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प्रशिक्षण के अभाव में दांव पर जिंदगी
Updated Mon, 23 Apr 2018 12:24 AM IST
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रुड़की। उत्तराखंड निगम की बसों के चालक-परिचालक आग से निपटने के लिए प्रशिक्षित ही नहीं हैं। ऐसे में यदि बस में आग लगने जैसी घटना होती है तो यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे होती है। अग्निशमन विभाग का कहना है कि यदि रोडवेज प्रशासन चालक-परिचालकों को प्रशिक्षण देने की मांग करता है तो उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।
शनिवार को चिड़ियापुर (हरिद्वार) में टनकपुर डिपो की बस में आग लगने के बाद, बसों को आग से बचाने की चर्चा हो रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों का कहना था कि यदि चालक-परिचालक फायर सिलिंडर चलाने में दक्ष होते तो बस को जलने से बचाया जा सकता था। बताया जा रहा है कि बस में आग लगने के बाद टनकपुर डिपो के चालक-परिचालक मौके से फरार हो गए थे। अमर उजाला की टीम की ओर से रविवार को रुड़की डिपो में बसों में फायर सिलिंडर को लेकर पड़ताल की, लेकिन अधिकांश पुरानी बसों में फायर सिलिंडर नहीं थे। जो नई बसें हैं उनमें सिलिंडर लगे हुए थे। जब कुछ चालक परिचालकों से बस में रखे फायर सिलिंडर चलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमें इसका प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता। वहीं एक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुझे रोडवेज में नौकरी करते हुए 24 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक आग बुझाने का किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
रोडवेज के चालक-परिचालकों का प्रशिक्षित होना जरूरी है। यदि रोडवेज प्रशासन की ओर से उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कहा जाएगा तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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अनिल त्यागी, अग्निशमन अधिकारी, रुड़की
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शनिवार को चिड़ियापुर (हरिद्वार) में टनकपुर डिपो की बस में आग लगने के बाद, बसों को आग से बचाने की चर्चा हो रही हैं। रोडवेज कर्मचारियों का कहना था कि यदि चालक-परिचालक फायर सिलिंडर चलाने में दक्ष होते तो बस को जलने से बचाया जा सकता था। बताया जा रहा है कि बस में आग लगने के बाद टनकपुर डिपो के चालक-परिचालक मौके से फरार हो गए थे। अमर उजाला की टीम की ओर से रविवार को रुड़की डिपो में बसों में फायर सिलिंडर को लेकर पड़ताल की, लेकिन अधिकांश पुरानी बसों में फायर सिलिंडर नहीं थे। जो नई बसें हैं उनमें सिलिंडर लगे हुए थे। जब कुछ चालक परिचालकों से बस में रखे फायर सिलिंडर चलाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि हमें इसका प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता। वहीं एक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मुझे रोडवेज में नौकरी करते हुए 24 साल हो गए हैं, लेकिन आज तक आग बुझाने का किसी प्रकार का प्रशिक्षण नहीं दिया गया।
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रोडवेज के चालक-परिचालकों का प्रशिक्षित होना जरूरी है। यदि रोडवेज प्रशासन की ओर से उन्हें प्रशिक्षण देने के लिए कहा जाएगा तो उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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अनिल त्यागी, अग्निशमन अधिकारी, रुड़की