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पिटकुल प्रदेश में बनाएगा छह नए पावर स्टेशन
Updated Tue, 22 May 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
राज्य में बिजली आपूर्ति को और दुरुस्त करने के लिए पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) छह नए पावर स्टेशन बनाएगा। इसके अलावा पिटकुल पूरे राज्य में वित्तीय वर्ष 2018- 19 में 404 किलो मीटर सर्किट लाइन बिछाएगा। इन परियोजनाओं पर 510.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह निर्णय पिटकुल बोर्ड की बैठक में लिया गया।
सोमवार को पिटकुल मुख्यालय में ऊर्जा सचिव राधिका झा की मौजूदगी में पिटकुल की बोर्ड बैठक हुई। बैठक में देहरादून के हर्रावाला, हरिद्वार के पिरान कलियर और पदार्था, बागेश्वर, हल्द्वानी के जफरपुर और पिथौरागढ़ के बरम में छह नए पावर स्टेशन बनाए जाने, ब्यासी-देहरादून पावर ग्रिड लाइन और ब्रह्मवारी- श्रीनगर पावर ग्रिड लाइन को जोड़ने, पूरे राज्य में 404 किलोमीटर की सर्किट लाइन बिछाए जाने का प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इन सभी परियोजनाओं पर 510.85 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जिसमें से 30 फीसदी धनराशि राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी धनराशि पिटकुल अपने स्तर से निवेश कराएगा।
ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कहा कि परियोजनाओं को बनाने में राज्य सरकार से अर्थ पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन कई बार बजट के अभाव में परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। ऐसे में परियोजनाएं प्रभावित न हो इसके लिए पिटकुल पूंजी निवेश के नए स्त्रोत तलाशें। कहा कि योजनाओं की मॉनीटरिंग में यदि किसी स्तर पर लापरवाही बरती जाए तो संबंधित अफसरों की चरित्र पंजिका में इसकी प्रविष्टि की जाएं। बोर्ड बैठक के दौरान सचिव राधिका झा ने पिटकुल की ओर से संचालित तमाम परियोजनाओं की समीक्षा की उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2018 -19 में पूरा किया जाना है उन्हें जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएं।
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निदेशकों के कार्यालयों में लगाए जाएंगे डैशबोर्ड
पिटकुल बोर्ड बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि सभी निदेशकों के कार्यालयों में अत्याधुनिक डैशबोर्ड लगाए जाएंगे। जिसके जरिए राज्य में संचालित तमाम परियोजनाओं की मॉनीटरिंग की जा सके। वर्तमान समय में आला अफसरों द्वारा मॉनीटरिंग न किए जाने से तमाम परियोजनाएं देरी से संचालित की जा रही हैं, जिसका असर विद्युत आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा के अलावा प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, अपर सचिव वित्त एलएन पंत, स्वतंत्र निदेशक मंडल में शामिल जेएल बजाज, बीपी पांडे और एसएस गुप्ता, यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा, पिटकुल के परियोजना एवं परिचालन निदेशक संजय मित्तल, निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक मानव संसाधन आशीष कुमार, महाप्रबंधक विधि एवं कंपनी सचिव प्रवीण टंडन समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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उपलब्धियों के आइने में पिटकुल
-साल 2004 से लेकर 2018 के बीच सब स्टेशनों की संख्या 17 से बढ़कर 40 हो गई है।
-सब स्टेशनोें की क्षमता 1785 मेगावाट से बढ़कर 8058 मेगावाट हो गई है।
-साल 2004 में जहां 1589 किमी सर्किट लाइन थी वहंी अब यह बढ़कर 2018 में 2999 किमी हो गई है।
-ट्रांसमिशन लॉस 2.33 फीसदी से घटकर 1.39 हो गया है।
- वर्तमान में पिटकुल के पास 132 केवी के 29 स्टेशन, 220 किलोवाट के आठ और 400 किलोवाट के तीन पावर स्टेशन हैं।
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साल दर साल क्रेडिट रेटिंग में सुधार
पिटकुल की क्रेडिट रेटिंग में जबरदस्त सुधार आया है। आरईसी और पीएफसी की ओर से जहां वित्तीय वर्ष 2014-15 में बी प्लस रेटिंग थी, वहीं साल 2015-16 में पिटकुल को ए प्लस रेटिंग दी गई। साल 2016-17 में क्रेडिट रेटिंग में और सुधार आया और पिटकुल को एक प्लस स्टार व साल 2017-18 में ए डबल प्लस, डबल स्टार रेटिंग दी गई।
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साल दर साल घटता गया लाभांश
पिटकुल की क्रेडिट रेटिंग में जहां साल दर साल सुधार आया, वहीं कमाई यानी लाभांश में साल दर साल कमी होती गई। वित्तीय वर्ष 2014-15 में पिटकुल को 45.95 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ। वहीं साल 2015-16 में यह बढ़कर 123.88 करोड़ पहुंच गया। लेकिन वित्तीय वर्ष 2016- 17 में पिटकुल की कमाई अचानक गिरकर 37.28 करोड़ पर पहुंच गई। जबकि साल 2017-18 में यह आंकड़ा गिरकर 20 करोड़ तक पहुंच गया। पिटकुल की साल दर दर गिरती कमाई पर सचिव ऊर्जा राधिका झा ने भी गहरी नाराजगी जताई है। उन्होेंने अफसरों निर्देशित किया कि पिटकुल को अधिकतम लाभ में कैसे लाया जाय इसे लेकर नई नीतियां बनायी जाय।
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राज्य में बिजली आपूर्ति को और दुरुस्त करने के लिए पावर ट्रांसमिशन कारपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) छह नए पावर स्टेशन बनाएगा। इसके अलावा पिटकुल पूरे राज्य में वित्तीय वर्ष 2018- 19 में 404 किलो मीटर सर्किट लाइन बिछाएगा। इन परियोजनाओं पर 510.85 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह निर्णय पिटकुल बोर्ड की बैठक में लिया गया।
सोमवार को पिटकुल मुख्यालय में ऊर्जा सचिव राधिका झा की मौजूदगी में पिटकुल की बोर्ड बैठक हुई। बैठक में देहरादून के हर्रावाला, हरिद्वार के पिरान कलियर और पदार्था, बागेश्वर, हल्द्वानी के जफरपुर और पिथौरागढ़ के बरम में छह नए पावर स्टेशन बनाए जाने, ब्यासी-देहरादून पावर ग्रिड लाइन और ब्रह्मवारी- श्रीनगर पावर ग्रिड लाइन को जोड़ने, पूरे राज्य में 404 किलोमीटर की सर्किट लाइन बिछाए जाने का प्रस्तावों को मंजूरी मिली। इन सभी परियोजनाओं पर 510.85 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। जिसमें से 30 फीसदी धनराशि राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि बाकी धनराशि पिटकुल अपने स्तर से निवेश कराएगा।
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ऊर्जा सचिव राधिका झा ने कहा कि परियोजनाओं को बनाने में राज्य सरकार से अर्थ पूंजी की जरूरत होती है, लेकिन कई बार बजट के अभाव में परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। ऐसे में परियोजनाएं प्रभावित न हो इसके लिए पिटकुल पूंजी निवेश के नए स्त्रोत तलाशें। कहा कि योजनाओं की मॉनीटरिंग में यदि किसी स्तर पर लापरवाही बरती जाए तो संबंधित अफसरों की चरित्र पंजिका में इसकी प्रविष्टि की जाएं। बोर्ड बैठक के दौरान सचिव राधिका झा ने पिटकुल की ओर से संचालित तमाम परियोजनाओं की समीक्षा की उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं को वित्तीय वर्ष 2018 -19 में पूरा किया जाना है उन्हें जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएं।
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निदेशकों के कार्यालयों में लगाए जाएंगे डैशबोर्ड
पिटकुल बोर्ड बैठक में इस बात पर भी सहमति बनी कि सभी निदेशकों के कार्यालयों में अत्याधुनिक डैशबोर्ड लगाए जाएंगे। जिसके जरिए राज्य में संचालित तमाम परियोजनाओं की मॉनीटरिंग की जा सके। वर्तमान समय में आला अफसरों द्वारा मॉनीटरिंग न किए जाने से तमाम परियोजनाएं देरी से संचालित की जा रही हैं, जिसका असर विद्युत आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। बैठक में सचिव ऊर्जा राधिका झा के अलावा प्रबंध निदेशक कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, अपर सचिव वित्त एलएन पंत, स्वतंत्र निदेशक मंडल में शामिल जेएल बजाज, बीपी पांडे और एसएस गुप्ता, यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक एसएन वर्मा, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा, पिटकुल के परियोजना एवं परिचालन निदेशक संजय मित्तल, निदेशक वित्त अमिताभ मोइत्रा, निदेशक मानव संसाधन आशीष कुमार, महाप्रबंधक विधि एवं कंपनी सचिव प्रवीण टंडन समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
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उपलब्धियों के आइने में पिटकुल
-साल 2004 से लेकर 2018 के बीच सब स्टेशनों की संख्या 17 से बढ़कर 40 हो गई है।
-सब स्टेशनोें की क्षमता 1785 मेगावाट से बढ़कर 8058 मेगावाट हो गई है।
-साल 2004 में जहां 1589 किमी सर्किट लाइन थी वहंी अब यह बढ़कर 2018 में 2999 किमी हो गई है।
-ट्रांसमिशन लॉस 2.33 फीसदी से घटकर 1.39 हो गया है।
- वर्तमान में पिटकुल के पास 132 केवी के 29 स्टेशन, 220 किलोवाट के आठ और 400 किलोवाट के तीन पावर स्टेशन हैं।
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साल दर साल क्रेडिट रेटिंग में सुधार
पिटकुल की क्रेडिट रेटिंग में जबरदस्त सुधार आया है। आरईसी और पीएफसी की ओर से जहां वित्तीय वर्ष 2014-15 में बी प्लस रेटिंग थी, वहीं साल 2015-16 में पिटकुल को ए प्लस रेटिंग दी गई। साल 2016-17 में क्रेडिट रेटिंग में और सुधार आया और पिटकुल को एक प्लस स्टार व साल 2017-18 में ए डबल प्लस, डबल स्टार रेटिंग दी गई।
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साल दर साल घटता गया लाभांश
पिटकुल की क्रेडिट रेटिंग में जहां साल दर साल सुधार आया, वहीं कमाई यानी लाभांश में साल दर साल कमी होती गई। वित्तीय वर्ष 2014-15 में पिटकुल को 45.95 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ। वहीं साल 2015-16 में यह बढ़कर 123.88 करोड़ पहुंच गया। लेकिन वित्तीय वर्ष 2016- 17 में पिटकुल की कमाई अचानक गिरकर 37.28 करोड़ पर पहुंच गई। जबकि साल 2017-18 में यह आंकड़ा गिरकर 20 करोड़ तक पहुंच गया। पिटकुल की साल दर दर गिरती कमाई पर सचिव ऊर्जा राधिका झा ने भी गहरी नाराजगी जताई है। उन्होेंने अफसरों निर्देशित किया कि पिटकुल को अधिकतम लाभ में कैसे लाया जाय इसे लेकर नई नीतियां बनायी जाय।