फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   जान पर भारी पड़ सकते हैं सड़कों पर रखे जनरेटर

जान पर भारी पड़ सकते हैं सड़कों पर रखे जनरेटर

Sun, 08 Jul 2018 11:56 PM IST
Updated Sun, 08 Jul 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
जान पर भारी पड़ सकते हैं सड़कों पर रखे जनरेटर
रुड़की। बैंकों और मॉल के बाहर सड़कों पर रखे गए जनरेटर और डीजी (डीजल जनरेटर) सेट लोगों की जान पर भारी पड़ सकते हैं। इन्हें स्थापित करने के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है। कई जनरेटर ऐसे लगे हैं, जिन्होंने विद्युत सुरक्षा विभाग से जांच तक नहीं करवाई। विभागीय अधिकारी ऐसे संचालकों के खिलाफ अभियान चलाने जा रहा है।
विज्ञापन

शहर में डाकघर के सामने, बैंकों के बाहर, मलकपुर चुंगी स्थित वीटू शोरूम, मालवीय चौक स्थित कर्नाटका बैंक, सिविल लाइन में यूनियन बैंक, निजी अस्पतालों, देहरादून हाईवे पर गणेशपुर स्थित निजी बैंकों के बाहर जनरेटर/डीजी सेट लगे हुए हैं, लेकिन संबंधित बैंकों और संस्थाओं की ओर से इनमें सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। जिले में जनरेटर/डीजी सेट के करंट से कई दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी सुरक्षा मानकों को लेकर न बैंक प्रबंधक गंभीर है और न प्रशासन।
विज्ञापन

नियमानुसार जनरेटरों की अर्थिंग करना जरूरी होता है। इसमें दो अर्थिंग जनरेटर/डीजी सेट की बॉडी और दो अर्थिंग इसके न्यूटल की अलग होनी चाहिए, लेकिन अधिकांश बैंक प्रबंधन और ठेकेदार खर्च से बचने के लिए एक गड्ढ़े में अर्थिंग कराकर अपने काम की इतिश्री कर देते हैं। इससे जनरेटर/डीजी सेट का करंट बिजली की न्यूटल वाली लाइन में प्रवाहित हो जाता है। इससे कई बार कर्मचारी या राहगीर करंट लगने से झुलस जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं लगाते चेंज ओवर
नियमानुसार किसी संस्थान में डीजी सेट स्थापित करने पर वहां पर चेंज ओवर लगाया जाना चाहिए, लेकिन बैंक, मॉल प्रबधंक और ठेकेदार कुछ पैसों के लालच के लिए इसे नहीं लगाते। इससे कई बार जनरेटर/डीजी सेट का करंट बिजली के खंभे तक पहुंच जाता है। आगे जाकर 440 वोल्ट का करंट 11 हजार वोल्ट की लाइन तक पहुंच जाता है। इससे कई बार कर्मचारी करंट लगने से झुलस जाते हैं।
350 फैक्ट्रियां, 30 डीजी सेट लगाने की एनओसी
भगवानपुर। क्षेत्र के पुहाना, भगवानपुर, रायपुर, लकेसरी औद्योगिक क्षेत्र में वर्तमान में छोटी-बड़ी करीब 350 फैक्ट्रियों में उत्पादन हो रहा है। इनमें से अधिकतर में जनरेटर/डीजी सेट लगाए गए हैं, लेकिन मात्र 30 फैक्ट्री प्रबंधकों ने ही डीजी सेट लगाने की एनओसी ले रखी है। यहीं हाल हरिद्वार में सिडकुल का है। यहां 600 फैक्ट्रियों में से अधिकतर छोटी फैक्ट्रियों में डीजी सेट लगाए गए हैं, लेकिन विद्युत सुरक्षा विभाग से इन्हें लगाने की अनुमति और सुरक्षा मानकों की जांच नहीं कराई गई है। यहां भी सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। जनरेटर/डीजी सेट लगाने की अनुमति न लेने से विद्युत सुरक्षा विभाग को राजस्व की भी चपत लग रही है।
दो पैसे प्रति यूनिट देनी पड़ती है इलेक्ट्रिक सिटी ड्यूटी
किसी भी संस्थान में लगे जनरेटर से जितनी यूनिट बिजली खर्च होगी, दो पैसा प्रति यूनिट की दर से इलेक्ट्रिक सिटी ड्यूटी शुल्क विद्युत सुरक्षा विभाग के कार्यालय में जमा करना होता है, लेकिन जिले में बड़ी फैक्ट्रियों को छोड़ दिया जाए तो कोई भी इलेक्ट्रिक सिटी ड्यूटी शुल्क जमा नहीं कराते। इससे हर वर्ष प्रदेश सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है। बैंक और मॉल प्रबंधन भी इस ओर ध्यान नहीं देते।
शटडाउन लेने के बाद भी लगा करंट
कई बार शटडाउन लेने के बाद भी लाइन पर काम करते समय लाइनमैन करंट से झुलस जाते हैं। इनमें प्रमुख घटनाएं निम् न हैं।
>> जून 2015: बहादराबाद औद्योगिक क्षेत्र में एक फैक्ट्री के बिजली के कनेक्शन की केबिल ठीक करने के लिए खंभे पर चढ़े लाइनमैन की करंट लगने से मौत हो गई थी। जांच में फैक्ट्री के अंदर लगा जनरेटर/डीजी सेट का करंट मौत का कारण बना था।
>> सितंबर 2015: हरिद्वार के रानीपुर मोड स्थित बैंक ऑफ बड़ोदा के बाहर लगे डीजी सेट के करंट से नगर निगम के कर्मचारी की मौत हो गई थी।
>> 15 मई 2018: खानपुर क्षेत्र में लालपुर के पास महाराजपुर निवासी जग्गू (46) हाईटेंशन लाइन की टूटी तारों को जोड़ रहा था, शटडाउन लेने के बाद भी करंट लग गया था।
>> 07 जून 2018: खानपुर क्षेत्र में रहीमपुर गांव के पास हाईटेंशन लाइन ठीक कर रहे लाइनमैन पवन (34) लक्सरी निवासी की मौत हो गई थी।
>> मई 2018: भगवानपुर क्षेत्र के डाडा जलालपुर बिजलीघर के पास फाल्ट ठीक कर रहे लाइनमैन पप्पू (38) की करंट लगने से मौत हो गई थी। यहां भी शटडाउन लेने के बाद लाइन में करंट दौड़ रहा था।

---
शहर की कई दुकानों, बैंकों और मॉल के बाहर लगे जनरेटरों से जनहानि हो सकती है। इन जनरेटरों के संचालक इलेक्ट्रिक सिटी ड्यूटी भी जमा नहीं कर रहे हैं। यहीं हाल फैक्ट्रियों का भी है। अधिकांश फैक्ट्री प्रबंधक जनरेटर लगाने के लिए अनुमति नहीं लेते न ही इलेक्ट्रिक सिटी ड्यूटी जमा कर रहे हैं। ऐसे संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखा जाएगा। जल्द अभियान चलाया जाएगा।
राजेंद्र प्रसाद कोटनाला, विद्युत सुरक्षा अधिकारी रुड़की
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed