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‘साहित्यकार का नहीं होता कोई मजहब’
Updated Sun, 22 Apr 2018 02:32 AM IST
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‘साहित्यकार का कोई मजहब नहीं होता ’-अब्बास
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दो बार स्टेट साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले उर्दू एवं अंग्रेजी के लेखक रहमान अब्बास ने कहा कि एक लेखक का कोई मजहब नहीं होता। वह ऐसी किसी भी शक्ति को अपने विपरीत मानते हैं जो हमारे देश की आजादी को चुनौती देती है। अब्बास, तीन दिवसीय देहरादून कम्युनिटी लिटरेचर फेस्टिवल में अपने दिल की बात दून के श्रोताओं से साझा कर रहे थे।
इस सत्र के साथ ही तीन दिवसीय डब्ल्यूआईसी देहरादून कम्युनिटी लिटरेचर फेस्टिवल का शनिवार को समापन हो गया।
राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी में लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन कई साहित्यकारों ने मंच पर अपने अनुभव श्रोताओं से साझा किए। कार्यक्रम का पहला सत्र ‘दिल्ली जो एक शहर था’ शीर्षक के नाम रहा। इसमें बतौर वक्ता डॉ. सैफ महमूद, रहमान अब्बास और डॉ. विद्युत बोस शामिल हुए। इसमें मुगल काल के प्रसिद्ध शायरों और लेखकों पर चर्चा की गई। लेखक व सुप्रीम कोर्ट में वकील डॉ. सैफ महमूद ने मिर्जा गालिब और चाक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मुगल काल में जितने भी शायर रहे हैं, उनकी अपनी भाषा पर पूरी कमान थी। उनकी शायरी भले ही एक दूसरे से भिन्न थी लेकिन उन्होंने कभी आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। सैफ महमूद ने अपनी अगस्त में प्रकाशित होने वाली बुक ‘ए मुगल सिटी एंड ए ग्रेटेस्ट पोएट्स’ के बारे में कहा कि ये किताब उन लोगों को समर्पित है जो उर्दू भाषा को पसंद करते हैं लेकिन पढ़ नहीं पाते हैं।
इसके बाद युवा लेखकों के बीच संवाद हुआ। युवा लेखक बिलाल सिद्दीकी ने कहा कि बुक लिखना आसान काम नहीं है। उन्होंने जब पहली बुक लिखी तो उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। लिखने के लिए कई चीजों पर ध्यान देना होता है। बुक लिखने से पहले काफी रिसर्च करनी पड़ती है। इसमें मुख्य पात्र मजबूत होना जरूरी है। सिद्दीकी ने द किश ऑफ लाइफ, द बार्ड ऑफ ब्लड जैसी पुस्तकें लिखी हैं। साहित्यकार सुदीप नागरकर ने कहा कि कोई लेख या किताब अच्छी बुरी नहीं होती है। वह बस अपने विचार व्यक्त करने का जरिया होती है। अशोक जमनानी और हमाद फारुखी ने सभ्यता और संस्कृति विषय पर प्रकाश डाला। अशोक जमनानी कविता लेखन, कहानी लेखन के लिए जाने जाते हैं। देर शाम फेस्टिवल के समापन पर कला, निबंध, नृत्य, नुक्कड़ आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विभिन्न स्कूलों के बच्चों को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर रवि सिंह, जिया उस सलाम, मोना वर्मा, लेफ्टिनेंट जनरल कमल डावर, टीसीए राघवन, वजाहत हब्बीबुल्लाह, ऋषि सूरी, डब्ल्यूआईसी इंडिया की प्रेजीडेंट नाजिया यूसुफ इजुद्दीन, मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन उपाध्याय आदि शामिल रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। दो बार स्टेट साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले उर्दू एवं अंग्रेजी के लेखक रहमान अब्बास ने कहा कि एक लेखक का कोई मजहब नहीं होता। वह ऐसी किसी भी शक्ति को अपने विपरीत मानते हैं जो हमारे देश की आजादी को चुनौती देती है। अब्बास, तीन दिवसीय देहरादून कम्युनिटी लिटरेचर फेस्टिवल में अपने दिल की बात दून के श्रोताओं से साझा कर रहे थे।
इस सत्र के साथ ही तीन दिवसीय डब्ल्यूआईसी देहरादून कम्युनिटी लिटरेचर फेस्टिवल का शनिवार को समापन हो गया।
राजपुर रोड स्थित डब्ल्यूआईसी में लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन कई साहित्यकारों ने मंच पर अपने अनुभव श्रोताओं से साझा किए। कार्यक्रम का पहला सत्र ‘दिल्ली जो एक शहर था’ शीर्षक के नाम रहा। इसमें बतौर वक्ता डॉ. सैफ महमूद, रहमान अब्बास और डॉ. विद्युत बोस शामिल हुए। इसमें मुगल काल के प्रसिद्ध शायरों और लेखकों पर चर्चा की गई। लेखक व सुप्रीम कोर्ट में वकील डॉ. सैफ महमूद ने मिर्जा गालिब और चाक के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मुगल काल में जितने भी शायर रहे हैं, उनकी अपनी भाषा पर पूरी कमान थी। उनकी शायरी भले ही एक दूसरे से भिन्न थी लेकिन उन्होंने कभी आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। सैफ महमूद ने अपनी अगस्त में प्रकाशित होने वाली बुक ‘ए मुगल सिटी एंड ए ग्रेटेस्ट पोएट्स’ के बारे में कहा कि ये किताब उन लोगों को समर्पित है जो उर्दू भाषा को पसंद करते हैं लेकिन पढ़ नहीं पाते हैं।
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इसके बाद युवा लेखकों के बीच संवाद हुआ। युवा लेखक बिलाल सिद्दीकी ने कहा कि बुक लिखना आसान काम नहीं है। उन्होंने जब पहली बुक लिखी तो उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। लिखने के लिए कई चीजों पर ध्यान देना होता है। बुक लिखने से पहले काफी रिसर्च करनी पड़ती है। इसमें मुख्य पात्र मजबूत होना जरूरी है। सिद्दीकी ने द किश ऑफ लाइफ, द बार्ड ऑफ ब्लड जैसी पुस्तकें लिखी हैं। साहित्यकार सुदीप नागरकर ने कहा कि कोई लेख या किताब अच्छी बुरी नहीं होती है। वह बस अपने विचार व्यक्त करने का जरिया होती है। अशोक जमनानी और हमाद फारुखी ने सभ्यता और संस्कृति विषय पर प्रकाश डाला। अशोक जमनानी कविता लेखन, कहानी लेखन के लिए जाने जाते हैं। देर शाम फेस्टिवल के समापन पर कला, निबंध, नृत्य, नुक्कड़ आदि प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले विभिन्न स्कूलों के बच्चों को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर रवि सिंह, जिया उस सलाम, मोना वर्मा, लेफ्टिनेंट जनरल कमल डावर, टीसीए राघवन, वजाहत हब्बीबुल्लाह, ऋषि सूरी, डब्ल्यूआईसी इंडिया की प्रेजीडेंट नाजिया यूसुफ इजुद्दीन, मैनेजिंग डायरेक्टर सचिन उपाध्याय आदि शामिल रहे।
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