{"_id":"594413a34f1c1b4f568b4578","slug":"41497633699-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम को देख भागे स्टांप वेंडर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम को देख भागे स्टांप वेंडर
Updated Fri, 16 Jun 2017 10:59 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत अचानक तहसील पहुंचे तो स्टांप वेंडरों में भगदड़ मच गई। अधिकांश वेंडर अपने बस्ते छोड़कर भाग खड़े हुए। वहीं प्रमाणपत्र के आवेदन फार्म के लिए भी तहसील परिसर में लोग भटकते मिले। डीएम के मांगने पर खुद तहसीलदार भी तत्काल फार्म उपलब्ध नहीं करा सकीं। डीएम ने तहसीलदार को अव्यवस्थाओं पर फटकार लगाते हुए गैर हाजिर स्टांप वेंडरों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही जाति, मूल निवास और आय प्रमाण पत्रों के फार्म जनाधार केन्द्रों पर निशुल्क देने के निर्देश दिए हैं।
डीएम दीपक रावत जैसे ही तहसील में दाखिल हुए स्टांप वेंडर अपने अपने बस्ते छोड़कर भागने लगे। यह नजारा देखकर डीएम ही नहीं तहसील पहुंचे फरियादी भी हैरत में पड़ गए। पूरी तहसील में करीब 22 स्टांप वेंडर बताए जाते हैं, इनमें केवल दो स्टांप वेंडर ही अपने बस्तों पर बैठे पाए गए। इसके बाद डीएम प्रमाण पत्र बनाने वाले जनाधार केंद्रों पर पहुंचे। यहां ऐसा कहीं नहीं लिखा गया था कि प्रमाण पत्र बनवाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाए। डीएम ने एक युवती को बुलाकर पूछा तो उसने बताया कि जाति प्रमाण बनवाना है, लेकिन फार्म नहीं मिल रहे हैं। डीएम ने नाराजगी जताते हुए तहसीलदार सुनैना राणा को बुलाया और फार्म की बाबत पूछा। डीएम के फार्म मांगने पर तहसीलदार करीब 20 मिनट तक फार्म ही ढूंढती रही। स्टांप वेंडरों और फोटो स्टेट की दुकानों पर फार्म बिकने की बात भी सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रमाण पत्रों के आवेदन फार्म जनाधार केंद्रों पर मुफ्त मिलने चाहिए। डीएम ने गैरहाजिर स्टांप वेंडरों को नोटिस जारी कर पूछा कि वे अपने बस्तों पर क्यों नहीं मिले हैं।
आखिर बस्ता छोड़कर क्यों भागे वेंडर
डीएम के तहसील पहुंचते ही स्टांप वेंडर अपने बस्ते छोड़कर क्यों भाग निकले। इसकी बारीकी से पड़ताल करने पर पता चलता है कि वेंडर निर्धारित कीमतों से ज्यादा रेट पर स्टांप बेचते हैं। फार्म की बिक्री के नाम पर भी फरियादियों से मनमानी कीमत वसूली जाती है। ऐसे में शुक्रवार को डीएम के तहसील पहुंचने पर वेंडरों को लगा कि डीएम स्पेशल उन्हीं की धरपकड़ करने तहसील आए हैं। उन्होंने आव देखा न ताव, डीएम की गाड़ी देखकर बस्ता छोड़ भाग निकले।
विज्ञापन
विज्ञापन
हरिद्वार।
जिलाधिकारी दीपक रावत अचानक तहसील पहुंचे तो स्टांप वेंडरों में भगदड़ मच गई। अधिकांश वेंडर अपने बस्ते छोड़कर भाग खड़े हुए। वहीं प्रमाणपत्र के आवेदन फार्म के लिए भी तहसील परिसर में लोग भटकते मिले। डीएम के मांगने पर खुद तहसीलदार भी तत्काल फार्म उपलब्ध नहीं करा सकीं। डीएम ने तहसीलदार को अव्यवस्थाओं पर फटकार लगाते हुए गैर हाजिर स्टांप वेंडरों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही जाति, मूल निवास और आय प्रमाण पत्रों के फार्म जनाधार केन्द्रों पर निशुल्क देने के निर्देश दिए हैं।
डीएम दीपक रावत जैसे ही तहसील में दाखिल हुए स्टांप वेंडर अपने अपने बस्ते छोड़कर भागने लगे। यह नजारा देखकर डीएम ही नहीं तहसील पहुंचे फरियादी भी हैरत में पड़ गए। पूरी तहसील में करीब 22 स्टांप वेंडर बताए जाते हैं, इनमें केवल दो स्टांप वेंडर ही अपने बस्तों पर बैठे पाए गए। इसके बाद डीएम प्रमाण पत्र बनाने वाले जनाधार केंद्रों पर पहुंचे। यहां ऐसा कहीं नहीं लिखा गया था कि प्रमाण पत्र बनवाने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाए। डीएम ने एक युवती को बुलाकर पूछा तो उसने बताया कि जाति प्रमाण बनवाना है, लेकिन फार्म नहीं मिल रहे हैं। डीएम ने नाराजगी जताते हुए तहसीलदार सुनैना राणा को बुलाया और फार्म की बाबत पूछा। डीएम के फार्म मांगने पर तहसीलदार करीब 20 मिनट तक फार्म ही ढूंढती रही। स्टांप वेंडरों और फोटो स्टेट की दुकानों पर फार्म बिकने की बात भी सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि प्रमाण पत्रों के आवेदन फार्म जनाधार केंद्रों पर मुफ्त मिलने चाहिए। डीएम ने गैरहाजिर स्टांप वेंडरों को नोटिस जारी कर पूछा कि वे अपने बस्तों पर क्यों नहीं मिले हैं।
विज्ञापन
आखिर बस्ता छोड़कर क्यों भागे वेंडर
डीएम के तहसील पहुंचते ही स्टांप वेंडर अपने बस्ते छोड़कर क्यों भाग निकले। इसकी बारीकी से पड़ताल करने पर पता चलता है कि वेंडर निर्धारित कीमतों से ज्यादा रेट पर स्टांप बेचते हैं। फार्म की बिक्री के नाम पर भी फरियादियों से मनमानी कीमत वसूली जाती है। ऐसे में शुक्रवार को डीएम के तहसील पहुंचने पर वेंडरों को लगा कि डीएम स्पेशल उन्हीं की धरपकड़ करने तहसील आए हैं। उन्होंने आव देखा न ताव, डीएम की गाड़ी देखकर बस्ता छोड़ भाग निकले।
विज्ञापन