लिमिट पूरी होते ही केदारधाम में नो एंट्री
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केदारधाम में जून 2013 में आई आपदा से सरकार ने अब सबक लिया है। उत्तराखंड शासन ने ऐसी व्यवस्था की है कि अब धाम में जनसैलाब नहीं उमड़ेगा। इसी माह अप्रैल शुरू हो रही यात्रा में अब एक बार में केदारधाम में 5000 यात्रियों से ज्यादा लोगों को जाने की अनुमति नहीं होगी।
इसके अलावा चार धाम के सभी यात्रियों का पंजीकरण भी आवश्यक रूप से किया जाएगा। इसके लिए 18 केंद्र बनाए गए हैं। लेकिन यात्रियों को बायोमेट्रिक्स रजिस्ट्रेशन (मशीन से पंजीकरण) से छूट दी गई है। उनके लिए सिर्फ फोटो पहचानपत्र जारी होंगे।
केदारनाथ यात्रा के लिए राज्यों की ओर से जारी स्वास्थ्य प्रमाणपत्र भी मान्य होंगे। केदारनाथ में तीन हजार लोगों के रहने की व्यवस्था कर ली गई है। दो हजार लोग सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ के बीच के पड़ावों में भी ठहर सकते हैं।
चार धाम यात्रा तैयारी के बारे में सचिव पर्यटन उमाकांत पंवार के मुताबिक केदारनाथ में ठहरने की व्यवस्था गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) करेगा। पैदल मार्ग पर आठ स्थानों पर निगम रियायती दर पर यात्रियों को पकाया हुआ भोजन भी उपलब्ध कराएगा।
स्थानीय टूर ऑपरेटरों को एक बार में एक हजार, जीएमवीएन को एक हजार और पैकेज टूर आपरेटरों को एक हजार यात्रियों को ले जाने की स्वीकृति होगी।
इस बार लगभग 15 लाख यात्रियों का लक्ष्य
यात्रियों के पंजीकरण और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। ऋषिकेश से लेकर सोनप्रयाग के बीच में पंजीकरण के लिए 18 केंद्र बनाए गए हैं। इसके अलावा ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था भी की गई है। पंजीकरण के लिए इस बार सिर्फ फोटो पहचानपत्र ही जारी होगा। इस बार यात्रियों को अंगुलियों के निशान के लिए नहीं जूझना होगा। इसके अलावा यात्री अगर चाहें तो अपने राज्यों की ओर से जारी स्वास्थ्य प्रमाण पत्र भी ला सकते हैं।
यात्री इस वेबसाइट पर अपना ऑन लाइन पंजीकरण करा सकते हैं- www.chardham.com
शासन के मुताबिक इस बार 2013 की आपदा से पहले की यात्रा के करीब 70 प्रतिशत तक यात्री आ सकते हैं। यह आंकड़ा करीब 15 लाख का होगा। अधिक से अधिक यात्रियों को लाने के लिए अब यात्रा प्रमोशन की तैयारी भी की जा रही है।
पर्यटन सचिव उमाकांत पंवार के मुताबिक चार और पांच अप्रैल को देश के चुनिंदा 15 टूर ऑपरेटरों को केदारनाथ ले जाया जा रहा है। इससे सुरक्षित उत्तराखंड का संदेश देने की कोशिश होगी।
अगली यात्रा में रिस्ट बैंड और यात्री ट्रेसिंग सिस्टम
एशियन डेवलपमेंट बैंक के साथ मिलकर बनाई जा रही नई योजना में यात्रियों को रिस्ट बैंड दिए जाएंगे। इसके जरिए इस पर लगातार निगाह रहेगी कि यात्री कहां पर है। शासन के मुताबिक यह योजना अगली बार से लागू हो जाएगी।
केदारनाथ का पैदल मार्ग खोला
केदारनाथ का पैदल मार्ग पूरी तरह से खोल दिया गया है। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान ने पैदल मार्ग पर जमी बर्फ को हटा दिया है। अब निम गुप्तकाशी से केदारनाथ आने-जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग कर रहा है। केदारनाथ में बुधवार को भी बर्फबारी हुई पर पैदल रास्ता पूरी तरह से सुरक्षित है।
जून 2013 की आपदा ने केदारनाथ पैदल मार्ग का नक्शा ही बदल दिया था। पिछले साल की चार धाम यात्रा के दौरान इस रास्ते को अस्थायी रूप से बना लिया गया था।
नया रास्ता रामबाड़ा के बाद मंदाकिनी के दायें तट पर लिनचोली से होकर है। इस तरफ धूप कम आती है और इस कारण इस क्षेत्र में हिमस्खलन की भी आशंका बनी रहती है। निम सूत्रों के मुताबिक इस बार पैदल रूट करीब 21 किलोमीटर का होगा।
रामबाड़ा के बाद इसमें बर्फ शुरू हो जाती है। दूसरी ओर अन्य स्थानों पर बर्फ काटकर गैलरी बना दी गई है। इससे यात्री बर्फ के बीच से होकर केदारनाथ जा सकेंगे। सड़क भी गौरीकुंड से दो किलोमीटर पहले मुनकटिया तक बन गई है। माना जा रहा है कि पैदल यात्रा भी मुनकटिया से ही शुरू होगी। इस हिसाब से पैदल मार्ग करीब साढ़े 21 किलोमीटर का होगा।