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राज्य में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की तैयारी
Updated Thu, 23 Aug 2018 02:08 AM IST
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राज्य में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की तैयारी
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति के लिए ऊर्जा विभाग केरल की तर्ज पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की तैयारी में है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए निजी पूंजी निवेशकों की भी मदद ली जाएगी। ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अक्तूबर में प्रस्तावित इन्वेस्टर्स मीट में प्रस्तुत किया जाएगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि टिहरी और नैनी झील समेत प्रदेश की बड़ी झीलों एवं जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे सोलर प्लांट के लिए जमीन की जरूरत भी खत्म होगी। फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगने के बाद केरल के बाद उत्तराखंड दूसरा ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां यह अनूठा प्रयोग होगा। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल बनाने वाली देश की नामीगिरामी कंपनियां राज्य में उद्योगधंधे स्थापित करें, इसके लिए भी कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इसके तहत कंपनियों को औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन देने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराने की योजना प्रस्तावित है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से नीति बनाई गई है। प्रयास रहेगा कि इन्वेस्टर्स मीट के दौरान कंपनियां इस क्षेत्र में भी पूंजी निवेश करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां सालाना कई लाख टन पिरूल होता है, जिनका फिलहाल कोई उपयोग नहीं है। ऐसे में बिजली बनने से जहां पिरूल का सदुपयोग होगा वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
उत्तराखंड में बिजली उत्पादन बढ़ाने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति के लिए ऊर्जा विभाग केरल की तर्ज पर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने की तैयारी में है। योजना को धरातल पर उतारने के लिए निजी पूंजी निवेशकों की भी मदद ली जाएगी। ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अक्तूबर में प्रस्तावित इन्वेस्टर्स मीट में प्रस्तुत किया जाएगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि टिहरी और नैनी झील समेत प्रदेश की बड़ी झीलों एवं जलाशयों में फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इससे सोलर प्लांट के लिए जमीन की जरूरत भी खत्म होगी। फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगने के बाद केरल के बाद उत्तराखंड दूसरा ऐसा राज्य बन जाएगा, जहां यह अनूठा प्रयोग होगा। उन्होंने बताया कि सोलर पैनल बनाने वाली देश की नामीगिरामी कंपनियां राज्य में उद्योगधंधे स्थापित करें, इसके लिए भी कई प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इसके तहत कंपनियों को औद्योगिक क्षेत्रों में जमीन देने के साथ ही अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराने की योजना प्रस्तावित है। ऊर्जा सचिव राधिका झा ने बताया कि पिरूल से बिजली बनाने के लिए राज्य सरकार की ओर से नीति बनाई गई है। प्रयास रहेगा कि इन्वेस्टर्स मीट के दौरान कंपनियां इस क्षेत्र में भी पूंजी निवेश करें। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है, जहां सालाना कई लाख टन पिरूल होता है, जिनका फिलहाल कोई उपयोग नहीं है। ऐसे में बिजली बनने से जहां पिरूल का सदुपयोग होगा वहीं स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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