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मनमाने दाखिलों पर जाएगी मान्यता, लगेगा दस लाख रुपये जुर्माना
Updated Tue, 13 Mar 2018 01:32 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
प्रदेश के निजी कॉलेज अब अपनी मर्जी से न तो सरकारी या प्रबंधन कोटे की सीटों पर दाखिले कर सकेंगे और न ही निर्धारित से ज्यादा शुल्क वसूल सकेंगे। सरकार ने प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की शक्तियां बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही इस समिति के अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि भी दो से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। यह समिति किसी भी कॉलेज में किसी भी समय जाकर छापा मार सकेगी। समिति जो शुल्क तय करेगी, आगामी तीन वर्षों तक वही शुल्क लागू होगा।
प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के संशोधन के तहत धारा 7 में स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी सरकारी या निजी कॉलेज में अलग-अलग दाखिले नहीं होंगे। एक जैसे कोर्स के लिए एक ही कॉमन प्रवेश परीक्षा और काउंसिलिंग होगी। अगर कोई संस्थान इस नियम का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर राज्य कोटे की सीटें रिक्त रह जाएंगी तो समिति की ओर से किए गए प्रावधानों के तहत सीटें भरी जाएंगी। खास बात यह है कि सरकारी कोटा और प्रबंधन कोटा की सीटों के लिए कॉमन प्रवेश परीक्षा होगी लेकिन काउंसिलिंग अलग-अलग होगी। पहली बार प्रदेश में एआईसीटीई की तर्ज पर शुल्क नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान किया गया है। प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को पावर दी गई है कि वह ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करे। इसके तहत प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण अधिनियम 2006 में करीब 15 संशोधन किए गए हैं। प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को किसी भी समय निजी संस्थानों की दाखिला प्रक्रिया जांचने का अधिकार रहेगा। एक बार निर्धारित किया हुआ शुल्क तीन वर्ष तक लागू रहेगा। तीन वर्ष के बाद संस्थानों को अपना प्रस्ताव समिति के पास भेजना होगा। इसके बाद ही शुल्क में बदलाव किया जा सकेगा। खास बात यह भी है कि अगर किसी निजी संस्थान में समिति की ओर से शुल्क निर्धारित नहीं किया जाता है तो वहां उस वर्ष उस कोर्स में दाखिले नहीं कर पाएंगे।
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समिति इनकी भी करेगी जांच
- कैपिटेशन फीस वसूली
- निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क वसूलने
- लाभ कमाने
- अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने
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इस आधार पर होगा शुल्क का निर्धारण
निजी संस्थान की स्थिति, व्यवसायिक कोर्स की प्रकृति एवं आवश्यकताएं, भूमि और भवन की लागत, उपलब्ध आधारभूत ढांचा, प्रशासन एवं अनुरक्षण का खर्च या कोई अन्य जरूरी कारण।
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समिति की सुनवाई प्राधिकरण में होगी
समिति के फैसलों के खिलाफ सुनवाई के लिए अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज को दी जाएगी। इसमें राज्य सरकार द्वारा नामित मुख्यसचिव स्तर का सेवानिवृत्त अधिकारी, राज्यपाल द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद् सदस्य होगा।
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उल्लंघन करने पर यह होगी कार्रवाई
- संस्थान जहां से मान्यता या संबद्धता प्राप्त होगा, उसे खत्म करने का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
- विवि की ओर से संबंधित कॉलेज के गलत दाखिला वाले छात्रों के प्रवेश और पंजीकरण निरस्त कर दिए जाएंगे।
- अधिनियम का अनुपालन न कर जिन छात्रों को गलत रूप से वंचित रखा जाएगा, उन्हें दाखिले के निर्देश दिए जा सकेंगे।
- अधिनियम के प्रत्येक उल्लंघन पर दस लाख रुपये या इससे अधिक का जुर्माना लगाया जाएगा।
- ज्यादा फीस लेने पर जो भी शुल्क लिया जाएगा उसका पांच से दस गुना जुर्माना संबंधित कॉलेज पर लगेगा।
- संबंधित संस्थान को अधिक वसूल किया गया पैसा छात्र को लौटाना होगा। यदि नहीं लौटाया तो 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा।
- एक निश्चित अवधि के लिए कॉलेज में दाखिलों पर रोक लग जाएगी।
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पैरामेडिकल की कॉमन प्रवेश परीक्षा
कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के सभी पैरामेडिकल संस्थानों में दाखिले की कॉमन प्रवेश परीक्षा का फैसला लिया गया है। अब कॉलेज अपने स्तर पर पैरामेडिकल के दाखिले नहीं कर पाएंगे। प्रवेश परीक्षा पास करने वाले युवाओं को काउंसिलिंग के माध्यम से सीट आवंटन होगा।
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प्रदेश के निजी कॉलेज अब अपनी मर्जी से न तो सरकारी या प्रबंधन कोटे की सीटों पर दाखिले कर सकेंगे और न ही निर्धारित से ज्यादा शुल्क वसूल सकेंगे। सरकार ने प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति की शक्तियां बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही इस समिति के अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि भी दो से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी है। यह समिति किसी भी कॉलेज में किसी भी समय जाकर छापा मार सकेगी। समिति जो शुल्क तय करेगी, आगामी तीन वर्षों तक वही शुल्क लागू होगा।
प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के संशोधन के तहत धारा 7 में स्पष्ट कर दिया गया है कि किसी भी सरकारी या निजी कॉलेज में अलग-अलग दाखिले नहीं होंगे। एक जैसे कोर्स के लिए एक ही कॉमन प्रवेश परीक्षा और काउंसिलिंग होगी। अगर कोई संस्थान इस नियम का उल्लंघन करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर राज्य कोटे की सीटें रिक्त रह जाएंगी तो समिति की ओर से किए गए प्रावधानों के तहत सीटें भरी जाएंगी। खास बात यह है कि सरकारी कोटा और प्रबंधन कोटा की सीटों के लिए कॉमन प्रवेश परीक्षा होगी लेकिन काउंसिलिंग अलग-अलग होगी। पहली बार प्रदेश में एआईसीटीई की तर्ज पर शुल्क नियमों का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान किया गया है। प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को पावर दी गई है कि वह ऐसे संस्थानों पर कार्रवाई करे। इसके तहत प्रवेश एवं शुल्क निर्धारण अधिनियम 2006 में करीब 15 संशोधन किए गए हैं। प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति को किसी भी समय निजी संस्थानों की दाखिला प्रक्रिया जांचने का अधिकार रहेगा। एक बार निर्धारित किया हुआ शुल्क तीन वर्ष तक लागू रहेगा। तीन वर्ष के बाद संस्थानों को अपना प्रस्ताव समिति के पास भेजना होगा। इसके बाद ही शुल्क में बदलाव किया जा सकेगा। खास बात यह भी है कि अगर किसी निजी संस्थान में समिति की ओर से शुल्क निर्धारित नहीं किया जाता है तो वहां उस वर्ष उस कोर्स में दाखिले नहीं कर पाएंगे।
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समिति इनकी भी करेगी जांच
- कैपिटेशन फीस वसूली
- निर्धारित शुल्क से अधिक शुल्क वसूलने
- लाभ कमाने
- अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने
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इस आधार पर होगा शुल्क का निर्धारण
निजी संस्थान की स्थिति, व्यवसायिक कोर्स की प्रकृति एवं आवश्यकताएं, भूमि और भवन की लागत, उपलब्ध आधारभूत ढांचा, प्रशासन एवं अनुरक्षण का खर्च या कोई अन्य जरूरी कारण।
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समिति की सुनवाई प्राधिकरण में होगी
समिति के फैसलों के खिलाफ सुनवाई के लिए अपीलीय प्राधिकरण का गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी हाईकोर्ट से रिटायर्ड जज को दी जाएगी। इसमें राज्य सरकार द्वारा नामित मुख्यसचिव स्तर का सेवानिवृत्त अधिकारी, राज्यपाल द्वारा नामित प्रतिष्ठित शिक्षाविद् सदस्य होगा।
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उल्लंघन करने पर यह होगी कार्रवाई
- संस्थान जहां से मान्यता या संबद्धता प्राप्त होगा, उसे खत्म करने का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
- विवि की ओर से संबंधित कॉलेज के गलत दाखिला वाले छात्रों के प्रवेश और पंजीकरण निरस्त कर दिए जाएंगे।
- अधिनियम का अनुपालन न कर जिन छात्रों को गलत रूप से वंचित रखा जाएगा, उन्हें दाखिले के निर्देश दिए जा सकेंगे।
- अधिनियम के प्रत्येक उल्लंघन पर दस लाख रुपये या इससे अधिक का जुर्माना लगाया जाएगा।
- ज्यादा फीस लेने पर जो भी शुल्क लिया जाएगा उसका पांच से दस गुना जुर्माना संबंधित कॉलेज पर लगेगा।
- संबंधित संस्थान को अधिक वसूल किया गया पैसा छात्र को लौटाना होगा। यदि नहीं लौटाया तो 12 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज लगेगा।
- एक निश्चित अवधि के लिए कॉलेज में दाखिलों पर रोक लग जाएगी।
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पैरामेडिकल की कॉमन प्रवेश परीक्षा
कैबिनेट की बैठक में प्रदेश के सभी पैरामेडिकल संस्थानों में दाखिले की कॉमन प्रवेश परीक्षा का फैसला लिया गया है। अब कॉलेज अपने स्तर पर पैरामेडिकल के दाखिले नहीं कर पाएंगे। प्रवेश परीक्षा पास करने वाले युवाओं को काउंसिलिंग के माध्यम से सीट आवंटन होगा।