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मोहनपुर और गणेशपुर सब डिविजन में एक जेई के पास बीस से तीस हजार की कमान
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मोहनपुर डिवीजन के मोहनपुर सब-डिवीजन और गणेशपुर सब डिवीजन में एक जेई को 20 से 30 हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी दी गई है। ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ ही जेई को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। स्थानीय लोगों की ओर से अतिरिक्त जेई की व्यवस्था करने के बजाए एक-एक जेई के पास इतनी संख्या में उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी देने के विभाग के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
दरअसल, कुछ माह पहले तक मोहनपुर डिवीजन के अंतर्गत एक ही सब-डिवीजन था। इस डिवीजन के अंतर्गत उपभोक्ताओं की संख्या करीब 40 हजार के करीब थी, जिससे न केवल उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, बल्कि डिवीजन को भी व्यवस्था बनाने में दिक्कत पैदा होती थी। उपभोक्ताओं की समस्या को देखते हुए विभाग की ओर से मोहन सब-डिवीजन के साथ ही गणेशपुर सब-डिवीजन के नाम पर एक और डिवीजन खोला गया, जिसमें मोहनपुर सब डिवीजन के करीब 20 हजार उपभोक्ताओं को ट्रांसफर किया गया। इससे कुछ राहत तो मिली, लेकिन अब फिर से उपभोक्ताओं को उसी समस्या से गुजरना पड़ेगा। इसका कारण डिवीजन में जेई की कमी है। इसके ऊपर विभाग की ओर से यहां जेई के ट्रांसफर कर दिए हैं, जिससे अब मोहनपुर सब-डिवीजन के जेई के पास करीब तीस हजार तो गणेशपुर जेई के पास करीब बीस हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है।
दोनों सब-डिवीजन का क्षेत्र काफी लंबा-चौड़ा है। ऐसे में एक जेई इतने उपभोक्ताओं की समस्या का निवारण कैसे करेगा, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरकेड़िया ग्राम सभा की पूर्व उप प्रधान गीता बिष्ट ने कहा कि मोहनपुर सब डिवीजन में अभी तक दो जेई तैनात थे। उपभोक्ताओं की संख्या मानकों से अधिक होने के कारण यहां एक और जेई की आवश्यकता है, लेकिन विभाग की ओर से यहां से एक जेई का ट्रांसफर गणेशपुर कर दिया है। दूसरी और गणेशपुर में भी एक और जेई की जरूरत थी, लेकिन वहां भी अब एक जेई ही करीब बीस हजार उपभोक्ताओं की कमान संभालेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक से बात की जाएगी।
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फिलहाल कुछ समय के लिए यह व्यवस्था की गई है। मोहनपुर सब-डिवीजन के लिए दो जेई की मांग की गई है। अभी जेई ट्रेनिंग पर हैं, ट्रेनिंग खत्म होने के बाद समस्या खत्म हो जाएगी।
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दरअसल, कुछ माह पहले तक मोहनपुर डिवीजन के अंतर्गत एक ही सब-डिवीजन था। इस डिवीजन के अंतर्गत उपभोक्ताओं की संख्या करीब 40 हजार के करीब थी, जिससे न केवल उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, बल्कि डिवीजन को भी व्यवस्था बनाने में दिक्कत पैदा होती थी। उपभोक्ताओं की समस्या को देखते हुए विभाग की ओर से मोहन सब-डिवीजन के साथ ही गणेशपुर सब-डिवीजन के नाम पर एक और डिवीजन खोला गया, जिसमें मोहनपुर सब डिवीजन के करीब 20 हजार उपभोक्ताओं को ट्रांसफर किया गया। इससे कुछ राहत तो मिली, लेकिन अब फिर से उपभोक्ताओं को उसी समस्या से गुजरना पड़ेगा। इसका कारण डिवीजन में जेई की कमी है। इसके ऊपर विभाग की ओर से यहां जेई के ट्रांसफर कर दिए हैं, जिससे अब मोहनपुर सब-डिवीजन के जेई के पास करीब तीस हजार तो गणेशपुर जेई के पास करीब बीस हजार उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है।
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दोनों सब-डिवीजन का क्षेत्र काफी लंबा-चौड़ा है। ऐसे में एक जेई इतने उपभोक्ताओं की समस्या का निवारण कैसे करेगा, इस पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरकेड़िया ग्राम सभा की पूर्व उप प्रधान गीता बिष्ट ने कहा कि मोहनपुर सब डिवीजन में अभी तक दो जेई तैनात थे। उपभोक्ताओं की संख्या मानकों से अधिक होने के कारण यहां एक और जेई की आवश्यकता है, लेकिन विभाग की ओर से यहां से एक जेई का ट्रांसफर गणेशपुर कर दिया है। दूसरी और गणेशपुर में भी एक और जेई की जरूरत थी, लेकिन वहां भी अब एक जेई ही करीब बीस हजार उपभोक्ताओं की कमान संभालेगा। ऐसे में उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक से बात की जाएगी।
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फिलहाल कुछ समय के लिए यह व्यवस्था की गई है। मोहनपुर सब-डिवीजन के लिए दो जेई की मांग की गई है। अभी जेई ट्रेनिंग पर हैं, ट्रेनिंग खत्म होने के बाद समस्या खत्म हो जाएगी।