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आयुष्मान योजना के अंतर्गत क्रियाकलापों पर नजर रखें सीएमओ
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। स्वास्थ्य महानिदेशालय में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के क्रियान्वयन पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने हाल ही में पकड़ी गई गड़बड़ियों पर चिंता जताई। कहा कि यह योजना सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है ऐसे में इसका निर्बाध संचालन बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय में बुधवार को हुई बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ रविंद्र थपलियाल ने कहा कि आयुष्मान योजना को निजी अस्पतालों में कड़ाई से लागू कराया जाए। साथ ही इस पर सख्त निगरानी रखी जाए। सीएमओ भी अपने स्तर से निगरानी रखें। डॉ थपलियाल ने कहा कि क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू कराने के हाईकोर्ट के आदेश हैं। लिहाजा, इन आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जो अस्पताल इस एक्ट के तहत नियमों का उल्लंघन करता पाए जाए उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस समय एनएचएम के तहत कई भर्तियां रुकी हुई हैं। ये भर्तियां क्यों और किस स्तर पर रुकी हुई हैं इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर इन्हें चालू कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
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देहरादून। स्वास्थ्य महानिदेशालय में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों की बैठक में स्वास्थ्य महानिदेशक ने अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के क्रियान्वयन पर सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने हाल ही में पकड़ी गई गड़बड़ियों पर चिंता जताई। कहा कि यह योजना सभी वर्गों के लिए महत्वपूर्ण है ऐसे में इसका निर्बाध संचालन बेहद जरूरी है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय में बुधवार को हुई बैठक में प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ रविंद्र थपलियाल ने कहा कि आयुष्मान योजना को निजी अस्पतालों में कड़ाई से लागू कराया जाए। साथ ही इस पर सख्त निगरानी रखी जाए। सीएमओ भी अपने स्तर से निगरानी रखें। डॉ थपलियाल ने कहा कि क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट को लागू कराने के हाईकोर्ट के आदेश हैं। लिहाजा, इन आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही जो अस्पताल इस एक्ट के तहत नियमों का उल्लंघन करता पाए जाए उसका लाइसेंस रद्द किया जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इस समय एनएचएम के तहत कई भर्तियां रुकी हुई हैं। ये भर्तियां क्यों और किस स्तर पर रुकी हुई हैं इसकी विस्तृत रिपोर्ट बनाकर इन्हें चालू कराने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
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