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बढ़ सकती हैं आरटीई के तहत पढ़ रहे बच्चों की मुश्किलें
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का शुल्क जमा नहीं हुआ तो नए शिक्षा सत्र से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सहोदय अंतर विद्यालय संगठन विकासनगर का कहना है कि कुछ स्कूलों को पिछले तीन साल से शुल्क नहीं मिला है। यही हाल रहा तो नए शिक्षा सत्र से आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे।
आरटीई के तहत स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के शुल्क को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी बीपी सिंह से मिले संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्ष 2016 से सरकार द्वारा शुल्क का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। जबकि, कुछ विद्यालयों को तीन साल से शुल्क नहीं मिला है। समय पर शुल्क का भुगतान नहीं होने से निजी शिक्षण संस्थान आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। बीईओ से मिले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रत्येक नए शिक्षा सत्र में निजी शिक्षण संस्थान 25 प्रतिशत प्रवेश आरटीई के तहत अपवंचित वर्ग के बच्चों को देते हैं। इनका शुल्क विद्यालय की उच्च कक्षा तक सरकार द्वारा वहन किया जाता है। प्रधानाचार्यों ने बीईओ को ज्ञापन देकर समय पर शुल्क का भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही बताया कि बकाया शुल्क का भुगतान नहीं होने पर नए शिक्षा सत्र में आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में सोमदत्त त्यागी, आशीष राजपाल, आलोक विरमानी, ले. कर्नल कादिर हुसैन, मंजुलिका माथुर आदि शामिल रहे।
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समय पर बजट नहीं मिलने से स्कूलों को आरटीई के तहत शुल्क नहीं दिया जा सका है। नए शिक्षा सत्र में समय से बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
- शिव प्रसाद खाली, अपर शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा गढ़वाल मंडल
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का शुल्क जमा नहीं हुआ तो नए शिक्षा सत्र से उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सहोदय अंतर विद्यालय संगठन विकासनगर का कहना है कि कुछ स्कूलों को पिछले तीन साल से शुल्क नहीं मिला है। यही हाल रहा तो नए शिक्षा सत्र से आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे।
आरटीई के तहत स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के शुल्क को लेकर खंड शिक्षा अधिकारी बीपी सिंह से मिले संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्ष 2016 से सरकार द्वारा शुल्क का भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। जबकि, कुछ विद्यालयों को तीन साल से शुल्क नहीं मिला है। समय पर शुल्क का भुगतान नहीं होने से निजी शिक्षण संस्थान आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। बीईओ से मिले प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि प्रत्येक नए शिक्षा सत्र में निजी शिक्षण संस्थान 25 प्रतिशत प्रवेश आरटीई के तहत अपवंचित वर्ग के बच्चों को देते हैं। इनका शुल्क विद्यालय की उच्च कक्षा तक सरकार द्वारा वहन किया जाता है। प्रधानाचार्यों ने बीईओ को ज्ञापन देकर समय पर शुल्क का भुगतान कराने की मांग की है। साथ ही बताया कि बकाया शुल्क का भुगतान नहीं होने पर नए शिक्षा सत्र में आरटीई के तहत प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे। ज्ञापन देने वालों में सोमदत्त त्यागी, आशीष राजपाल, आलोक विरमानी, ले. कर्नल कादिर हुसैन, मंजुलिका माथुर आदि शामिल रहे।
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समय पर बजट नहीं मिलने से स्कूलों को आरटीई के तहत शुल्क नहीं दिया जा सका है। नए शिक्षा सत्र में समय से बजट उपलब्ध कराया जाएगा।
- शिव प्रसाद खाली, अपर शिक्षा निदेशक, बेसिक शिक्षा गढ़वाल मंडल