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एनजीटी ने सचिव पर्यावरण से तलब की रिपोर्ट
Updated Sun, 14 Oct 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सचिव पर्यावरण से 12 नवंबर तक राज्य के तमाम जिलों में संचालित होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब की है। एनजीटी के इस आदेश से शासन के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने सर्वे के बाबत करीब एक करोड़ रुपए की जरूरत बताई है।
एनजीटी के आदेश के क्रम में सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों व जिला पर्यटन अधिकारियों से पंजीकृत होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं का ब्योरा मांगा गया है। हालांकि अफसर इतनी कम अवधि में सूची तैयार करने को आसान नहीं है। इस बाबत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बीते दिनों एनजीटी में हुई सुनवाई के दौरान सूची के लिए समय देने की गुजारिश की थी, लेकिन एनजीटी ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया था।
दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे के लिए निजी कंपनी की मदद लेनी चाही तो कंपनी ने सर्वे के लिए एक करोड़ रुपये की मांग की है। इससे मुसीबत बढ़ गई है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिसके जरिए वे खुद पूरे राज्य में होटलों, आश्रमाें व धर्मशालाओं का सर्वे कर सकें।
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एनजीटी ने 12 नवंबर तक सभी होटलों, आश्रमों व धर्र्मशालाओं की सूची मांगी है। सभी जिलाधिकारियों, जिला पर्यटन अधिकारियों से उनके जिलों में संचालित होटलों का ब्योरा मांगा गया है। इसके अलावा निजी कंपनी से भी सर्वे करानेे की योजना बनायी जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
-एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने सचिव पर्यावरण से 12 नवंबर तक राज्य के तमाम जिलों में संचालित होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं की सूची तलब की है। एनजीटी के इस आदेश से शासन के साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की मुसीबत बढ़ गई है। वहीं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने सर्वे के बाबत करीब एक करोड़ रुपए की जरूरत बताई है।
एनजीटी के आदेश के क्रम में सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों व जिला पर्यटन अधिकारियों से पंजीकृत होटलों, आश्रमों व धर्मशालाओं का ब्योरा मांगा गया है। हालांकि अफसर इतनी कम अवधि में सूची तैयार करने को आसान नहीं है। इस बाबत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने बीते दिनों एनजीटी में हुई सुनवाई के दौरान सूची के लिए समय देने की गुजारिश की थी, लेकिन एनजीटी ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया था।
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दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सर्वे के लिए निजी कंपनी की मदद लेनी चाही तो कंपनी ने सर्वे के लिए एक करोड़ रुपये की मांग की है। इससे मुसीबत बढ़ गई है। बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास ऐसी कोई तकनीक नहीं है जिसके जरिए वे खुद पूरे राज्य में होटलों, आश्रमाें व धर्मशालाओं का सर्वे कर सकें।
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एनजीटी ने 12 नवंबर तक सभी होटलों, आश्रमों व धर्र्मशालाओं की सूची मांगी है। सभी जिलाधिकारियों, जिला पर्यटन अधिकारियों से उनके जिलों में संचालित होटलों का ब्योरा मांगा गया है। इसके अलावा निजी कंपनी से भी सर्वे करानेे की योजना बनायी जा रही है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है।
-एसपी सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड