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कुंडों के पुर्नउद्धारकी कवायद
Updated Thu, 29 Jun 2017 10:31 PM IST
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रुद्रप्रयाग। केदारनाथ आपदा में ध्वस्त हुए प्राचीन कुंडों के पुनरुद्धार को लेकर शासन स्तर पर कवायद शुरू हो गई है। नमामि गंगे परियोजना के दो सदस्यीय इंजीनियरिंग दल ने धाम पहुंचकर स्थलीय जायजा लिया है। उम्मीद है कि अगले एक माह में निर्माण कार्य शुरू हो जाएंगे।
16/17 जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में रेतस, हंस, उदक, अमृत और हवन कुंड तबाह हो गए थे। पुनर्निर्माण के तहत बीकेटीसी और निम ने अमृत और उदक कुंड को खोजा था, जबकि अन्य तीन कुंडों का कोई पता नहीं लग पाया। मंदिर समिति ने वाडिया संस्थान और शासन से कुंडों के पुनरुद्धार की कई बार मांग की। बीते वर्ष केदारनाथ के कपाट बंद होने पर धाम पहुंची केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ध्वस्त कुंडों का नमामि गंगे के तहत पुनरुद्धार की बात कही थी। अब, इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो गई है। तीन दिन पूर्व परियोजना के दो इंजीनियरों ने धाम पहुंचकर वहां की स्थितियों और मलबे में दबे कुंडों के मूल स्थान का जायजा लिया।
बीकेटीसी पदाधिकारियों के अनुसार आपदा के बाद से मलबे में दबे हवन, हंस और रेतस कुंड को अत्याधुनिक तकनीक से खोजा जाएगा। साथ ही उदक और अमृत कुंड को और अधिक सुरक्षित और सुंदर बनाया जाएगा। इसके अलावा, आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का भी पुनरुद्धार किया जाएगा।
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कोट
नमामि गंगे के तहत केदारनाथ में मलबे में दबे प्राचीन तीन कुंडों का पुनरुद्धार होना है। परियोजना के दो इंजीनियरों ने धाम में पूरे क्षेत्र का अवलोकन कर अगले एक माह में कार्य शुरू करने की बात कही है। अनिल शर्मा, कार्यधिकारी श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति
16/17 जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में रेतस, हंस, उदक, अमृत और हवन कुंड तबाह हो गए थे। पुनर्निर्माण के तहत बीकेटीसी और निम ने अमृत और उदक कुंड को खोजा था, जबकि अन्य तीन कुंडों का कोई पता नहीं लग पाया। मंदिर समिति ने वाडिया संस्थान और शासन से कुंडों के पुनरुद्धार की कई बार मांग की। बीते वर्ष केदारनाथ के कपाट बंद होने पर धाम पहुंची केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने ध्वस्त कुंडों का नमामि गंगे के तहत पुनरुद्धार की बात कही थी। अब, इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो गई है। तीन दिन पूर्व परियोजना के दो इंजीनियरों ने धाम पहुंचकर वहां की स्थितियों और मलबे में दबे कुंडों के मूल स्थान का जायजा लिया।
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बीकेटीसी पदाधिकारियों के अनुसार आपदा के बाद से मलबे में दबे हवन, हंस और रेतस कुंड को अत्याधुनिक तकनीक से खोजा जाएगा। साथ ही उदक और अमृत कुंड को और अधिक सुरक्षित और सुंदर बनाया जाएगा। इसके अलावा, आदिगुरु शंकराचार्य के समाधि स्थल का भी पुनरुद्धार किया जाएगा।
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नमामि गंगे के तहत केदारनाथ में मलबे में दबे प्राचीन तीन कुंडों का पुनरुद्धार होना है। परियोजना के दो इंजीनियरों ने धाम में पूरे क्षेत्र का अवलोकन कर अगले एक माह में कार्य शुरू करने की बात कही है। अनिल शर्मा, कार्यधिकारी श्रीबदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति