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हीमोफीलिया के उपचार में जटिलताओं को गिनाया एनएचएम और सोसाइटी की
Updated Sun, 18 Mar 2018 02:20 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और हीमोफीलिया सोसाइटी शाखा देहरादून की ओर से सहारनपुर रोड स्थित होटल में हीमोफीलिया पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी दीपक सिंघल ने कहा कि उत्तराखंड में इसकी सर्जरी और जांच की सुविधा नहीं है। जिससे इसके मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है।
सहारनपुर रोड स्थित होटल में आयोजित कार्यशाला में सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि प्रदेश में लगभग 165 मरीज इससे पीड़ित हैं। प्रदेश में दून, हल्द्वानी और कोटद्वार को छोड़कर अन्य किसी भी शहर में इसके इलाज की सुविधा नहीं हैं। इन शहरों में भी मरीजों को इसका नियमित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जबकि प्रदेश भर में कही भी इसकी सर्जरी और जांच की सुविधा नहीं है। सर्जरी व जांच के लिए मरीजों को पूरी तरह से दिल्ली एवं अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर परियोजना निदेशक डॉ. वीएस टोलिया ने प्रदेश में रोग संबंधी विभिन्न जटिलताओं को बताया। कार्यशाला में एम्स ऋषिकेश के डॉ. उत्तमनाथ, पीजीआई नोएडा की डॉ. नीता राधाकृष्णन, डॉ. कृष्ण नागरवाल, डॉ. जेपी शर्मा, संजीव गोयल, बसंत लाल गुप्ता, प्रवीन जोशी, डॉ. पीएस रावत, डॉ. एसएस बिष्ट, डॅा. टीसी पंत आदि मौजूद रहे।
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ग्लूकोमा सप्ताह के तहत निकाली रैली
दून मेडिकल कालेज की ओर से विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के तहत जन जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। रैली में प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि इससे बचाव के लिए लोगों को समय-समय पर इसकी जांच करानी चाहिए। रैली में डॉ. केके टम्टा, डॉ. सुशील ओझा आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और हीमोफीलिया सोसाइटी शाखा देहरादून की ओर से सहारनपुर रोड स्थित होटल में हीमोफीलिया पर आयोजित कार्यशाला में लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी दीपक सिंघल ने कहा कि उत्तराखंड में इसकी सर्जरी और जांच की सुविधा नहीं है। जिससे इसके मरीजों को खासी परेशानी उठानी पड़ती है।
सहारनपुर रोड स्थित होटल में आयोजित कार्यशाला में सोसाइटी के जनरल सेक्रेटरी ने कहा कि प्रदेश में लगभग 165 मरीज इससे पीड़ित हैं। प्रदेश में दून, हल्द्वानी और कोटद्वार को छोड़कर अन्य किसी भी शहर में इसके इलाज की सुविधा नहीं हैं। इन शहरों में भी मरीजों को इसका नियमित इलाज नहीं मिल पा रहा है। जबकि प्रदेश भर में कही भी इसकी सर्जरी और जांच की सुविधा नहीं है। सर्जरी व जांच के लिए मरीजों को पूरी तरह से दिल्ली एवं अन्य शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अपर परियोजना निदेशक डॉ. वीएस टोलिया ने प्रदेश में रोग संबंधी विभिन्न जटिलताओं को बताया। कार्यशाला में एम्स ऋषिकेश के डॉ. उत्तमनाथ, पीजीआई नोएडा की डॉ. नीता राधाकृष्णन, डॉ. कृष्ण नागरवाल, डॉ. जेपी शर्मा, संजीव गोयल, बसंत लाल गुप्ता, प्रवीन जोशी, डॉ. पीएस रावत, डॉ. एसएस बिष्ट, डॅा. टीसी पंत आदि मौजूद रहे।
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ग्लूकोमा सप्ताह के तहत निकाली रैली
दून मेडिकल कालेज की ओर से विश्व ग्लूकोमा सप्ताह के तहत जन जागरूकता रैली निकालकर लोगों को इसके प्रति जागरूक किया गया। रैली में प्रिंसिपल डॉ. प्रदीप भारती गुप्ता ने कहा कि इससे बचाव के लिए लोगों को समय-समय पर इसकी जांच करानी चाहिए। रैली में डॉ. केके टम्टा, डॉ. सुशील ओझा आदि मौजूद रहे।
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