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मजदूरों के अधिकार छीन रही सरकार
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मजदूरों के अधिकार छीन रही सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन समन्वय समिति ने श्रम कानूनों में किए जा रहे संशोधनों के विरोध में आठ जनवरी से प्रस्तावित दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने का एलान किया है। समन्वय समिति के प्रांतीय अध्यक्ष व इंटक के प्रांतीय अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार श्रम कानूनों में संशोधन कर मजदूर वर्ग के अधिकारों को छीन रही है। श्रम कानूनों में संशोधन के नाम पर बड़े औद्योगिक घरानाें को फायदा पहुंचाने के लिए ये बदलाव किए जा रहे हैं।
पूर्व मंत्री व इंटक नेता ने कहा कि इस संबंध में 12 सूत्री मांगपत्र केंद्र सरकार को भेजा गया था लेकिन सरकार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार देश के सबसे बड़े मजदूर संगठन इंटक को अंतरराष्ट्रीय मंच समेत सभी त्रिपक्षीय व द्विपक्षीय कमेटियों में शामिल करने से वंचित कर रही है। राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश के अधिसूचित उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए गठित न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड में श्रम संघों से मात्र भारतीय मजदूर संघ को ही शामिल किया जबकि इंटक, एटक व सीटू जैसे श्रम संगठनों को शामिल नहीं किया गया। सरकार समान कार्य के लिए समान वेतन पर अदालत के आदेश को लागू करने से इनकार कर रही है।
सरकार विद्युत संशोधन बिल 2003 में संशोधन करके ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के हाथों में देने की तैयारी कर रही है। देश के बिजली बोर्डों को घाटे के कारण तोड़कर निगमों में तब्दील किया गया। उस समय 25000 करोड़ का घाटा था जो आज बढ़कर 10 लाख करोड़ से भी अधिक हो गया है।
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पत्रकार वार्ता में सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र भंडारी, उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंहदीरत्ता, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, ओपी सूद, धीरज भंडारी, दीपक शर्मा, सुरेंद्र सिंह नेगी, अनिल उनियाल, सोहन सिंह रजवार समेत कई उपस्थित थे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन समन्वय समिति ने श्रम कानूनों में किए जा रहे संशोधनों के विरोध में आठ जनवरी से प्रस्तावित दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल में शामिल होने का एलान किया है। समन्वय समिति के प्रांतीय अध्यक्ष व इंटक के प्रांतीय अध्यक्ष हीरा सिंह बिष्ट ने पत्रकार वार्ता में कहा कि सरकार श्रम कानूनों में संशोधन कर मजदूर वर्ग के अधिकारों को छीन रही है। श्रम कानूनों में संशोधन के नाम पर बड़े औद्योगिक घरानाें को फायदा पहुंचाने के लिए ये बदलाव किए जा रहे हैं।
पूर्व मंत्री व इंटक नेता ने कहा कि इस संबंध में 12 सूत्री मांगपत्र केंद्र सरकार को भेजा गया था लेकिन सरकार ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार देश के सबसे बड़े मजदूर संगठन इंटक को अंतरराष्ट्रीय मंच समेत सभी त्रिपक्षीय व द्विपक्षीय कमेटियों में शामिल करने से वंचित कर रही है। राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने प्रदेश के अधिसूचित उद्योगों में काम करने वाले श्रमिकों को न्यूनतम वेतन पुनरीक्षण के लिए गठित न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड में श्रम संघों से मात्र भारतीय मजदूर संघ को ही शामिल किया जबकि इंटक, एटक व सीटू जैसे श्रम संगठनों को शामिल नहीं किया गया। सरकार समान कार्य के लिए समान वेतन पर अदालत के आदेश को लागू करने से इनकार कर रही है।
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सरकार विद्युत संशोधन बिल 2003 में संशोधन करके ऊर्जा क्षेत्र को निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनियों के हाथों में देने की तैयारी कर रही है। देश के बिजली बोर्डों को घाटे के कारण तोड़कर निगमों में तब्दील किया गया। उस समय 25000 करोड़ का घाटा था जो आज बढ़कर 10 लाख करोड़ से भी अधिक हो गया है।
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पत्रकार वार्ता में सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष वीरेंद्र भंडारी, उत्तराखंड बैंक इंप्लाइज यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंहदीरत्ता, एटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, ओपी सूद, धीरज भंडारी, दीपक शर्मा, सुरेंद्र सिंह नेगी, अनिल उनियाल, सोहन सिंह रजवार समेत कई उपस्थित थे।