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गोवा और महाराष्ट्र का मॉडल अपना सकता है उतराखंड
Updated Fri, 30 Jun 2017 10:15 PM IST
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कोटद्वार। देश के समृद्ध राज्य गोवा और महाराष्ट्र के विकास मॉडल को अपनाकर नवोदित राज्य उत्तराखंड अपनी आर्थिकी को नए आयाम प्रदान कर सकता है। हिमालयी धरोहर अध्ययन केंद्र के निदेशक डा. पदमेश बुड़ाकोटी की अगुवाई वाली टीम ने गोवा व महाराष्ट्र की यात्रा से लौटने के बाद यहां जारी अध्ययन रिपोर्ट में यह जानकारी दी है।
अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के बाद गोवा व महाराष्ट्र राज्यों ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं, जो कि उत्तराखंड सहित सभी नवोदित राज्यों के लिए प्रेरक हैं। गोवा को वर्ष 1961 में पुर्तगाली शासन से मुक्ति मिली और अल्प समय में ही यह राज्य देशी-विदेशी पर्यटन के क्षेत्र में संपूर्ण भारत में सिरमौर बन गया। पर्यटन के अलावा इस राज्य ने कैश क्रॉप्स काजू, सुपारी, नारियल व विभिन्न प्रकार के मसालों की खेती में अव्वल स्थान प्राप्त किया है। ईमानदार व कारगर शासन व्यवस्था से गोवा तेजी से आगे बढ़ रहा है।
महाराष्ट्र की अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्कन पठार में स्थित महाराष्ट्र राज्य का अधिकतर भू-भाग पर्वतीय व पठारी है, जो उत्तराखंड से काफी मेल खाता है। इस राज्य ने बेहतर नियोजन व विकास कार्यक्रमों द्वारा पर्वतीय-पठारी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत स्थापित किए हैं, जिनमें सौर ऊर्जा व पवन चक्की मुख्य हैं। महाराष्ट्र की तर्ज पर उत्तराखंड में भी साफ मौसम व हवा की पर्याप्तता के चलते यह उपक्रम प्रभावी हो सकते हैं।
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गोवा व महाराष्ट्र का भ्रमण करने निकले डा. बुड़ाकोटी के साथ अध्ययन टीम में गढ़वाल भातृ मंडल मुंबई के महासचिव रमण कुकरेती, आशीष भंडारी, पुणे से आईटी विशेषज्ञ अंकित शर्मा व नेहा शर्मा, मुंबई से महेश्वर कुकरेती, कोटद्वार से शिक्षिका नमिता, डा. विवेक कुमार आदि शामिल थे।
अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि आजादी के बाद गोवा व महाराष्ट्र राज्यों ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं, जो कि उत्तराखंड सहित सभी नवोदित राज्यों के लिए प्रेरक हैं। गोवा को वर्ष 1961 में पुर्तगाली शासन से मुक्ति मिली और अल्प समय में ही यह राज्य देशी-विदेशी पर्यटन के क्षेत्र में संपूर्ण भारत में सिरमौर बन गया। पर्यटन के अलावा इस राज्य ने कैश क्रॉप्स काजू, सुपारी, नारियल व विभिन्न प्रकार के मसालों की खेती में अव्वल स्थान प्राप्त किया है। ईमानदार व कारगर शासन व्यवस्था से गोवा तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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महाराष्ट्र की अध्ययन रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्कन पठार में स्थित महाराष्ट्र राज्य का अधिकतर भू-भाग पर्वतीय व पठारी है, जो उत्तराखंड से काफी मेल खाता है। इस राज्य ने बेहतर नियोजन व विकास कार्यक्रमों द्वारा पर्वतीय-पठारी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में गैर परंपरागत ऊर्जा स्रोत स्थापित किए हैं, जिनमें सौर ऊर्जा व पवन चक्की मुख्य हैं। महाराष्ट्र की तर्ज पर उत्तराखंड में भी साफ मौसम व हवा की पर्याप्तता के चलते यह उपक्रम प्रभावी हो सकते हैं।
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गोवा व महाराष्ट्र का भ्रमण करने निकले डा. बुड़ाकोटी के साथ अध्ययन टीम में गढ़वाल भातृ मंडल मुंबई के महासचिव रमण कुकरेती, आशीष भंडारी, पुणे से आईटी विशेषज्ञ अंकित शर्मा व नेहा शर्मा, मुंबई से महेश्वर कुकरेती, कोटद्वार से शिक्षिका नमिता, डा. विवेक कुमार आदि शामिल थे।