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13-14 जून को कार्य बहिष्कार करेंगे कार्मिक
Updated Sat, 09 Jun 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
सात सूत्री मांगों के समर्थन में उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से जुड़े कर्मचारी 13 और 14 जून को कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। शुक्रवार को कर्मचारियों ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई।
यमुना कॉलोनी स्थित सद्भावना भवन में आयोजित संयोजक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों ने आंदोलन के तीसरे चरण पर चर्चा की। मुख्य संयोजक नवीन कांडपाल और संयोजक सचिव सुनील कोठारी ने बताया कि 13 और 14 जून को उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से जुड़े प्रदेश के सभी कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय में उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर करने के बाद कार्य बहिष्कार करते हुए कार्यालय प्रांगण में धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सात सूत्री मांगों पर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए धरना देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के कई मंत्रियों के सहमति जताने और निर्देशित करने के बावजूद मुख्य सचिव के स्तर से मांगों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
इससे साफ है कि शासन के अधिकारियों पर मंत्रियों के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। प्रदेश प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी समन्वय मंच के सात सूत्री मांग पत्र पर वार्ता में कोई रुचि नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि कार्य बहिष्कार के बाद कर्मचारी 22 जून को राजधानी में रैली निकाल विरोध जताएंगे। बैठक में हरीश नौटियाल, सुभाष देवलियाल, रमेश रमोला, पंचम सिंह बिष्ट, प्रताप सिंह पंवार, बीएस पयाल, अनंत राम शर्मा, संदीप कुमार मौर्य, विक्रम सिंह नेगी, आरएस मेहरा, एसएस चौहान, प्रदीप कुमार शुक्ला, सुभाष रतूड़ी समेत अन्य शामिल मौजूद थे।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारी प्रदेश के सभी कार्मिकों को केंद्र सरकार के समान सभी भत्ते अनुमन्य करने, सभी कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति अनिवार्य रूप से देने, यू हेल्थ स्मार्ट कार्ड की सुविधा तत्काल लागू करने, अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत करने, अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, अंतिम वर्ष की सेवा कर रहे कार्मिकों को स्थानांतरण अधिनियम में ऐच्छिक स्थान पर स्थानांतरण का लाभ देने और वेतन विसंगति समिति की रिपोर्ट में कर्मचारी विरोधी निर्णयों को लागू नहीं करने की मांग कर रहे हैं।
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सात सूत्री मांगों के समर्थन में उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से जुड़े कर्मचारी 13 और 14 जून को कार्य बहिष्कार पर रहेंगे। शुक्रवार को कर्मचारियों ने बैठक कर आंदोलन की रणनीति बनाई।
यमुना कॉलोनी स्थित सद्भावना भवन में आयोजित संयोजक मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में कर्मचारियों ने आंदोलन के तीसरे चरण पर चर्चा की। मुख्य संयोजक नवीन कांडपाल और संयोजक सचिव सुनील कोठारी ने बताया कि 13 और 14 जून को उत्तराखंड अधिकारी-कर्मचारी समन्वय मंच से जुड़े प्रदेश के सभी कर्मचारी अपने-अपने कार्यालय में उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर करने के बाद कार्य बहिष्कार करते हुए कार्यालय प्रांगण में धरना-प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सात सूत्री मांगों पर प्रदेश सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए धरना देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार के कई मंत्रियों के सहमति जताने और निर्देशित करने के बावजूद मुख्य सचिव के स्तर से मांगों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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इससे साफ है कि शासन के अधिकारियों पर मंत्रियों के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। प्रदेश प्रवक्ता पूर्णानंद नौटियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी समन्वय मंच के सात सूत्री मांग पत्र पर वार्ता में कोई रुचि नहीं दिखाई है। उन्होंने कहा कि कार्य बहिष्कार के बाद कर्मचारी 22 जून को राजधानी में रैली निकाल विरोध जताएंगे। बैठक में हरीश नौटियाल, सुभाष देवलियाल, रमेश रमोला, पंचम सिंह बिष्ट, प्रताप सिंह पंवार, बीएस पयाल, अनंत राम शर्मा, संदीप कुमार मौर्य, विक्रम सिंह नेगी, आरएस मेहरा, एसएस चौहान, प्रदीप कुमार शुक्ला, सुभाष रतूड़ी समेत अन्य शामिल मौजूद थे।
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कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
कर्मचारी प्रदेश के सभी कार्मिकों को केंद्र सरकार के समान सभी भत्ते अनुमन्य करने, सभी कार्मिकों को पूरे सेवाकाल में न्यूनतम तीन पदोन्नति अनिवार्य रूप से देने, यू हेल्थ स्मार्ट कार्ड की सुविधा तत्काल लागू करने, अर्हकारी सेवा में शिथिलीकरण की पूर्ववर्ती व्यवस्था को यथावत करने, अंशदायी पेंशन योजना के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने, अंतिम वर्ष की सेवा कर रहे कार्मिकों को स्थानांतरण अधिनियम में ऐच्छिक स्थान पर स्थानांतरण का लाभ देने और वेतन विसंगति समिति की रिपोर्ट में कर्मचारी विरोधी निर्णयों को लागू नहीं करने की मांग कर रहे हैं।