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अपनी ही सरकार के अभियान के खिलाफ उतरे विधायक

Sun, 15 Jul 2018 02:24 AM IST
Updated Sun, 15 Jul 2018 02:24 AM IST
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अपनी ही सरकार के अभियान के खिलाफ उतरे विधायक
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून।
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अतिक्रमण अभियान को लेकर भाजपा विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हो गए हैं। विधायकों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मुलाकात कर अतिक्रमण चिह्निकरण व ध्वस्तीकरण में मनमानी का आरोप लगाया है। उन्होंने बड़े और पहुंच वालों के अतिक्रमण पर कार्रवाई न किए जाने का आरोप लगाया।
सत्ता पक्ष के विधायकों की शिकायत पर मुख्यमंत्री ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट की अतिक्रमण हटाने की समय सीमा बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला हो चुका है। साथ ही सीएम ने अतिक्रमण हटाने में किसी तरह का पक्षपात नहीं करने के बाबत अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर सवाल उठ रहा है कि सीएम का यह रुख तो ठीक है, लेकिन उनके ही विधायकों-मंत्रियों को इस तरह खुलकर सामने आना पड़ा, इसकी नौबत आई क्यों ?
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विधायकों ने मुख्यमंत्री से कहा कि पुराने भवनों पर मनमानी से चिह्निकरण किया जा रहा है। कुछ बड़े लोगों के अतिक्रमण चिह्नित नहीं किए जा रहे हैं। चिह्निकरण और ध्वस्तीकरण में पिक एंड चूज किया जा रहा है। इसमें छोटे लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।
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-धन सिंह रावत, राज्य मंत्री, उत्तराखंड
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बड़े स्तर के अधिकारियों के अतिक्रमण को छोड़ दिया जा रहा है। कई जगह बड़े अधिकारियों के यहां लगाए निशान मिटा दिए या आगे-पीछे कर दिए। सीएम ने तत्काल अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिक्रमण हटाने में किसी तरह का पक्षपात नहीं होना चाहिए।
-खजान दास, विधायक, राजपुर रोड
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अतिक्रमण हटाने के दौरान मनमानी की जा रही है। हमने इस मामले को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने उठाया है। अभियान में दो अलग-अलग तरह के नियम नहीं चल सकते। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि अधिकारियों को किसी भी तरह का भेदभाव नहीं करने दिया जाएगा।

-उमेश शर्मा, विधायक, रायपुर
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नापने वाले अपनी मनमर्जी कर रहे हैं। मेरे घर से पहले एक आदमी रहता है, वह नापने वाले का दोस्त है। उसे छोड़ दिया गया। कैनाल रोड पर पहले नहर चलती थी, वहां भवन बनाने और नक्शा पास करने के लिए पहले सिंचाई विभाग से एनओसी लेनी पड़ती थी। अब सिंचाई विभाग की एनओसी को नहीं माना जा रहा है।
-गणेश जोशी, विधायक, मसूरी
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