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शिक्षा विभाग में बनेगा प्रमोशन का कैलेंडर
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
शिक्षा विभाग में अब प्रमोशन का भी कैलेंडर तैयार होगा। इससे कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति और पदोन्नति में होने वाली विसंगति की समस्या का समाधान हो सकेगा। कैलेंडर के जरिये एक वर्ष पहले ही पदोन्नति का समय, कहां-कहां पद रिक्त होंगे और शिक्षकों की तैनाती निर्धारित कर दी जाएगी।
शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। एलटी से प्रवक्ता, एलटी प्रवक्ता से प्रधानाध्यापक और प्रधानाध्यापक से प्रधानाचार्य समेत अन्य पदों पर पदोन्नति होती है। इसके लिए न्यूनतम सेवा अवधि तय है, लेकिन पदोन्नति कब होगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती थी। कई बार डीपीसी न होने के कारण कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही वर्षों की सेवा कर लेते हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग अब पदोन्नति का कैलेंडर तैयार करने जा रहा है। कैलेंडर में किस पद पर कितने कर्मचारी, अधिकारी पदोन्नति के पात्र हैं, कौन-कौन से पद रिक्त होने वाले हैं, कितने कार्मिक पदोन्नति की अर्हता पूरी कर चुके हैं, किन स्थानों पर रिक्त पदों के सापेक्ष नियुक्ति होनी है, पदोन्नति का टाइम टेबल आदि बिंदु शामिल रहेंगे।
शिक्षा सचिव से मिले माझिला
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माझिला ने शुक्रवार को शिक्षा सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी पदों पर नियमित पदोन्नति करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति समय पर न होने से कई शिक्षकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है। डॅा. सुंदरम ने नियमित पदोन्नति व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया है।
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जिलों की दया पर कार्मिक
शिक्षा विभाग में जिला, मंडल और निदेशालय स्तर पर पदोन्नति होती है। कई जिले समय से पदोन्नति कर देते हैं, जबकि कई जगह मामले लटके रहते हैं। कार्मिक पूरी तरह सीईओ की दया पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कैंलेंडर जारी होने से सभी जिलों में एक समान व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी।
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कैलेंडर बनने के बाद कर्मचारियों की पदोन्नति की समस्या का समाधान आसान होगा। पदोन्नति और डीपीसी के लिए कर्मचारियों को अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ेगा। वहीं, पदोन्नति के पद भरने से सीधी भर्ती के पद खाली होंगे, जिन पर नए लोगों को तैनाती दी जा सकेगी। विभागीय स्तर पर इसका खाका तैयार किया जा रहा है।
-डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, शिक्षा
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शिक्षा विभाग में अब प्रमोशन का भी कैलेंडर तैयार होगा। इससे कर्मचारियों की नियमित पदोन्नति और पदोन्नति में होने वाली विसंगति की समस्या का समाधान हो सकेगा। कैलेंडर के जरिये एक वर्ष पहले ही पदोन्नति का समय, कहां-कहां पद रिक्त होंगे और शिक्षकों की तैनाती निर्धारित कर दी जाएगी।
शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में पद पदोन्नति के माध्यम से भरे जाते हैं। एलटी से प्रवक्ता, एलटी प्रवक्ता से प्रधानाध्यापक और प्रधानाध्यापक से प्रधानाचार्य समेत अन्य पदों पर पदोन्नति होती है। इसके लिए न्यूनतम सेवा अवधि तय है, लेकिन पदोन्नति कब होगी, इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती थी। कई बार डीपीसी न होने के कारण कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही वर्षों की सेवा कर लेते हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग अब पदोन्नति का कैलेंडर तैयार करने जा रहा है। कैलेंडर में किस पद पर कितने कर्मचारी, अधिकारी पदोन्नति के पात्र हैं, कौन-कौन से पद रिक्त होने वाले हैं, कितने कार्मिक पदोन्नति की अर्हता पूरी कर चुके हैं, किन स्थानों पर रिक्त पदों के सापेक्ष नियुक्ति होनी है, पदोन्नति का टाइम टेबल आदि बिंदु शामिल रहेंगे।
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शिक्षा सचिव से मिले माझिला
राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री डॉ. सोहन सिंह माझिला ने शुक्रवार को शिक्षा सचिव डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी पदों पर नियमित पदोन्नति करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति समय पर न होने से कई शिक्षकों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। बड़ी संख्या में पद रिक्त होने से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का भी नुकसान हो रहा है। डॅा. सुंदरम ने नियमित पदोन्नति व्यवस्था बनाने का आश्वासन दिया है।
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जिलों की दया पर कार्मिक
शिक्षा विभाग में जिला, मंडल और निदेशालय स्तर पर पदोन्नति होती है। कई जिले समय से पदोन्नति कर देते हैं, जबकि कई जगह मामले लटके रहते हैं। कार्मिक पूरी तरह सीईओ की दया पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कैंलेंडर जारी होने से सभी जिलों में एक समान व्यवस्था बनाने में मदद मिलेगी।
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कैलेंडर बनने के बाद कर्मचारियों की पदोन्नति की समस्या का समाधान आसान होगा। पदोन्नति और डीपीसी के लिए कर्मचारियों को अनावश्यक परेशान नहीं होना पड़ेगा। वहीं, पदोन्नति के पद भरने से सीधी भर्ती के पद खाली होंगे, जिन पर नए लोगों को तैनाती दी जा सकेगी। विभागीय स्तर पर इसका खाका तैयार किया जा रहा है।
-डॉ. आर मीनाक्षी सुंदरम, सचिव, शिक्षा