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बगैर नोटिस के नौकरी से हटाया
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:19 PM IST
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पौड़ी (ब्यूरो)। चार साल से ग्रामीणों को स्वरोजगार के प्रति जागरूक कर प्रशिक्षण दे रहे युवाओं के सम्मुख रोजी रोटी का संकट गहराने लगा है। युवाओं का आरोप है कि उन्हें बगैर किसी कारण व नोटिस के नौकरी से निकाल दिया गया है।
भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान पौड़ी में संविदा पर कार्यरत तीन लोगों को हटा दिया गया है। यहां चार साल पूर्व एक कंपनी की ओर से पांच युवाओं को संविदा के आधार पर विभिन्न पदों पर नियुक्ति दी गई थी। ग्राम्य विकास मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना के तहत युवा ग्रामीणों को स्वरोजगार के प्रति जागरूक कर उन्हें प्रशिक्षण देने का काम सकते थे। युवाओं की चार साल की सेवा के बाद उन्हें 30 जून को नौकरी से हटा दिया गया है। युवा आनंद सिंह रावत, संजय ममगाईं व कुलदीप सिंह ने मामले में डीएम से न्याय की गुहार लगाई है। कहा कि उन्हें बगैर किसी कारण व सूचना/नोटिस के नौकरी से हटा दिया गया है, जबकि उनके साथ पूर्व में तैनात दो लोगों को नौकरी पर रखा गया है। आरोप लगाया कि आरसीटी के निदेशक पौड़ी की ओर से इन पदों पर अपने चहेतों को नियुक्त करने के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी के साथ मिलकर उन्हें नौकरी से निकाला गया है। कहा कि उनकी जगह एक ऐसे युवा को रखा गया है जोकि यहां की बोली भाषा तक नही जानता। वहीं आरसीटी के निदेशक भागवत सिंह मर्तोलिया का कहना कि कर्मी सेवा प्रदाता एजेंसी की ओर से संविदा पर रखे गए थे। अब एजेंसी दूसरी फर्म को जाने से वर्तमान सेवा प्रदाता एजेंसी ने कर्मियों को नौकरी से हटा दिया है। इसमें आरसीटी का कोई रोल नहीं है।
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भारतीय स्टेट बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान पौड़ी में संविदा पर कार्यरत तीन लोगों को हटा दिया गया है। यहां चार साल पूर्व एक कंपनी की ओर से पांच युवाओं को संविदा के आधार पर विभिन्न पदों पर नियुक्ति दी गई थी। ग्राम्य विकास मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना के तहत युवा ग्रामीणों को स्वरोजगार के प्रति जागरूक कर उन्हें प्रशिक्षण देने का काम सकते थे। युवाओं की चार साल की सेवा के बाद उन्हें 30 जून को नौकरी से हटा दिया गया है। युवा आनंद सिंह रावत, संजय ममगाईं व कुलदीप सिंह ने मामले में डीएम से न्याय की गुहार लगाई है। कहा कि उन्हें बगैर किसी कारण व सूचना/नोटिस के नौकरी से हटा दिया गया है, जबकि उनके साथ पूर्व में तैनात दो लोगों को नौकरी पर रखा गया है। आरोप लगाया कि आरसीटी के निदेशक पौड़ी की ओर से इन पदों पर अपने चहेतों को नियुक्त करने के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी के साथ मिलकर उन्हें नौकरी से निकाला गया है। कहा कि उनकी जगह एक ऐसे युवा को रखा गया है जोकि यहां की बोली भाषा तक नही जानता। वहीं आरसीटी के निदेशक भागवत सिंह मर्तोलिया का कहना कि कर्मी सेवा प्रदाता एजेंसी की ओर से संविदा पर रखे गए थे। अब एजेंसी दूसरी फर्म को जाने से वर्तमान सेवा प्रदाता एजेंसी ने कर्मियों को नौकरी से हटा दिया है। इसमें आरसीटी का कोई रोल नहीं है।
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