{"_id":"5b35455f4f1c1bf76e8baa50","slug":"21530217823-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"देवभूमि की वनस्पतियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का होगा अध्ययन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
देवभूमि की वनस्पतियों पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का होगा अध्ययन
Updated Fri, 29 Jun 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
जलवायु परिवर्तन के चलते देवभूमि की वनस्पतियाें पर पड़ने वाले प्रभावों का वन विभाग विशेषज्ञों की मदद से अध्ययन कराएगा। साथ ही तेजी से विलुप्त हो रहीं वनस्पतियों के संरक्षण के लिए नई नर्सरी तकनीक विकसित की जाएगी। यह निर्णय प्रमुख वन संरक्षक की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस बात पर भी सहमति बनी कि राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कृषि वानिकी की प्रजातियों पर और शोध किया जाए। इसके अलावा सात वैज्ञानिक शोधों को बंद करने का भी निर्णय लिया गया।
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक में कहा गया कि जिन प्रजातियों को नर्सरी में उगाना संभव नहीं और वन क्षेत्रों में वे तेजी से कम हो रही हैं, उनके लिए भी नई नर्सरी तकनीक विकसित की जाए। सलाहकार समिति के सदस्योें ने निर्णय लिया कि कृषि वानिकी के जरिये किसानों को बढ़ावा देने के लिए नई प्रजातियों पर शोध की जरूरत है। योजना को धरातल पर लाने के लिए कृषि विज्ञानियों की मदद ली जाए।
इस दौरान प्रमुख वन संरक्षक जयराज, पूर्व वन संरक्षक डॉ. बीएस बरफाल, महेंद्र सिंह, अध्यक्ष हिमालयन रिसर्च सेंटर, पर्यावरणविद् डॉ. अजय रावत, गंभीर सिंह प्रबंध निदेशक वन विकास निगम, मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता, वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त संजीव चतुर्वेदी, डीएफओ जीवन चंद्र जोशी, एसपी सिंह पूर्व कुलपति केंद्रीय विवि गढ़वाल, डॉ. जेएस मेहता समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
विज्ञापन
--
बैठक में छाया मानव वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा
देहरादून। देवभूमि में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग के आला अफसरों को चिंता में डाल दिया है। मानव-वन्यजीवों के संघर्ष का मुद्दा उत्तराखंड वानिकी सलाहकार समिति की बैठक में भी छाया रहा। समिति के अध्यक्ष एवं प्रमुख वन संरक्षक जयराज समेत समिति के सदस्यों ने इस पर चिंता जताते हुए प्रभावी अंकुश लगाने पर जोर दिया। सहमति बनी कि राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कार्बेट पार्क समेत राज्य के सभी पार्कों और वन प्रभागों में पिछले डेढ़ दशक में हुए सभी मानव वन्यजीव संघर्षों का डाटा एकत्र किया जाए। साथ ही विशेषज्ञों की टीम इसका अध्ययन करे और इसे रोकने के उपाय सुझाएं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में गुलदार, हाथी जैसे जंगली जानवर करीब छह सौ लोगों की जान ले चुके हैं, जबकि तीन हजार से अधिक लोग अपंग हो चुके हैं।
विज्ञापन
जलवायु परिवर्तन के चलते देवभूमि की वनस्पतियाें पर पड़ने वाले प्रभावों का वन विभाग विशेषज्ञों की मदद से अध्ययन कराएगा। साथ ही तेजी से विलुप्त हो रहीं वनस्पतियों के संरक्षण के लिए नई नर्सरी तकनीक विकसित की जाएगी। यह निर्णय प्रमुख वन संरक्षक की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस बात पर भी सहमति बनी कि राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए कृषि वानिकी की प्रजातियों पर और शोध किया जाए। इसके अलावा सात वैज्ञानिक शोधों को बंद करने का भी निर्णय लिया गया।
बृहस्पतिवार को उत्तराखंड वानिकी अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक में कहा गया कि जिन प्रजातियों को नर्सरी में उगाना संभव नहीं और वन क्षेत्रों में वे तेजी से कम हो रही हैं, उनके लिए भी नई नर्सरी तकनीक विकसित की जाए। सलाहकार समिति के सदस्योें ने निर्णय लिया कि कृषि वानिकी के जरिये किसानों को बढ़ावा देने के लिए नई प्रजातियों पर शोध की जरूरत है। योजना को धरातल पर लाने के लिए कृषि विज्ञानियों की मदद ली जाए।
विज्ञापन
इस दौरान प्रमुख वन संरक्षक जयराज, पूर्व वन संरक्षक डॉ. बीएस बरफाल, महेंद्र सिंह, अध्यक्ष हिमालयन रिसर्च सेंटर, पर्यावरणविद् डॉ. अजय रावत, गंभीर सिंह प्रबंध निदेशक वन विकास निगम, मुख्य वन संरक्षक बीपी गुप्ता, वन संरक्षक अनुसंधान वृत्त संजीव चतुर्वेदी, डीएफओ जीवन चंद्र जोशी, एसपी सिंह पूर्व कुलपति केंद्रीय विवि गढ़वाल, डॉ. जेएस मेहता समेत कई अधिकारी उपस्थित थे।
विज्ञापन
--
बैठक में छाया मानव वन्यजीव संघर्ष का मुद्दा
देहरादून। देवभूमि में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की घटनाओं ने वन विभाग के आला अफसरों को चिंता में डाल दिया है। मानव-वन्यजीवों के संघर्ष का मुद्दा उत्तराखंड वानिकी सलाहकार समिति की बैठक में भी छाया रहा। समिति के अध्यक्ष एवं प्रमुख वन संरक्षक जयराज समेत समिति के सदस्यों ने इस पर चिंता जताते हुए प्रभावी अंकुश लगाने पर जोर दिया। सहमति बनी कि राजाजी टाइगर रिजर्व और जिम कार्बेट पार्क समेत राज्य के सभी पार्कों और वन प्रभागों में पिछले डेढ़ दशक में हुए सभी मानव वन्यजीव संघर्षों का डाटा एकत्र किया जाए। साथ ही विशेषज्ञों की टीम इसका अध्ययन करे और इसे रोकने के उपाय सुझाएं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में गुलदार, हाथी जैसे जंगली जानवर करीब छह सौ लोगों की जान ले चुके हैं, जबकि तीन हजार से अधिक लोग अपंग हो चुके हैं।