कब्जे में गंगा की ढाई हजार बीघा जमीन, चलेगा मिशन गंगा क्लीन
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गंगा नदी की 2565 बीघा भूमि पर हरिद्वार और आसपास के क्षेत्र में अवैध कब्जा और अतिक्रमण है। यह आंकड़ा सिंचाई विभाग ने जुटाया है। घोषणा के दो साल बाद केंद्र सरकार गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और गंगा तटों को विकसित करने के अभियान को मूर्त रूप देने जा रही है। लेकिन सच्चाई यह है कि बिना अतिक्रमण हटाए न तो गंगा को साफ रखा जा सकता है और न गंगा तट विकसित हो सकते हैं।
बृहस्पतिवार को हरिद्वार में मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान शुरू होने जा रहा है। ऋषिकुल विद्यापीठ के मैदान पर होने वाले इस समारोह की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
चार केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी, उमा भारती, डॉ. महेश शर्मा और चौधरी वीरेंद्र सिंह के इस आयोजन में शामिल होने की चर्चा है। हरिद्वार के लोगों और राज्य सरकार को अब तक गंगा प्रदूषण से जुड़े विभागों को इससे दूर ही रखा गया है।
उत्तराखंड सिंचाई विभाग के रिकार्ड में ही हरिद्वार के शहरी क्षेत्र में गंगा नदी की लगभग दो हजार 565 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे हैं। इनके रहते न तो गंगा को प्रदूषण मुक्त किया जा सकता है और न गंगातटों को विकसित। फिर हजारों की आबादी जो गंगा तटों पर बसी हुई है। कई बार अवैध कब्जों को हटाने का कार्यक्रम भी बना, लेकिन कभी मजिस्ट्रेट नहीं मिला है तो कभी पुलिस फोर्स। ऐसे में हालात में मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान बेमानी है।
ऐसे तो हो गया मिशन फॉर क्लीन
जिले के शहरी क्षेत्र में गंगा नदी की लगभग दो हजार 565 बीघा भूमि पर अवैध कब्जे हैं। यह भूमि उत्तराखंड सिंचाई विभाग की है। उसके रिकार्ड पर गौर करें तो चंडीघाट, बैरागी कैंप, रोडी बेलवाला, सप्तसरोवर, सप्तऋषि, लालजीवाली, पंतद्वीप, चमगादड़ टापू, दूधियाबंद आदि स्थान अतिक्रमण की चपेट में हैं।
खास बात यह है कि इन अतिक्रमणकारियों को राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ संतों, आध्यात्मिक जगत से जुड़े लोगों का परोक्ष, अपरोक्ष रूप से संरक्षण प्राप्त है। गंगा नदी की भूमि पर कब्जा करने वाली 95 प्रतिशत आबादी ऐसी है जो बाहर से आकर यहां बसी है। ऐसे में गंगा को प्रदूषण मुक्त करने और उसके किनारों को विकसित करने का मिशन कैसे पूरा होगा, यह बड़ा सवाल है।
सिंचाई विभाग के रिकार्ड में अवैध कब्जे
1. बैरागी कैंप कनखल में गंगा नदी की 450 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण है। जिसमें संतों, महंतों द्वारा अवैध रूप से मंदिर की आड़ में बनाए आलीशान आश्रम भी शामिल हैं।
2. चंडीघाट के अपस्ट्रीम में गंगा नदी की 450 बीघा भूमि पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण है। इसमें सैकड़ों झोपड़ पट्टी बस्ती के साथ ही पक्के निर्माण और गोशालाएं भी शामिल हैं।
3. रोडी बेलवाला मेला क्षेत्र में लगभग 1545 बीघा भूमि (103 हेक्टेयर) पर अतिक्रमण है।
4. दूधियाबंध में 20 बीघा, पंतद्वीप और चमगादड़ टापू में लगभग 60 बीघा भूमि पर अतिक्रमण है। लालजीवाला कबाड़ी और बंगाली बस्ती में 15 बीघा भूमि पर कब्जा है।
5. संत बाहुल्य सप्तसरोवर क्षेत्र में गंगा किनारे लगभग 25 बीघा गंगा नदी की भूमि संतों, फक्कड़ों, फकीरों अन्य लोगों का कब्जा।
अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर कोई संजीदा नहीं
गंगा की भूमि पर अवैध कब्जों और निर्माण को लेकर कोई संजीदा नहीं है। बैरागी कैंप की नदी की भूमि पर कब्जा व अवैध निर्माण करने वाले साधु संत तो सरकार से हमारी शिकायत कर रहे हैं कि सिंचाई विभाग उनके विरुद्ध नाजायज बेदखली के मुकदमे चलाकर परेशान कर रहा है। चंडीघाट की स्थिति भी ऐसी ही है। कई बार अवैध कब्जों व अतिक्रमण हटाने का कार्यक्रम बनाया जा चुका है, लेकिन कभी मजिस्ट्रेट नहीं मिलता है तो कभी पुलिस फोर्स। जब तक पक्के अतिक्रमण नहीं हटाए जाएंगे, गंगा कैसे क्लीन होगी।
-एनएस कुंडरा, उप राजस्व अधिकारी सिंचाई खंड हरिद्वार
मिशन फॉर क्लीन गंगा अभियान के आयोजन में हमारी कोई भागीदारी नहीं है। इस मौके पर हमारे द्वारा तैयार ऋषिकेश की दो योजनाओं त्रिवेणीघाट की सीवरेज योजना और तपोवन में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का लोकार्पण किया जाएगा। अब हमारे विभाग को कोई काम नहीं दिया गया है। गंगा को प्रदूषण मुक्त करने का काम दिल्ली की कंसलटेंट (बॉबकास) कंपनी को काम दिया गया है। हम आयोजन में शरीक तो होंगे, लेकिन काम से हमें अलग कर दिया गया।
-वाईके मिश्रा महाप्रबंधक, निर्माण एवं गंगा मंडल।