{"_id":"5adf93d04f1c1b9f098b661f","slug":"21524601808-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"नई खोज के लिए, नई सोच जरूरी : डोभाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नई खोज के लिए, नई सोच जरूरी : डोभाल
Updated Wed, 25 Apr 2018 02:00 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई खोज के लिए नई सोच जरूरी : डोभाल
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) का 59वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल और विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर के निदेशक डॉ. श्याम लाल सोनी रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र डोभाल ने देश में अनुसंधानों के अभाव का जिक्र किया। कहा कि देश में सन् 1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज के बाद कोई मौलिक खोज नहीं हुई है। इन 90 सालों में केवल अब तक हो चुकी खोजों के आधार पर उनके उपयोग के आयाम ही बढ़े हैं। उन्होंने समारोह में उपस्थित केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कहा कि जीनियस अथवा विशिष्ट प्रतिभा के स्तर पर पहुंचने के लिए अलग सोच विकसित करनी होगी। विशेषज्ञों की बात तक सीमित न रहे। नई बातें सोचें, विरोधाभासी वस्तुओं और घटनाओं के बारे में सोचेें। शिक्षण संस्थानों के लिए कहा कि बच्चों को कुछ अलग करने के लिए सिखाया जाना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि डॉ. श्यामलाल सोनी ने कहा कि हिमालय में अपशिष्ट प्लास्टिक के प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा जैसे क्षेत्रोें में दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे पूर्व आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे ने कहा कि विज्ञान, मानविकी और वाणिज्य का एक दिशा में कार्य करना आवश्यक है।
विज्ञापन
समारोह समिति अध्यक्ष डॉॅ. डीसी पांडे ने संस्थान के स्थापना दिवस के बारे में जानकारी दी। कहा कि 1960 में देश में पेट्रोलियम उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संस्थान की स्थापना हुई थी। संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. आरती ने पीएम मोदी की पहल पर केंद्रीय विद्यालयों के लिए शुरू किए गए जिज्ञासा कार्यक्रम के में बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन के 75000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। कार्यकारी प्रशासन नियंत्रक परवेश चंद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एमसी रतूड़ी ने किया।
विज्ञापन
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (आईआईपी) का 59वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। समारोह में मुख्य अतिथि यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल और विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) श्रीनगर के निदेशक डॉ. श्याम लाल सोनी रहे।
मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र डोभाल ने देश में अनुसंधानों के अभाव का जिक्र किया। कहा कि देश में सन् 1928 में ‘रमन प्रभाव’ की खोज के बाद कोई मौलिक खोज नहीं हुई है। इन 90 सालों में केवल अब तक हो चुकी खोजों के आधार पर उनके उपयोग के आयाम ही बढ़े हैं। उन्होंने समारोह में उपस्थित केंद्रीय विद्यालय के बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कहा कि जीनियस अथवा विशिष्ट प्रतिभा के स्तर पर पहुंचने के लिए अलग सोच विकसित करनी होगी। विशेषज्ञों की बात तक सीमित न रहे। नई बातें सोचें, विरोधाभासी वस्तुओं और घटनाओं के बारे में सोचेें। शिक्षण संस्थानों के लिए कहा कि बच्चों को कुछ अलग करने के लिए सिखाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विशिष्ट अतिथि डॉ. श्यामलाल सोनी ने कहा कि हिमालय में अपशिष्ट प्लास्टिक के प्रबंधन, वैकल्पिक ऊर्जा जैसे क्षेत्रोें में दोनों संस्थान मिलकर काम करेंगे। इससे पूर्व आईआईपी के निदेशक डॉ. अंजन रे ने कहा कि विज्ञान, मानविकी और वाणिज्य का एक दिशा में कार्य करना आवश्यक है।
विज्ञापन
समारोह समिति अध्यक्ष डॉॅ. डीसी पांडे ने संस्थान के स्थापना दिवस के बारे में जानकारी दी। कहा कि 1960 में देश में पेट्रोलियम उद्योग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संस्थान की स्थापना हुई थी। संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. आरती ने पीएम मोदी की पहल पर केंद्रीय विद्यालयों के लिए शुरू किए गए जिज्ञासा कार्यक्रम के में बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसमें केंद्रीय विद्यालय संगठन के 75000 विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। कार्यकारी प्रशासन नियंत्रक परवेश चंद ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन एमसी रतूड़ी ने किया।