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आंखों की रोशन छीन लेता है ग्लूकोमा : डॉ. ओझा
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
आंखों की नियमित जांच कराने पर ही ग्लूकोमा (काला मोतिया) से बचा जा सकता है। समय पर इसका इलाज न कराने पर ग्लूकोमा आंखों की रोशनी छीन लेता है। यह बात दून अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील ओझा ने कही।
डॉ. ओझा ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह के अंतिम दिन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा में आंख के परदे की नस सूख जाती है। इससे पीड़ित की स्थाई तौर पर रोशनी चली जाती है। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि दून मेडिकल कॉलेज आंखों की जांच से संबंधित सारी मशीनें उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद उच्चतम तकनीक की जांच व ऑपरेशन व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. केके टम्टा ने कहा कि चिकित्सालय पहाड़ के मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। कार्यक्रम में डॉ. एमएस पंत, डॉ. अंनत सिंहा, डॉ. हरिशंकर पांडे समेत बड़ी संख्या में एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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आंखों की नियमित जांच कराने पर ही ग्लूकोमा (काला मोतिया) से बचा जा सकता है। समय पर इसका इलाज न कराने पर ग्लूकोमा आंखों की रोशनी छीन लेता है। यह बात दून अस्पताल के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुशील ओझा ने कही।
डॉ. ओझा ग्लूकोमा जागरूकता सप्ताह के अंतिम दिन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ग्लूकोमा में आंख के परदे की नस सूख जाती है। इससे पीड़ित की स्थाई तौर पर रोशनी चली जाती है। दून मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने बताया कि दून मेडिकल कॉलेज आंखों की जांच से संबंधित सारी मशीनें उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद उच्चतम तकनीक की जांच व ऑपरेशन व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के एमएस डॉ. केके टम्टा ने कहा कि चिकित्सालय पहाड़ के मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। कार्यक्रम में डॉ. एमएस पंत, डॉ. अंनत सिंहा, डॉ. हरिशंकर पांडे समेत बड़ी संख्या में एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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