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कल से तीन दिन बंद रहेंगे ग्रामीण बैंक
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
सात सूत्री मांगों के पूरा न होने पर सोमवार से ग्रामीण बैंक के कर्मचारी तीन दिन हड़ताल पर रहेंगे। कर्मियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश में ग्रामीण बैंक की 283 शाखाओं में कामकाज ठप रहेगा।
उत्तराखंड ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष भुवनेंद्र बिष्ट ने बताया कि बैंक के कर्मचारी बैंक में प्राइवेटाइजेशन न लागू करने, सरकारी शेयर न घटाने, पेंशन के मुद्दे आदि की मांगें पूरी न होने को लेकर तीन दिन तक हड़ताल पर रहेंगे। बताया कि बैंक कर्मी काफी दिन से मांगों को लेकर आंदोलनरत है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वित्त मंत्रालय, केंद्रीय श्रमायुक्त (सी) व क्षेेत्रीय श्रमायुक्त (सी) से कई बार बातचीत के बाद भी सहमति के बिंदुओं को लागू नहीं किया गया है। बताया कि राज्य में ग्रामीण बैंक की 283 शाखाएं हैं, जिसमें करीब 1100 कर्मचारी कार्यरत हैं।
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बैंक कर्मियों की सात सूत्री मांगें
1. भारत सरकार द्वारा कर्नाटक व राजस्थान उच्च न्यायालयों के निर्णयों के खिलाफ दायर एसएलपी सिविल (मिस.) 39288/12 को वापस लेकर बैंकिंग पेंशन समानता को लागू करने का मार्ग प्रशस्त कर 30,000 रिटायर्ड एवं 35000 रिटायर होने वाले स्टाफ को लाभ दिया जाए।
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2. ग्रामीण बैंकों के निजीकरण व पब्लिक इश्यू के प्रस्ताव वापस लिए जाएं।
3. अनुकंपा नियुक्तियों की सुविधा अगस्त 2014 से लागू हों।
4. बैकिंग उद्योग की तर्ज पर कंप्यूटर इंक्रीमेंट की सुविधा प्रदान की जाए।
5. प्रायोजक बैंकों की तरह सेवा शर्तें, जिसमें वेतन, भत्ते, अन्य लाभ, अवकाश नियम, प्रोन्नति और भर्ती नियम, अनुशासनात्मक व सेवानिवृत्ति शर्तें समान रूप से लागू की जाए।
6. प्रायोजक बैंकों के अनुसार ही दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम भुगतान सीमा, अन्य संबंधित सुविधाएं तथा लंबित नियमितीकरण लागू किया जाए।
7. प्रायोजक बैंकों के साथ ही ग्रामीण बैंकों को भी आईबीए (भारतीय बैंकर्स संघ) के साथ वार्ता मंच में शामिल किया जाए।
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सात सूत्री मांगों के पूरा न होने पर सोमवार से ग्रामीण बैंक के कर्मचारी तीन दिन हड़ताल पर रहेंगे। कर्मियों के हड़ताल पर जाने से प्रदेश में ग्रामीण बैंक की 283 शाखाओं में कामकाज ठप रहेगा।
उत्तराखंड ग्रामीण बैंक अधिकारी संगठन के पूर्व अध्यक्ष भुवनेंद्र बिष्ट ने बताया कि बैंक के कर्मचारी बैंक में प्राइवेटाइजेशन न लागू करने, सरकारी शेयर न घटाने, पेंशन के मुद्दे आदि की मांगें पूरी न होने को लेकर तीन दिन तक हड़ताल पर रहेंगे। बताया कि बैंक कर्मी काफी दिन से मांगों को लेकर आंदोलनरत है, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। वित्त मंत्रालय, केंद्रीय श्रमायुक्त (सी) व क्षेेत्रीय श्रमायुक्त (सी) से कई बार बातचीत के बाद भी सहमति के बिंदुओं को लागू नहीं किया गया है। बताया कि राज्य में ग्रामीण बैंक की 283 शाखाएं हैं, जिसमें करीब 1100 कर्मचारी कार्यरत हैं।
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बैंक कर्मियों की सात सूत्री मांगें
1. भारत सरकार द्वारा कर्नाटक व राजस्थान उच्च न्यायालयों के निर्णयों के खिलाफ दायर एसएलपी सिविल (मिस.) 39288/12 को वापस लेकर बैंकिंग पेंशन समानता को लागू करने का मार्ग प्रशस्त कर 30,000 रिटायर्ड एवं 35000 रिटायर होने वाले स्टाफ को लाभ दिया जाए।
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2. ग्रामीण बैंकों के निजीकरण व पब्लिक इश्यू के प्रस्ताव वापस लिए जाएं।
3. अनुकंपा नियुक्तियों की सुविधा अगस्त 2014 से लागू हों।
4. बैकिंग उद्योग की तर्ज पर कंप्यूटर इंक्रीमेंट की सुविधा प्रदान की जाए।
5. प्रायोजक बैंकों की तरह सेवा शर्तें, जिसमें वेतन, भत्ते, अन्य लाभ, अवकाश नियम, प्रोन्नति और भर्ती नियम, अनुशासनात्मक व सेवानिवृत्ति शर्तें समान रूप से लागू की जाए।
6. प्रायोजक बैंकों के अनुसार ही दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए न्यूनतम भुगतान सीमा, अन्य संबंधित सुविधाएं तथा लंबित नियमितीकरण लागू किया जाए।
7. प्रायोजक बैंकों के साथ ही ग्रामीण बैंकों को भी आईबीए (भारतीय बैंकर्स संघ) के साथ वार्ता मंच में शामिल किया जाए।