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अल्ट्रासाउंड करने के लिए पास करना होगा सीबीईटी
Updated Wed, 13 Jun 2018 02:00 AM IST
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अल्ट्रासाउंड करने के लिए पास करना होगा सीबीईटी
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। शिक्षा विभाग में टीईटी की तर्ज पर अब स्वास्थ्य विभाग में सीबीईटी पास करना होगा अनिवार्य होगा। नए नियमों के तहत एमबीबीएस के बाद छह माह का डिप्लोमा कोर्स करने वाले रेडियोलॉजिस्ट को अब कंपीटेंसी बेस्ड इवैलुएशन टेस्ट (सीबीईटी) देना होगा। इसमें पास होने के बाद ही अब रेडियोलॉजिस्ट गंभीर मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर सकेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सीबीईटी कराने की जिम्मेदारी हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।
राज्य में स्वास्थ्य विभाग के अलावा तमाम ऐसे निजी प्रैक्टिस करने वाले रेडियोलॉजिस्ट हैं जो एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद छह महीने का डिप्लोमा कोर्स किए हुए हैं। अब तक इसी डिप्लोमा कोर्स के आधार पर डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता था। जिसके बाद उन्हें अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति मिल जाती थी, लेकिन अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने इसमें बदलाव कर दिया है। नए प्रावधानों के मुताबिक अब ऐसे एमबीबीएस डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड करने के लिए कंपीटेंसी बेस्ड इवैल्युएशन टेस्ट (सीबीईटी) पास करना होगा। इसमें पास होने के बाद ही छह माह का डिप्लोमा कोर्स करने वाले ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर सकेंगे। जो सीबीईटी में फेल हो जाएंगे उनको अल्ट्रासाउंड करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
एसीएमओ डॉ. केके सिंह ने बताया कि अकेले दून शहर में ही ऐसे 11 रेडियोलॉजिस्ट को चिन्हित किया गया है, जो एमबीबीएस डिग्री लेने के बाद मेें छह माह का डिप्लोमा कोर्स किए हुए हैं, ऐसे सभी डॉक्टरों को हिदायत दी गई है कि वह हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से सीबीईटी पास करने के बाद ही अल्ट्रासाउंड करें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पूरे राज्य में करीब 200 से अधिक ऐसे रेडियोलॉजिस्ट हैं जो सीबीईटी के दायरे में आएंगे।
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स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने भी सभी सीएमओ को आदेश जारी किया है कि वह अपने जिलों में ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित करें जो सीबीईटी के दायरे में आते हैं। परीक्षा पास होने के बाद ही अल्ट्रासाउंड कराने की अनुमति जाए।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। शिक्षा विभाग में टीईटी की तर्ज पर अब स्वास्थ्य विभाग में सीबीईटी पास करना होगा अनिवार्य होगा। नए नियमों के तहत एमबीबीएस के बाद छह माह का डिप्लोमा कोर्स करने वाले रेडियोलॉजिस्ट को अब कंपीटेंसी बेस्ड इवैलुएशन टेस्ट (सीबीईटी) देना होगा। इसमें पास होने के बाद ही अब रेडियोलॉजिस्ट गंभीर मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर सकेंगे। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। सीबीईटी कराने की जिम्मेदारी हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय को सौंपी गई है।
राज्य में स्वास्थ्य विभाग के अलावा तमाम ऐसे निजी प्रैक्टिस करने वाले रेडियोलॉजिस्ट हैं जो एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद छह महीने का डिप्लोमा कोर्स किए हुए हैं। अब तक इसी डिप्लोमा कोर्स के आधार पर डॉक्टरों का पंजीकरण किया जाता था। जिसके बाद उन्हें अल्ट्रासाउंड करने की अनुमति मिल जाती थी, लेकिन अब मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने इसमें बदलाव कर दिया है। नए प्रावधानों के मुताबिक अब ऐसे एमबीबीएस डॉक्टरों को अल्ट्रासाउंड करने के लिए कंपीटेंसी बेस्ड इवैल्युएशन टेस्ट (सीबीईटी) पास करना होगा। इसमें पास होने के बाद ही छह माह का डिप्लोमा कोर्स करने वाले ही मरीजों का अल्ट्रासाउंड कर सकेंगे। जो सीबीईटी में फेल हो जाएंगे उनको अल्ट्रासाउंड करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।
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एसीएमओ डॉ. केके सिंह ने बताया कि अकेले दून शहर में ही ऐसे 11 रेडियोलॉजिस्ट को चिन्हित किया गया है, जो एमबीबीएस डिग्री लेने के बाद मेें छह माह का डिप्लोमा कोर्स किए हुए हैं, ऐसे सभी डॉक्टरों को हिदायत दी गई है कि वह हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय से सीबीईटी पास करने के बाद ही अल्ट्रासाउंड करें अन्यथा उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पूरे राज्य में करीब 200 से अधिक ऐसे रेडियोलॉजिस्ट हैं जो सीबीईटी के दायरे में आएंगे।
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स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने भी सभी सीएमओ को आदेश जारी किया है कि वह अपने जिलों में ऐसे डॉक्टरों को चिन्हित करें जो सीबीईटी के दायरे में आते हैं। परीक्षा पास होने के बाद ही अल्ट्रासाउंड कराने की अनुमति जाए।