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गरीब बच्चों को सीमित सीटों पर ही मिलेगा प्रवेश
Updated Sat, 06 Oct 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने पर ग्रहण लग गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य के निजी स्कूलों में अभी तक 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाता है, लेकिन सरकार इसे अब कम करने जा रही है। बजट के अभाव में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने अधिकारियों को पत्र भेजकर निजी स्कूलों में सीमित सीटों पर प्रवेश देने के निर्देश दे दिए हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं किया है कि कितनी फीसदी सीटें कम की हैं।
आरटीई के तहत शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में जितने भी एडमिशन कराता है, उसके बदले में उसे शुल्क का भुगतान करना होता है। केंद्र सरकार की योजना के चलते शुल्क का बजट वहीं से जारी होता है। इसके अलावा प्रवेश पाने वाले बच्चों की किताबों व ड्रेस इत्यादि का खर्च भी प्रतिपूर्ति व्यय के रूप में सरकार ही देती है, लेकिन केंद्र सरकार स्कूलों को दिए जाने वाले शुल्क का भुगतान नहीं कर रही है। इसी को देखते हुए निजी स्कूल प्रबंधक अब योजना में कम दिलचस्पी ले रहे हैं। सरकार ने किसी तरह दबाव बनाकर प्रवेश तो दिला दिए हैं, लेकिन अब निजी स्कूल लगातार शुल्क भुगतान का दबाव बना रहे हैं।
जबकि शिक्षा विभाग की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह निजी स्कूलों के शुल्क का भुगतान कर सके। इसी को देखते हुए महानिदेशक ने विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर सीमित सीटों पर प्रवेश कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए विभाग की माली हालत का हवाला दिया है।
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क्या हैं आरटीई के प्रावधान
आरटीई के प्रावधानों के मुताबिक केवल अपवंचित वर्ग के छात्रों को उनके निवास के एक किमी परिधि में स्थित निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन करना होता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी सभी आवेदकों की सूची तैयार कर अलग-अलग स्कूलों में सीटों का आवंटन करते हैं। निजी विद्यालय की पहली कक्षा की 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश दिए जाते हैं। प्रदेश में अभी करीब छह हजार सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश कराए गए हैं।
केंद्र सरकार में हमने इस बिंदु को उठाया भी था। एक्ट के अनुसार, राज्य सरकार पहले अपने बजट से भुगतान करती है और भुगतान के बाद रसीद जमा करने पर केंद्र बजट जारी करती है, लेकिन राज्य सरकार साफ कर चुकी है कि हमारे पास पैसा नहीं है। हमने शिथिलीकरण की मांग की, लेकिन केंद्र ने इससे पूरी तरह इनकार कर दिया है।
कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा
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देहरादून। गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने पर ग्रहण लग गया है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत राज्य के निजी स्कूलों में अभी तक 25 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाता है, लेकिन सरकार इसे अब कम करने जा रही है। बजट के अभाव में महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा ने अधिकारियों को पत्र भेजकर निजी स्कूलों में सीमित सीटों पर प्रवेश देने के निर्देश दे दिए हैं। हालांकि अभी यह तय नहीं किया है कि कितनी फीसदी सीटें कम की हैं।
आरटीई के तहत शिक्षा विभाग निजी स्कूलों में जितने भी एडमिशन कराता है, उसके बदले में उसे शुल्क का भुगतान करना होता है। केंद्र सरकार की योजना के चलते शुल्क का बजट वहीं से जारी होता है। इसके अलावा प्रवेश पाने वाले बच्चों की किताबों व ड्रेस इत्यादि का खर्च भी प्रतिपूर्ति व्यय के रूप में सरकार ही देती है, लेकिन केंद्र सरकार स्कूलों को दिए जाने वाले शुल्क का भुगतान नहीं कर रही है। इसी को देखते हुए निजी स्कूल प्रबंधक अब योजना में कम दिलचस्पी ले रहे हैं। सरकार ने किसी तरह दबाव बनाकर प्रवेश तो दिला दिए हैं, लेकिन अब निजी स्कूल लगातार शुल्क भुगतान का दबाव बना रहे हैं।
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जबकि शिक्षा विभाग की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह निजी स्कूलों के शुल्क का भुगतान कर सके। इसी को देखते हुए महानिदेशक ने विभागीय अधिकारियों को पत्र लिखकर सीमित सीटों पर प्रवेश कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने इसके लिए विभाग की माली हालत का हवाला दिया है।
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क्या हैं आरटीई के प्रावधान
आरटीई के प्रावधानों के मुताबिक केवल अपवंचित वर्ग के छात्रों को उनके निवास के एक किमी परिधि में स्थित निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आवेदन करना होता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी सभी आवेदकों की सूची तैयार कर अलग-अलग स्कूलों में सीटों का आवंटन करते हैं। निजी विद्यालय की पहली कक्षा की 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश दिए जाते हैं। प्रदेश में अभी करीब छह हजार सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश कराए गए हैं।
केंद्र सरकार में हमने इस बिंदु को उठाया भी था। एक्ट के अनुसार, राज्य सरकार पहले अपने बजट से भुगतान करती है और भुगतान के बाद रसीद जमा करने पर केंद्र बजट जारी करती है, लेकिन राज्य सरकार साफ कर चुकी है कि हमारे पास पैसा नहीं है। हमने शिथिलीकरण की मांग की, लेकिन केंद्र ने इससे पूरी तरह इनकार कर दिया है।
कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा