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बीमा कंपनी अधिकारी ने पेश की ईमानदारी की अनूठी मिसाल , चाय अधिकारी का लैपटाप, नकदी से भरा बैग लौटाया
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ब्यूरो/अमर उजाला।
देहरादून। ईमानदारी आज भी जिंदा है। ओरिएंटल बीमा कंपनी के अधिकारी ने चाय बागान अधिकारी का ट्रेन में छूटा लैपटाप, पासपोर्ट और नकदी से भरा बैग लौटा दिया।
दून के डिफेंस कालोनी निवासी अरविंद कपूर डिब्रूगढ़ (असम) जिले के चाबुआ में चाय बागान में महाप्रबंधक हैं। रविवार रात वह नंदा देवी एक्सप्रेस से दिल्ली से देहरादून आ रहे थेे। सुबह जैसे ही ट्रेन देहरादून पहुंची तो यात्रियाें में उतरने के लिए होड़ मच गई। इसी बीच अरविंद एक बुजुर्ग महिला की मदद करने लगे। लेकिन, इस दौरान वह बैग उठाना भूल गए और सीधे ऑटो पकड़कर घर निकल लिए। आधे रास्ते में उन्हें बैग की याद आई तो वह स्टेशन पहुंचे। बोगी में जाकर देखा तो बैग नदारद था। पुलिस को तहरीर देकर वह घर चले आए। इसी बीच उन्हें बीमा कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी महिंद्रपाल सिंह का फोन आया कि उनका बैग उनके पास है, वह आकर ले जाएं।
हुआ यूं की बीमा कंपनी अधिकारी अरुण यादव भी इसी ट्रेन में सफर कर रहे थे। वह ट्रेन से उतरने वाले अंतिम यात्री थे। उन्होंने देखा कि किसी यात्री का बैग सीट पर पड़ा है। पहले तो वह बैग लेकर स्टेशन पर इंतजार करते रहे। लेकिन, जब कोई नहीं आया तो वह बैग लेकर अपने कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने घटना की जानकारी अपने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी महिंद्रपाल सिंह को दी। दोनों अधिकारियों ने पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क कर अरविंद कपूर का मोबाइल नंबर लिया और फोन कर उन्हें बैग की जानकारी दी। सूचना पर अरविंद कपूर पत्नी के साथ कार्यालय पहुंचे और बैग ले लिया।
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देहरादून। ईमानदारी आज भी जिंदा है। ओरिएंटल बीमा कंपनी के अधिकारी ने चाय बागान अधिकारी का ट्रेन में छूटा लैपटाप, पासपोर्ट और नकदी से भरा बैग लौटा दिया।
दून के डिफेंस कालोनी निवासी अरविंद कपूर डिब्रूगढ़ (असम) जिले के चाबुआ में चाय बागान में महाप्रबंधक हैं। रविवार रात वह नंदा देवी एक्सप्रेस से दिल्ली से देहरादून आ रहे थेे। सुबह जैसे ही ट्रेन देहरादून पहुंची तो यात्रियाें में उतरने के लिए होड़ मच गई। इसी बीच अरविंद एक बुजुर्ग महिला की मदद करने लगे। लेकिन, इस दौरान वह बैग उठाना भूल गए और सीधे ऑटो पकड़कर घर निकल लिए। आधे रास्ते में उन्हें बैग की याद आई तो वह स्टेशन पहुंचे। बोगी में जाकर देखा तो बैग नदारद था। पुलिस को तहरीर देकर वह घर चले आए। इसी बीच उन्हें बीमा कंपनी के प्रशासनिक अधिकारी महिंद्रपाल सिंह का फोन आया कि उनका बैग उनके पास है, वह आकर ले जाएं।
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हुआ यूं की बीमा कंपनी अधिकारी अरुण यादव भी इसी ट्रेन में सफर कर रहे थे। वह ट्रेन से उतरने वाले अंतिम यात्री थे। उन्होंने देखा कि किसी यात्री का बैग सीट पर पड़ा है। पहले तो वह बैग लेकर स्टेशन पर इंतजार करते रहे। लेकिन, जब कोई नहीं आया तो वह बैग लेकर अपने कार्यालय पहुंच गए। उन्होंने घटना की जानकारी अपने मुख्य प्रशासनिक अधिकारी महिंद्रपाल सिंह को दी। दोनों अधिकारियों ने पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क कर अरविंद कपूर का मोबाइल नंबर लिया और फोन कर उन्हें बैग की जानकारी दी। सूचना पर अरविंद कपूर पत्नी के साथ कार्यालय पहुंचे और बैग ले लिया।
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