शिक्षा अधिकारी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए हैं। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखकर उन्होंने कहा कि छह दिसंबर को छात्राओं द्वारा लिखित शिकायत देने के बावजूद इस मामले को रफा दफा करने की नीयत से इतने दिनों तक दबा कर रखा गया। संज्ञान में होने पर भी विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं सीईओ ने इस मामले में पुलिस को सूचित नहीं किया। यह पोक्सो अधिनियम का उल्लंघन है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। इधर, मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने बताया कि मामले में प्रधानाचार्य से भी विद्यालय में इस तरह की अनुशासनहीनता को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। ब्यूरो