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महिलाओं ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य
Updated Wed, 14 Nov 2018 12:46 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
छठ मैया के गीत गाते हुए और दीप जलाकर हजारों पूर्वांचल की व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के दर्जनों घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं ने गंगा में पूजा अर्चना की और सूर्य को अर्घ्य दिया। शाम को घाटों पर जमकर आतिशबाजी की गई।
सोमवार की शाम से निर्जल व्रत रखने वाले हजारों महिलाओं और पुरुषों ने मंगलवार को तीसरे पहर गंगा की घाटों की तरफ उमड़े । हरकी पैड़ी पर भव्य पंडाल सजाया गया था। हरकी पैड़ी के साथ-साथ मलवीय द्वीप, सुभाष घाट, रोडी बेलवाला घाट, कुशा घाट, विष्णु घाट, विश्वकर्मा घाट, ऋषिकुल घाट, सिंहद्वार घाट, कबीर घाट, खन्ना नगर घाट, प्रेम नगर आश्रम घाट, ज्वालापुर के दुर्गा घाट, सीता घाट, वाल्मीकि घाट, रविदास घाट, कनखल के दक्ष घाट, सतीघाट, उत्तरी हरिद्वार के परमार्थ घाट, अग्रसेन घाट, सर्वानंद घाट आदि पर छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। इन घाटों पर छठ मैया के गीत गाते हुए श्रद्धालु आस्था के साथ चल रहे थे। आने वाले के सिर पर डाले रखे हुए थे। घाट पर पहुंचकर सभी ने गंगा स्नान किया। मिट्टी की वेदी बनाकर छठी मैया का गीतों के माध्यम से आह्वान किया। घाटों पर ही उनका पूजा किया गया। सूर्य के अस्त होने की प्रतीक्षा में तमाम घाटों पर गीतों की गंगा बहती रही। व्रती श्रद्धालुओं ने अस्त होते सूर्य को गंगा कमर तक भीगकर अर्घ्य अर्पित किया। गंगा जल के साथ-साथ सूर्य देव को दूध भी अर्पित किया गया। फलों के डाले लिए व्रती श्रद्धालु गंगा जल में परिक्रमा कर रहे थे। जैसे-जैसे सूर्य देव ने अस्त होना शुुरू किया, गीतों का वेग बढ़ता चला गया। सभी घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए डाले और टोकरे सजाए गए थे। ईख लगाकर डालों के दोनों ओर छोटे-छोटे द्वार बनाए गए। मंगलवार की सारी रात गीतों में बीतेगी। सवेरे चार बजे से श्रद्धालु गंगा के उन्हीं तटों पर पहुंचने लगेंगे। उगते सूर्य अर्घ्य प्रदान करने के बाद चार दिन लंबे इस पर्व का समापन होगा।
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छठ मैया के गीत गाते हुए और दीप जलाकर हजारों पूर्वांचल की व्रती महिलाओं ने अस्त होते सूर्य को अर्घ्य प्रदान किया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के दर्जनों घाटों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। महिलाओं ने गंगा में पूजा अर्चना की और सूर्य को अर्घ्य दिया। शाम को घाटों पर जमकर आतिशबाजी की गई।
सोमवार की शाम से निर्जल व्रत रखने वाले हजारों महिलाओं और पुरुषों ने मंगलवार को तीसरे पहर गंगा की घाटों की तरफ उमड़े । हरकी पैड़ी पर भव्य पंडाल सजाया गया था। हरकी पैड़ी के साथ-साथ मलवीय द्वीप, सुभाष घाट, रोडी बेलवाला घाट, कुशा घाट, विष्णु घाट, विश्वकर्मा घाट, ऋषिकुल घाट, सिंहद्वार घाट, कबीर घाट, खन्ना नगर घाट, प्रेम नगर आश्रम घाट, ज्वालापुर के दुर्गा घाट, सीता घाट, वाल्मीकि घाट, रविदास घाट, कनखल के दक्ष घाट, सतीघाट, उत्तरी हरिद्वार के परमार्थ घाट, अग्रसेन घाट, सर्वानंद घाट आदि पर छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। इन घाटों पर छठ मैया के गीत गाते हुए श्रद्धालु आस्था के साथ चल रहे थे। आने वाले के सिर पर डाले रखे हुए थे। घाट पर पहुंचकर सभी ने गंगा स्नान किया। मिट्टी की वेदी बनाकर छठी मैया का गीतों के माध्यम से आह्वान किया। घाटों पर ही उनका पूजा किया गया। सूर्य के अस्त होने की प्रतीक्षा में तमाम घाटों पर गीतों की गंगा बहती रही। व्रती श्रद्धालुओं ने अस्त होते सूर्य को गंगा कमर तक भीगकर अर्घ्य अर्पित किया। गंगा जल के साथ-साथ सूर्य देव को दूध भी अर्पित किया गया। फलों के डाले लिए व्रती श्रद्धालु गंगा जल में परिक्रमा कर रहे थे। जैसे-जैसे सूर्य देव ने अस्त होना शुुरू किया, गीतों का वेग बढ़ता चला गया। सभी घाटों पर श्रद्धालुओं द्वारा लाए गए डाले और टोकरे सजाए गए थे। ईख लगाकर डालों के दोनों ओर छोटे-छोटे द्वार बनाए गए। मंगलवार की सारी रात गीतों में बीतेगी। सवेरे चार बजे से श्रद्धालु गंगा के उन्हीं तटों पर पहुंचने लगेंगे। उगते सूर्य अर्घ्य प्रदान करने के बाद चार दिन लंबे इस पर्व का समापन होगा।
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