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देवक्यारा बुग्याल को चुना गया 2019 का ट्रैक ऑफ द ईयर
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उत्तरकाशी (पुरोला)। जिले के सीमांत मोरी ब्लॉक में स्थित देवक्यारा बुग्याल को वर्ष 2019 का ट्रेक ऑफ द ईयर घोषित किया गया है। जिला पर्यटन विभाग को शासन द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार आगामी अप्रैल में आधिकारिक रूप से ट्रेक ऑफ द ईयर से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएगी।
साहसिक पर्यटन व दूरस्थ गांवों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ट्रेक ऑफ द ईयर योजना शुरू की गई है, जिसके तहत बीते कुछ सालों में चाईंशील बुग्याल, हरकीदून व दयारा बुग्याल को ट्रेक ऑफ द ईयर बनाया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2019 के लिए देवक्यारा बुग्याल को चुना गया है। जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री ने बताया कि शासन ने देवक्यारा बुग्याल को ट्रेक ऑफ द ईयर चुनने के साथ ही अप्रैल से विधिवत ट्रेकिंग कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जिसे देखते हुए विभाग ने जखोल व धारा गांवों के करीब 40 से 50 परिवारों को होम स्टे योजना से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही विद्युत, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के लिए संबंधित विभागों से भी पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रेक ऑफ द ईयर के तहत देवक्यारा बुग्याल का प्रचार प्रसार किया जाएगा। साथ ही उस ट्रेक में पड़ने वाले गांवों में भी मूलभूत सुविधाएं तैयार की जाएगी।
प्राकृतिक व धार्मिक महत्व का खजाना है देवक्यारा
देवक्यारा के ट्रेक ऑफ द ईयर चुने जाने पर हर्ष जताते हुए ग्रामीण किशन रावत ने बताया कि रूपीन-सुपीन घाटी में समुद्र तल से 3745 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवक्यारा बुग्याल करीब चार किमी की परिधि में फैला है। बुग्याल तक पहुंचने के लिए जखोल गांव से दो अलग ट्रेक हैं। पहले ट्रेक में करीब 40 किमी की दूरी तय कर पर्यटक होम फातरा, चरोटा, ढोखरी व रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंच सकते हैं। 30 किमी लंबा ट्रेक ओबरा, देवाका, रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंचता है। हालांकि ग्रामीण प्रत्येक 10 साल में होने वाली सोमेश्वर महादेव यात्रा के दौरान 40 किमी लंबे ट्रेक का प्रयोग करते हैं। देवक्यारा बुग्याल में एक प्राचीन गुफा है, जिसके बाहर सोमेश्वर देवता की मूर्ति बनाने वाले हरकनाथ बाबा की समाधि है। गिप्सन पास से हरकीदून व यमुनोत्री व महिंदा पास से किनौर जा सकते हैं।
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साहसिक पर्यटन व दूरस्थ गांवों को विकसित करने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा ट्रेक ऑफ द ईयर योजना शुरू की गई है, जिसके तहत बीते कुछ सालों में चाईंशील बुग्याल, हरकीदून व दयारा बुग्याल को ट्रेक ऑफ द ईयर बनाया जा चुका है। इसी क्रम में वर्ष 2019 के लिए देवक्यारा बुग्याल को चुना गया है। जिला पर्यटन अधिकारी प्रकाश खत्री ने बताया कि शासन ने देवक्यारा बुग्याल को ट्रेक ऑफ द ईयर चुनने के साथ ही अप्रैल से विधिवत ट्रेकिंग कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। जिसे देखते हुए विभाग ने जखोल व धारा गांवों के करीब 40 से 50 परिवारों को होम स्टे योजना से जोड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही विद्युत, पेयजल आदि मूलभूत सुविधाओं को विकसित करने के लिए संबंधित विभागों से भी पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रेक ऑफ द ईयर के तहत देवक्यारा बुग्याल का प्रचार प्रसार किया जाएगा। साथ ही उस ट्रेक में पड़ने वाले गांवों में भी मूलभूत सुविधाएं तैयार की जाएगी।
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प्राकृतिक व धार्मिक महत्व का खजाना है देवक्यारा
देवक्यारा के ट्रेक ऑफ द ईयर चुने जाने पर हर्ष जताते हुए ग्रामीण किशन रावत ने बताया कि रूपीन-सुपीन घाटी में समुद्र तल से 3745 मीटर की ऊंचाई पर स्थित देवक्यारा बुग्याल करीब चार किमी की परिधि में फैला है। बुग्याल तक पहुंचने के लिए जखोल गांव से दो अलग ट्रेक हैं। पहले ट्रेक में करीब 40 किमी की दूरी तय कर पर्यटक होम फातरा, चरोटा, ढोखरी व रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंच सकते हैं। 30 किमी लंबा ट्रेक ओबरा, देवाका, रौकाई ताल होते हुए देवक्यारा पहुंचता है। हालांकि ग्रामीण प्रत्येक 10 साल में होने वाली सोमेश्वर महादेव यात्रा के दौरान 40 किमी लंबे ट्रेक का प्रयोग करते हैं। देवक्यारा बुग्याल में एक प्राचीन गुफा है, जिसके बाहर सोमेश्वर देवता की मूर्ति बनाने वाले हरकनाथ बाबा की समाधि है। गिप्सन पास से हरकीदून व यमुनोत्री व महिंदा पास से किनौर जा सकते हैं।
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