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मानसून सिर पर, प्रशासन नींद में
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:03 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड में भी मानसून लगभग दस्तक दे चुका है। गंगा हर साल अपने किनारे बसे गांवों में तबाही मचाती है। करीब चार साल पहले क्षतिग्रस्त हुए तटबंधों की मरम्मत प्रशासन नहीं करा पाया। ऐसे में बरसात में गंगा का पानी दर्जनों गांवों की नींद उड़ाएगा।
बरसात के दिनों में हर साल श्यामपुर, पथरी क्षेत्र में गंगा उफना पर रहती है। पहाड़ों में भारी बारिश के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने पर पानी तटवर्ती गांवों की आबादी तक जा पहुंचता है। हर साल किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो जाती है। कुछ गांवों में हालात नियंत्रण से बाहर होने पर किसानों को कुछ दिनों के लिए अपने घर बाहर भी छोड़ने पड़ते हैं। हर साल इन परिस्थितियों को खुली आंखों से देखने और हाथ पांव मारने वाला प्रशासन समय रहते कोई कदम नहीं उठाता। फिलहाल स्थिति यह है कि मानसून दस्तक दे चुका है और प्रशासन की बाढ़ से बचने के लिए तटबंध का निर्माण नहीं कर सका। सालों पहले टूटे तटबंध अभी भी जस के तस हैं।
ग्रामीणों को सता रहा बाढ़ का खतरा
श्यामपुर। क्षेत्र के पांच गांवों के लोगों को बरसात से पहले ही बाढ़ का खतरा सताने लगा है। गांव को बचाने के लिए गंगा में कोई सुरक्षा दीवार या वायर क्रेट नही बनाई गई है। कागड़ी, गाजीवाली, श्यामपुर, सजनपुर पीली और टाटवाला गांव में वर्ष 2013 की आपदा के समय भरी तबाही मची थी। गांव की काफी कृषि भूमि का कटाव हो गया था। वहीं टाटवाला, कांगड़ी गांव में पानी में घुस गया था। गांव की सुरक्षा के लिए लगाई गई वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। गांव को बाढ़ से बचाने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा इन वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक की मरम्मत तक नही की गई है। ग्रामीण सुंदर, ओमप्रकाश, राजन, मुन्नू, गुड्डू अशोक कुमार, अनिल, भोपाल, राजकुमार, दीपक, रमेश कश्यप, अज्जू और मामचंद आदि का कहना है कि जब बरसात के समय गंगा में पानी उफान पर रहता है तो जिला प्रशासन गांव खाली करने के लिए कहता है। समय रहते हुए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। कांगड़ी के ग्राम प्रधान राजेश कुमार का कहना है कि कांगड़ी गांव में वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक की मरम्मत कराने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा था।
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बीस गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
पथरी। गांव बिशनपुर कुंडी व पुरानी कुंडी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और डीएम से बरसात से पहले गंगा किनारे क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते तटबंध की मरम्मत नहीं हुई तो बरसात के दिनों में गंगा में पानी बढ़ने पर भूमि का कटाव होने पर करीब बीस गांवों को बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्राम प्रधान सविता देवी का कहना है कि बार-बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत की मांग की जा चुकी है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
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हरिद्वार।
उत्तराखंड में भी मानसून लगभग दस्तक दे चुका है। गंगा हर साल अपने किनारे बसे गांवों में तबाही मचाती है। करीब चार साल पहले क्षतिग्रस्त हुए तटबंधों की मरम्मत प्रशासन नहीं करा पाया। ऐसे में बरसात में गंगा का पानी दर्जनों गांवों की नींद उड़ाएगा।
बरसात के दिनों में हर साल श्यामपुर, पथरी क्षेत्र में गंगा उफना पर रहती है। पहाड़ों में भारी बारिश के बाद गंगा का जलस्तर बढ़ने पर पानी तटवर्ती गांवों की आबादी तक जा पहुंचता है। हर साल किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो जाती है। कुछ गांवों में हालात नियंत्रण से बाहर होने पर किसानों को कुछ दिनों के लिए अपने घर बाहर भी छोड़ने पड़ते हैं। हर साल इन परिस्थितियों को खुली आंखों से देखने और हाथ पांव मारने वाला प्रशासन समय रहते कोई कदम नहीं उठाता। फिलहाल स्थिति यह है कि मानसून दस्तक दे चुका है और प्रशासन की बाढ़ से बचने के लिए तटबंध का निर्माण नहीं कर सका। सालों पहले टूटे तटबंध अभी भी जस के तस हैं।
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ग्रामीणों को सता रहा बाढ़ का खतरा
श्यामपुर। क्षेत्र के पांच गांवों के लोगों को बरसात से पहले ही बाढ़ का खतरा सताने लगा है। गांव को बचाने के लिए गंगा में कोई सुरक्षा दीवार या वायर क्रेट नही बनाई गई है। कागड़ी, गाजीवाली, श्यामपुर, सजनपुर पीली और टाटवाला गांव में वर्ष 2013 की आपदा के समय भरी तबाही मची थी। गांव की काफी कृषि भूमि का कटाव हो गया था। वहीं टाटवाला, कांगड़ी गांव में पानी में घुस गया था। गांव की सुरक्षा के लिए लगाई गई वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। गांव को बाढ़ से बचाने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा इन वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक की मरम्मत तक नही की गई है। ग्रामीण सुंदर, ओमप्रकाश, राजन, मुन्नू, गुड्डू अशोक कुमार, अनिल, भोपाल, राजकुमार, दीपक, रमेश कश्यप, अज्जू और मामचंद आदि का कहना है कि जब बरसात के समय गंगा में पानी उफान पर रहता है तो जिला प्रशासन गांव खाली करने के लिए कहता है। समय रहते हुए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। कांगड़ी के ग्राम प्रधान राजेश कुमार का कहना है कि कांगड़ी गांव में वायर क्रेट और सीसी ब्लॉक की मरम्मत कराने के लिए सिंचाई विभाग को पत्र लिखा था।
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बीस गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा
पथरी। गांव बिशनपुर कुंडी व पुरानी कुंडी के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और डीएम से बरसात से पहले गंगा किनारे क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते तटबंध की मरम्मत नहीं हुई तो बरसात के दिनों में गंगा में पानी बढ़ने पर भूमि का कटाव होने पर करीब बीस गांवों को बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्राम प्रधान सविता देवी का कहना है कि बार-बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से क्षतिग्रस्त तटबंध की मरम्मत की मांग की जा चुकी है। इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।