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108 के पूर्व कर्मचारियों का विवाद पहुंचा श्रम विभाग
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों का विवाद श्रम विभाग पहुंच चुका है। श्रम विभाग ने कर्मचारियों और दोनों कंपनियों को विवाद बातचीत के जरिए सुलझाने का मौका दिया है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज लेकर 15 मई को उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। इधर, आंदोलनकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को जीवीके कार्यालय का घेराव किया और वेतन दिलाए जाने की मांग की। इसके साथ ही कैंप के अधिकारियों से भी बात की।
बता दें, आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के 717 पूर्व कर्मचारी अपने दो माह के वेतन दिलाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नई कंपनी में समायोजित नहीं किया गया है जबकि, उनके पास अनुभव है। कर्मचारी गत 30 अप्रैल से आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को यह विवाद श्रम विभाग पहुंच गया। श्रमायुक्त ने तीनों पक्षों को सबसे पहले आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने का मौका दिया है। श्रम विभाग में अब इस मामले की सुनवाई 15 मई को होनी है।
कंपनी नहीं एनजीओ है जीवीके
विवाद के बीच पता चला है कि जीवीके जो कि 11 साल से आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 सेवा का संचालन कर रही थी वह कंपनी नहीं बल्कि एक एनजीओ है। कर्मचारियों ने विवाद खड़ा कर दिया कि कैसे एक एनजीओ इतनी बड़ी सेवा को संचालित कर सकती है, लेकिन श्रम विभाग से जानकारी मिली कि एनजीओ या सोसायटी एक्ट में पंजीकृत कोई भी संस्था इस तरह का संचालन कर सकती है। इससे पहले जीवीके देश के 17 राज्यों और श्रीलंका में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 का संचालन कर रही है।
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विभाग ने बताए 40 प्रतिशत, कंपनी ने 33 फीसदी
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने पिछले दिनों बताया था कि कैंप कंपनी ने जीवीके के पूर्व कर्मचारियों को बड़ी संख्या में भर्ती किया है। इनकी संख्या 40 फीसदी बताई गई थी। उस वक्त तक कैंप के अधिकारी भी इनकी संख्या 40 फीसदी ही बता रहे थे। शुक्रवार को कैंप के प्रदेश प्रभारी प्रदीप राय ने बताया कि उन्होंने 600 कर्मचारी भर्ती किए हैं, जिनमें से 200 कर्मचारी पूर्व की कंपनी के हैं। यह संख्या लगभग 33 फीसदी है।
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आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के पूर्व कर्मचारियों का विवाद श्रम विभाग पहुंच चुका है। श्रम विभाग ने कर्मचारियों और दोनों कंपनियों को विवाद बातचीत के जरिए सुलझाने का मौका दिया है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज लेकर 15 मई को उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। इधर, आंदोलनकारी कर्मचारियों ने शुक्रवार को जीवीके कार्यालय का घेराव किया और वेतन दिलाए जाने की मांग की। इसके साथ ही कैंप के अधिकारियों से भी बात की।
बता दें, आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 के 717 पूर्व कर्मचारी अपने दो माह के वेतन दिलाने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें नई कंपनी में समायोजित नहीं किया गया है जबकि, उनके पास अनुभव है। कर्मचारी गत 30 अप्रैल से आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को यह विवाद श्रम विभाग पहुंच गया। श्रमायुक्त ने तीनों पक्षों को सबसे पहले आपसी बातचीत से विवाद सुलझाने का मौका दिया है। श्रम विभाग में अब इस मामले की सुनवाई 15 मई को होनी है।
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कंपनी नहीं एनजीओ है जीवीके
विवाद के बीच पता चला है कि जीवीके जो कि 11 साल से आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 सेवा का संचालन कर रही थी वह कंपनी नहीं बल्कि एक एनजीओ है। कर्मचारियों ने विवाद खड़ा कर दिया कि कैसे एक एनजीओ इतनी बड़ी सेवा को संचालित कर सकती है, लेकिन श्रम विभाग से जानकारी मिली कि एनजीओ या सोसायटी एक्ट में पंजीकृत कोई भी संस्था इस तरह का संचालन कर सकती है। इससे पहले जीवीके देश के 17 राज्यों और श्रीलंका में आपातकालीन एंबुलेंस सेवा 108 का संचालन कर रही है।
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विभाग ने बताए 40 प्रतिशत, कंपनी ने 33 फीसदी
स्वास्थ्य महानिदेशालय ने पिछले दिनों बताया था कि कैंप कंपनी ने जीवीके के पूर्व कर्मचारियों को बड़ी संख्या में भर्ती किया है। इनकी संख्या 40 फीसदी बताई गई थी। उस वक्त तक कैंप के अधिकारी भी इनकी संख्या 40 फीसदी ही बता रहे थे। शुक्रवार को कैंप के प्रदेश प्रभारी प्रदीप राय ने बताया कि उन्होंने 600 कर्मचारी भर्ती किए हैं, जिनमें से 200 कर्मचारी पूर्व की कंपनी के हैं। यह संख्या लगभग 33 फीसदी है।