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हर मुकाबले को तैयार आईटीबीपी के हिमवीर
Updated Tue, 04 Jul 2017 10:23 PM IST
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उत्तरकाशी। 1962 में भारत चीन युद्ध के बाद लगातार दोनों देेशों के रिश्तों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। इस बीच कई बार चीन ने भारत को गीदड़भभकी भी दी है, लेकिन देेश की सुरक्षा में सीमा पर तैनात हिमवीर अपनी वतन की आन-बान और शान के लिए हर मुकाबले से निपटने को तैयार हैं।
उत्तराखंड में 345 किमी लंबी सीमा चीन से सटी हुई है। इनमें करीब 133 किमी का क्षेत्र उत्तरकाशी जिले में है। इसमें से 77 किमी के दायरे में यहां देश की सुरक्षा में सीमा पर आईटीबीपी की 12वीं और 35वीं वाहिनी की अलग-अलग कंपनियां तैनात हैं, जबकि इसके अलावा सेकेंड महर रेजीमेंट की कंपनी भी तैनात है। नेलांग, जादुंग, पीडीए, मंडी, सोनम, नीलापानी, कोपांग आदि जगहों पर बाहरों महीने धूप, सर्दी और बर्फबारी को झेलते हुए आईटीबीपी के हिमवीर तैनात रहते हैं। 12वीं वाहिनी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि सीमा पर करीब 77 किमी के दायरे में आईटीबीपी के हिमवीर चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से यहां चीन से लगती सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
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उत्तराखंड में 345 किमी लंबी सीमा चीन से सटी हुई है। इनमें करीब 133 किमी का क्षेत्र उत्तरकाशी जिले में है। इसमें से 77 किमी के दायरे में यहां देश की सुरक्षा में सीमा पर आईटीबीपी की 12वीं और 35वीं वाहिनी की अलग-अलग कंपनियां तैनात हैं, जबकि इसके अलावा सेकेंड महर रेजीमेंट की कंपनी भी तैनात है। नेलांग, जादुंग, पीडीए, मंडी, सोनम, नीलापानी, कोपांग आदि जगहों पर बाहरों महीने धूप, सर्दी और बर्फबारी को झेलते हुए आईटीबीपी के हिमवीर तैनात रहते हैं। 12वीं वाहिनी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि सीमा पर करीब 77 किमी के दायरे में आईटीबीपी के हिमवीर चौबीसों घंटे देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से यहां चीन से लगती सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है।
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