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जापानी तकनीक से संरक्षित किया 430 साल पुराना पंचांग
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सुनील सिलवाल। उत्तराखंड संस्कृति विभाग और राज्य अभिलेखागार ने 430 साल पुराने दुर्लभ पंचांग को जापानी तकनीक से संरक्षित किया है। अमर उजाला ने दो जनवरी के अंक में ‘430 साल पुराने पंचांग को संरक्षण की दरकार’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी, जिसका संस्कृति विभाग ने संज्ञान लेते हुए पंचांग को संरक्षित किया।
महानिदेशक और अपर सचिव आनंद स्वरूप के निर्देश पर संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक वीएन सिंह और टेक्निकल अंसिस्टेंट इतिहास मनोज जखमोला ने जापानी तकनीक से पंचांग की कायापलट दी है। सहायक निदेशक वीएन सिंह ने बताया कि पंचांग की एक प्रति राज्य अभिलेखागार में भी रखी गई है। बताया कि संस्कृति विभाग के पास अभी तक 1814 तक के ही अभिलेख मौजूद थे, लेकिन अब सबसे पुराना अभिलेख गोपाल भारद्वाज का 430 साल पुराना पंचांग है। बताया कि इस पंचांग की माइक्रो फिल्म भी तैयार की जा रही है, जिससे इस पांडुलिपि की उम्र करीब 400 साल और बढ़ जाएगी।
मनोज जखमोला ने बताया कि पंचांग की पांडुलिपि की स्टडी की गई। इसके बाद इसे जापानी तकनीक से संरक्षित करने का प्रयोग किया गया। बताया कि इस पर लोकता टिशू पेपर 9 जीएसएम का इस्तेमाल किया गया। मैदा को गर्म करके ग्लूटिन हटाने के बाद उसका लेप पेपर पर लगाया गया है। बताया कि हर पेपर को अलग-अलग संरक्षित किया गया है। इसमें वुडन का भी प्रयोग किया गया है। बताया कि अब इस पंचांग की उम्र करीब 50 साल और बढ़ गई है।
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अमर उजाला का जताया आभार
सहायक निदेशक वीएन सिंह और इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अमर उजाला का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला में खबर छपने के बाद संस्कृति विभाग ने पंचांग के संरक्षण के तत्काल पहल की। अब पंचांग के सदियों तक सुरक्षित रहने की उम्मीद है। गोपाल भारद्वाज ने संस्कृति विभाग के महानिदेशक आनंद स्वरूप का भी आभार व्यक्त किया।
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महानिदेशक और अपर सचिव आनंद स्वरूप के निर्देश पर संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक वीएन सिंह और टेक्निकल अंसिस्टेंट इतिहास मनोज जखमोला ने जापानी तकनीक से पंचांग की कायापलट दी है। सहायक निदेशक वीएन सिंह ने बताया कि पंचांग की एक प्रति राज्य अभिलेखागार में भी रखी गई है। बताया कि संस्कृति विभाग के पास अभी तक 1814 तक के ही अभिलेख मौजूद थे, लेकिन अब सबसे पुराना अभिलेख गोपाल भारद्वाज का 430 साल पुराना पंचांग है। बताया कि इस पंचांग की माइक्रो फिल्म भी तैयार की जा रही है, जिससे इस पांडुलिपि की उम्र करीब 400 साल और बढ़ जाएगी।
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मनोज जखमोला ने बताया कि पंचांग की पांडुलिपि की स्टडी की गई। इसके बाद इसे जापानी तकनीक से संरक्षित करने का प्रयोग किया गया। बताया कि इस पर लोकता टिशू पेपर 9 जीएसएम का इस्तेमाल किया गया। मैदा को गर्म करके ग्लूटिन हटाने के बाद उसका लेप पेपर पर लगाया गया है। बताया कि हर पेपर को अलग-अलग संरक्षित किया गया है। इसमें वुडन का भी प्रयोग किया गया है। बताया कि अब इस पंचांग की उम्र करीब 50 साल और बढ़ गई है।
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अमर उजाला का जताया आभार
सहायक निदेशक वीएन सिंह और इतिहासकार गोपाल भारद्वाज ने अमर उजाला का आभार जताया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला में खबर छपने के बाद संस्कृति विभाग ने पंचांग के संरक्षण के तत्काल पहल की। अब पंचांग के सदियों तक सुरक्षित रहने की उम्मीद है। गोपाल भारद्वाज ने संस्कृति विभाग के महानिदेशक आनंद स्वरूप का भी आभार व्यक्त किया।