फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   काल के थपेड़े खाकर सदियों से सुरक्षित हैं पांडुलिपियां : ममगाईं

काल के थपेड़े खाकर सदियों से सुरक्षित हैं पांडुलिपियां : ममगाईं

Sun, 19 May 2019 01:55 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sun, 19 May 2019 01:55 AM IST
विज्ञापन
काल के थपेड़े खाकर सदियों से सुरक्षित हैं पांडुलिपियां : ममगाईं
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विज्ञापन

चारधाम यात्रा विषयक पांडुलिपि राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन शनिवार को हो गया। इस मौके पर चारधाम कमेटी के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहा कि जगह जगह बिखरी पांडुलिपियां हमारी धरोहर हैं। यह समय की चोट और काल के थपेड़े खाकर भी सदियों से सुरक्षित हैं। इस धरोहर को सहेजना हमारी जिम्मेदारी है।
दून के क्रैब्रिज हॉल स्कूल आयोजित संगोष्ठी में कई प्रकार की जानकारियां साझा की गई। इनमें चारधाम विषयक, कैलाश मानसरोवर, जागेश्वर धाम, गंगा, यमुना, लोक साहित्य, लोक मान्यताओं, लोक परंपराओं, लोक विश्वासों, लोक कवियों, स्तुतियों, पूजा पद्धतियों, देव स्थलों, पूजा अर्चना के तौर तरीकों, उत्तराखंड की पांडुलिपि परंपरा, विभिन्न यात्रा पथों, बही खातों, तीर्थ यात्रियों, नंदा देवी राजजात, नरसिंह देवता, कर्मकांड, धार्मिक पौराणिक अनुष्ठानों, संगीत, मुल्तान जोत महोत्सव, धर्मशालाओं, तंत्र मंत्र, मंदिरों, धार्मिक यात्राओं आदि की जानकारी शामिल है। इस संगोष्ठी में 150 से 900 साल पुरानी पांडुलिपियां दिखाई गईं, जिन्हें पुराना दरबार संस्था ने सहेज रखी हैं।
विज्ञापन

इस दौरान हिमवंत कवि चंद्र कुंवर बर्तवाल, राहुल सांकृत्यायन, कुमाऊं की जसुली सौक्याणी, गंगा से गंगा सागर तक टिहरी राजवंश के योगदान के बारे में देशभर से आए विद्वानों ने अनुभव साझा किए। संगोष्ठी में पांडुलिपि शब्द के उद्भव, पांडुलिपि और लिपियों के विकास के इतिहास, श्रुति परंपरा, पांडुलिपियों के कागज और संरक्षण विधा की जानकारी दी गई। समापन सत्र में असीम शुक्ल, प्रो. उमा मैठानी, डॉ. मुनीराम सकलानी, प्रो. सुधा रानी पांडेय, प्रो. राम विनय सिंह, डा.ॅ संजय लाल शाह, डॉ. कमला पंत, डॉ. सुदेश व्याला, डॉ. योगंबर बर्तवाल, कुसुम रावत, डॉ. प्रभाकर जोशी, डॉ. यशवंत कटौच, डॉ. लालता प्रसाद सहित विद्वानों ने अपने शोध साझा किए।
विज्ञापन
विज्ञापन

900 साल पुरानी दुर्गा सप्तशती
संगोष्ठी एक ऐतिहासिक पल की गवाह भी बनी। यहां बद्रीनाथ धाम की स्तुति पवन मंद सुगंध शीतल की 150 साल पुरानी पांडुलिपि को उनके संरक्षक ठाकुर धन सिंह बर्तवाल के पौत्र महेंद्र सिंह बर्तवाल ने दिखाया। इसके लिए परिवार को सम्मानित किया गया। साथ ही श्रीनगर में प्रो. उमा मैठानी के पास 900 साल पुरानी दुर्गा सप्तशती सहित कई ऐतिहासिक पांडुलिपियां हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed