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दून की सड़कों पर दौड़ेगी एसी वाली सिटी बसें
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। दून की सड़कों पर अगले तीन-चार माह के भीतर एसी सिटी बसें दौड़ेंगी। स्मार्ट सिटी के तहत तीन रूटों पर 27 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा। ये बसें आईएसबीटी में खड़ी होंगी। वहीं इनके लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनेगा। ये बसें सुबह छह से रात नौ बजे तक चलेंगी। इनमें महिला सुरक्षा समेत सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
स्मार्ट सिटी के तहत शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल्द इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। 26 और 40 सीटों वाली ये बसें तीन रूटों पर दौड़ेंगी। इनका निर्धारण मार्च में कर लिया है। पहला रूट आईएसबीटी-रेलवे स्टेशन-घंटाघर-जाखन होगा। दूसरा रूट सुद्धोवाला-प्रेमनगर-घंटाघर-रायपुर तय किया है। तीसरा रूट जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आईएसबीटी-घंटाघर रहेगा। इलेक्ट्रिक बसें वातानुकूलित होंगी। इन बसों में जीपीएस लगे होने के चलते यात्री मोबाइल के जरिये इनकी लोकेशन के बारे में जान सकेंगे। इससे जहां सवारियों की यात्रा सुखद होगी वहीं जाम से भी निजात मिलेगी।
एयरपोर्ट तक जाने में मनमाने किराए से मिलेगी निजात
स्मार्ट सिटी के तहत इलेक्ट्रिक बस जौलीग्रांट स्थित एयरपोर्ट भी जाएगी। ऐसा होने से यात्रियों को टैक्सी चालकों के मनमाने किराए से भी निजात मिलेगी। मौजूदा समय की बात करें तो एयरपोर्ट से दून के लिए टैक्सी लेने पर 800 से 1000 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन, इलेक्ट्रिक बस चलने से यह किराया 50 रुपये से भी कम होगा।
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इलेक्ट्रिक सिटी बसों की खासियत
>> महिलाओं की सुरक्षा के लिए बस में पैनिक बटन की व्यवस्था।
>> जीपीएस लगने से यात्रियों को मिलेगीबस की लोकेशन।
>> प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम बिजली का खर्च।
>> ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के चलते ऑटो गियर की सुविधा, चालक को बार-बार नहीं बदलने पड़ेंगे गियर।
>> ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर का कंट्रोल चालक के पास होने, लो फ्लोर होने के चलते बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को बस चढ़ने और उतरने में आसानी होगी।
>> इलेक्ट्रिक डिस्प्ले के जरिये यात्रियों को रूट की जानकारी मिलेगी।
>> इलेक्ट्रिक बस में लीथियम ऑयन बैटरी लगे होने के चलते एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
>> 20 प्रतिशत बैकअप के अलावा बस की अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
इलेक्ट्रिक बस में प्रति किमी आएगा कम खर्च
इलेक्ट्रिक बस में प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम खर्च आ रहा है। यानी इस बस में महज पांच से छह रुपये प्रति किलोमीटर बिजली खर्च होगी। जबकि साधारण सिटी बसों में इससे अधिक खर्च आता है।
ऐसे समझें दोनों बसों मेें अंतर
इलेक्ट्रिक बस साधारण बस
व्हीलबेस 8-9 मीटर 7-8 मीटर
सीट 30 32
टैंक - 60 लीटर
एवरेज 6 रुपये प्रति किमी 18 रुपये प्रति किमी
कीमत एक करोड़ रुपये 13 लाख रुपये
अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रतिघंटा 60 किमी प्रतिघंटा
स्मार्ट परिवहन व्यवस्था में फिट नहीं मौजूदा सिटी बसें
देहरादून। राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली मौजूदा सिटी बसें स्मार्ट परिवहन व्यवस्था में फिट नहीं बैठती। ऐसे में इलेक्ट्रिक सिटी बसें चलने से सबसे अधिक परेशानी सिटी बस संचालकों को झेलनी होगी। इस समय दौड़ रही ज्यादातर सिटी बसें खटारा हैं। तेज रफ्तार से फर्राटा भरना, मनमर्जी से जहां-तहां बस को रोकना इनका शगल है। इनके चालक-परिचालक का व्यवहार भी सवारियों से अच्छा नहीं रहता। शहर के 13 रूटों पर करीब सिटी बसों के 310 परमिट हैं। इनमें करीब 260 सिटी बसें चल रही हैं, जबकि करीब 50 बस संचालकों ने अपने परमिट आरटीओ में सरेंडर कर दिए हैं। ज्यादातर सिटी बसें फिटनेस के मामले में भी फेल हैं। प्रदूषण के मानकों को इनके संचालक धता बताते हैं। बावजूद परिवहन विभाग इन पर सख्ती नहीं कर रहा है।
स्मार्ट सिटी के तहत चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। ये बसें जीपीएस सिस्टम से लैस हैं। इनमें महिलाओं की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। स्पीड गर्वनर आदि लगे होने के चलते ये ज्यादा सुरक्षित हैं। - दिनेश चंद पठोई, आरटीओ देहरादून
राजधानी में डग्गामारी बड़ी समस्या है। इन पर अंकुश लगाना जरूरी है। स्मार्ट सिटी के तहत चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों का स्वागत है। मौजूदा बसों में भी संशोधन की व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे हमारे सामने आर्थिक संकट पैदा न हो।
- विजय वर्धन डंडरियाल, अध्यक्ष, देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ
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देहरादून। दून की सड़कों पर अगले तीन-चार माह के भीतर एसी सिटी बसें दौड़ेंगी। स्मार्ट सिटी के तहत तीन रूटों पर 27 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन होगा। ये बसें आईएसबीटी में खड़ी होंगी। वहीं इनके लिए चार्जिंग स्टेशन भी बनेगा। ये बसें सुबह छह से रात नौ बजे तक चलेंगी। इनमें महिला सुरक्षा समेत सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
स्मार्ट सिटी के तहत शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जल्द इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू किया जा रहा है। 26 और 40 सीटों वाली ये बसें तीन रूटों पर दौड़ेंगी। इनका निर्धारण मार्च में कर लिया है। पहला रूट आईएसबीटी-रेलवे स्टेशन-घंटाघर-जाखन होगा। दूसरा रूट सुद्धोवाला-प्रेमनगर-घंटाघर-रायपुर तय किया है। तीसरा रूट जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आईएसबीटी-घंटाघर रहेगा। इलेक्ट्रिक बसें वातानुकूलित होंगी। इन बसों में जीपीएस लगे होने के चलते यात्री मोबाइल के जरिये इनकी लोकेशन के बारे में जान सकेंगे। इससे जहां सवारियों की यात्रा सुखद होगी वहीं जाम से भी निजात मिलेगी।
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एयरपोर्ट तक जाने में मनमाने किराए से मिलेगी निजात
स्मार्ट सिटी के तहत इलेक्ट्रिक बस जौलीग्रांट स्थित एयरपोर्ट भी जाएगी। ऐसा होने से यात्रियों को टैक्सी चालकों के मनमाने किराए से भी निजात मिलेगी। मौजूदा समय की बात करें तो एयरपोर्ट से दून के लिए टैक्सी लेने पर 800 से 1000 रुपये का भुगतान करना पड़ता है। लेकिन, इलेक्ट्रिक बस चलने से यह किराया 50 रुपये से भी कम होगा।
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इलेक्ट्रिक सिटी बसों की खासियत
>> महिलाओं की सुरक्षा के लिए बस में पैनिक बटन की व्यवस्था।
>> जीपीएस लगने से यात्रियों को मिलेगीबस की लोकेशन।
>> प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम बिजली का खर्च।
>> ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन के चलते ऑटो गियर की सुविधा, चालक को बार-बार नहीं बदलने पड़ेंगे गियर।
>> ऑटोमेटिक स्लाइडिंग डोर का कंट्रोल चालक के पास होने, लो फ्लोर होने के चलते बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं को बस चढ़ने और उतरने में आसानी होगी।
>> इलेक्ट्रिक डिस्प्ले के जरिये यात्रियों को रूट की जानकारी मिलेगी।
>> इलेक्ट्रिक बस में लीथियम ऑयन बैटरी लगे होने के चलते एक बार चार्ज होने के बाद बस 200 से 250 किलोमीटर का सफर तय करेगी।
>> 20 प्रतिशत बैकअप के अलावा बस की अधिकतम रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।
इलेक्ट्रिक बस में प्रति किमी आएगा कम खर्च
इलेक्ट्रिक बस में प्रति किलोमीटर एक यूनिट से भी कम खर्च आ रहा है। यानी इस बस में महज पांच से छह रुपये प्रति किलोमीटर बिजली खर्च होगी। जबकि साधारण सिटी बसों में इससे अधिक खर्च आता है।
ऐसे समझें दोनों बसों मेें अंतर
इलेक्ट्रिक बस साधारण बस
व्हीलबेस 8-9 मीटर 7-8 मीटर
सीट 30 32
टैंक - 60 लीटर
एवरेज 6 रुपये प्रति किमी 18 रुपये प्रति किमी
कीमत एक करोड़ रुपये 13 लाख रुपये
अधिकतम रफ्तार 80 किमी प्रतिघंटा 60 किमी प्रतिघंटा
स्मार्ट परिवहन व्यवस्था में फिट नहीं मौजूदा सिटी बसें
देहरादून। राजधानी की सड़कों पर दौड़ने वाली मौजूदा सिटी बसें स्मार्ट परिवहन व्यवस्था में फिट नहीं बैठती। ऐसे में इलेक्ट्रिक सिटी बसें चलने से सबसे अधिक परेशानी सिटी बस संचालकों को झेलनी होगी। इस समय दौड़ रही ज्यादातर सिटी बसें खटारा हैं। तेज रफ्तार से फर्राटा भरना, मनमर्जी से जहां-तहां बस को रोकना इनका शगल है। इनके चालक-परिचालक का व्यवहार भी सवारियों से अच्छा नहीं रहता। शहर के 13 रूटों पर करीब सिटी बसों के 310 परमिट हैं। इनमें करीब 260 सिटी बसें चल रही हैं, जबकि करीब 50 बस संचालकों ने अपने परमिट आरटीओ में सरेंडर कर दिए हैं। ज्यादातर सिटी बसें फिटनेस के मामले में भी फेल हैं। प्रदूषण के मानकों को इनके संचालक धता बताते हैं। बावजूद परिवहन विभाग इन पर सख्ती नहीं कर रहा है।
स्मार्ट सिटी के तहत चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी। ये बसें जीपीएस सिस्टम से लैस हैं। इनमें महिलाओं की सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है। स्पीड गर्वनर आदि लगे होने के चलते ये ज्यादा सुरक्षित हैं। - दिनेश चंद पठोई, आरटीओ देहरादून
राजधानी में डग्गामारी बड़ी समस्या है। इन पर अंकुश लगाना जरूरी है। स्मार्ट सिटी के तहत चलने वाली इलेक्ट्रिक बसों का स्वागत है। मौजूदा बसों में भी संशोधन की व्यवस्था होनी चाहिए। जिससे हमारे सामने आर्थिक संकट पैदा न हो।
- विजय वर्धन डंडरियाल, अध्यक्ष, देहरादून महानगर सिटी बस सेवा महासंघ