दुनिया के तमाम देशों में खानपान की चीजों के साथ ही फार्मास्युटिकल्स, तेल कुओं की ड्रिलिंग और सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में कार्बोहाइड्रेट की बढ़ती उपयोगिता को लेकर भारत समेत कई देशों के वैज्ञानिक नए सिरे से मंथन करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम के तहत वन अनुसंधान संस्थान की ओर से चार और पांच दिसंबर को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें भारत के अलावा अमेरिका, जर्मनी, ग्रेट ब्रिटेन, नीदरलैंड, पुर्तगाल समेत दुनिया के दर्जनभर देशों के 250 से अधिक वैज्ञानिक अपना व्याख्यान देंगे।
वन अनुसंधान संस्थान के निदेशक एवं आईसीएफआरई के महानिदेशक अरुण सिंह रावत ने बताया कि पिछले कुछ दशकों से जैव अणु कार्बोहाइड्रेट़स वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं में एक प्रमुख घटक के रूप में उभरे हैं। खानपान के साथ ही फार्मास्युटिकल्स, सौंदर्य प्रसाधन के क्षेत्र में पूरी दुनिया में कार्बोहाइड्रेट की मांग बहुत तेजी से बढ़ी है। ऐसे में इन्हीं सब पहलुओं को देखते हुए दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार को कुल पांच तकनीकी सत्रों में आयोजित किया जाएगा। जिसमें 100 से अधिक शोधपत्र पढ़े जाएंगे। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में वैज्ञानिक कार्बोहाइड्रेट में संरचनात्मक विविधता, कार्बोहाइड्रेट आधारित चिकित्सा, खाद्य एवं न्यूट्रास्यूटिकल, ग्लाइकोबायोलॉजी, ग्लाइकोटेक्नोलॉजी, कार्बोहाइड्रेट में नैनो प्रौद्योगिकी, जैव रिफाइनरी, सौंदर्य प्रसाधन समेत तमाम पहलुओं पर व्याख्यान देंगे।