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हत्यारे नौकर ने किया विश्वास का कत्ल
Updated Sat, 28 Apr 2018 01:00 AM IST
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हत्यारे नौकर ने परिवार के लोगों का ही नहीं बल्कि विश्वास का भी कत्ल कर दिया। जिनके बीच दस सालों तक रहकर वह उनके हाथ का बना खाना खाता रहा। उनको ही फरसे से काटकर मौत के घाट उतार दिया। उसकी इस प्रवृत्ति ने मानवता को भी शर्मसार कर दिया। इस घटना से गांवभर में दुख के साथ-साथ दहशत का भी माहौल है। गांव के लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि अब घर में किसी को भी शरण देना मौत को दावत दे सकता है।
लव्वा गांव में शुक्रवार को हुए कत्लेआम की घटना हर तरफ शोक की लहर है। हर तरफ चर्चा है कि एक नौकर ने परिवार के विश्वास का बेरहमी से कत्ल कर दिया है। ऐसे में अन्य लोगों का अपने नौकर से भरोसा उठना स्वाभाविक है। दस साल पूर्व नौकर के रूप में परिवार में पहुंचा हत्यारा प्रताप सिंह अब घर के मुखिया की तरह रह रहा था। घर में उसकी अनुमति के बाद ही किसी काम को करने या ना करने का फैसला होता था। घर के सभी सदस्य प्रताप को अपने पारिवारिक सदस्य की तरह मानते थे। प्रताप की ओर से उठाए गए इस प्रकार के कदम से अन्य लोगों का भी अपने नौकरों से भरोसा उठ रहा है। जिन लोगों के घर में नौकर हैं वे भी इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति अपने साथ होने का अंदेशा जता रहे हैं। क्षेत्र में ऐसे नौकरों की संख्या करीब 450 के करीब है। जिन लोगों के खेतों और घरों में वे बाहरी लोग काम कर रहे हैं उन्होंने उन लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया। घटना के बाद से लव्वा, गीसईदपुर, सिसौना, मक्खनपुर, भगवानपुर, रायपुर, खुब्बनपुर समेत आसपास के गांव में शोक का माहौल है। क्षेत्र के किसानों में दहशत है। घटना के बाद घरों में काम कर रहे मजदूरों का मकान मालिकों ने पुलिस वेरिफिकेशन कराने का अब मन बनाया है।
अब लाडली बिटिया को कौन देगा विदाई
संजय पाल
भगवानपुर।
30 अप्रैल को जिस लाडली बिटिया को मां-बाप को घर से विदा करना था, वे मां-बाप खुद इस दुनिया से विदा हो गए। इस गम से लाडली ही नहीं समूचा गांव गमजदा है। बिटिया का एक भाई भी इस अनहोनी में असमय काल के मुंह में समा गया। लाडली की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शादी से ठीक तीन दिन पहले हुए इस व्रजपात ने मानो उससे उसका संसार छीन लिया है। देहरादून से आईटीआई कर रहा भाई घर पहुंचा तो बहन उससे लिपटकर फूट-फूटकर रोई। परिवार में चाचा और ताऊ के घर में भी मात पसरा हुआ है। अचानक हुए इतने बड़े हादसे के चलते गांव के अधिकतर चूल्हे नहीं जले।
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शायद ही किसी को यह गुमान था कि दस साल पहले जिस ‘सांप’ को दूध पिलाकर पाला जा रहा था, एक दिन वही पूरे परिवार को डस लेगा। हत्यारा नौकर पूरे परिवार के लिए दस साल पहले काल बनकर घर में दाखिल हुआ था। तीन दिन बाद होने वाली शादी के घर में जहां पिछले कई दिनों से चहल पहल बढ़ती जा रही थी। रिश्तेदारी में मामी और उनकी लड़कियां, मामा, बुआ और अन्य रिश्तेदारों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। शादी से पहले की गीत-संगीत आदि की रस्में भी शुरू होने वाली थी कि अचानक सब कुछ खत्म हो गया। इस दौरान घर आई मामी ने तो हत्यारे से किसी तरह मनुहार कर खुद को बचा लिया, लेकिन उसकी बेटी शिवानी हत्यारे के फरसे से खुद को नहीं बचा पाई। शिवानी इस समय जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नौकर के मन में किसी भी प्रकार का क्षोभ पनप रहा हो, लेकिन जिन लोगों ने उसे आश्रय और रोटी दी, उसी ने कत्ल कर मानवता को दागदार कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि जो लोग इस दुनिया से चले गए उनकी आत्मा को तो पता नहीं शांति मिलेगी या नहीं, लेकिन जिस बिटिया की तीन दिन बाद इस घर से डोली उठनी थी, उसके लिए जिंदगी भर यह गम मौत से भी बढ़कर सजा बन गया है। बिटिया मानसी को यह भी नहीं सूझ पा रहा है कि वह इतने बड़े दुख के पहाड़ के बोझ आंसूओं के जरिए कैसे कम करे। उसकी इस हालत को देखकर ग्रामीण भी गमजदा हैं।
फरसा बनाने वाले से भी पुलिस करेगी पूछताछ
घटना से कई दिन पहले प्रताप ने परिवार को मौत के घाट उतारने की पठकथा लिख दी थी। मकान मालिक की ओर से उसे घर से निकालने की भनक लगने के बाद से वह अपने आप को कुंठित सा महसूस करने लगा था। उस दौरान उसने नौ पेज का सुसाइड नोट भी लिखा। परिवार के लोगों का कत्ल करने के लिए फरसा भी बनवाया। घटना के बाद पुलिस ने उसके कमरे से फरसा बरामद कर लिया है। पुलिस फरसा बनाने लुहार से पूछताछ करेगी। फिलहाल लुहार का पता लगाया जा रहा है।
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हत्यारे नौकर ने परिवार के लोगों का ही नहीं बल्कि विश्वास का भी कत्ल कर दिया। जिनके बीच दस सालों तक रहकर वह उनके हाथ का बना खाना खाता रहा। उनको ही फरसे से काटकर मौत के घाट उतार दिया। उसकी इस प्रवृत्ति ने मानवता को भी शर्मसार कर दिया। इस घटना से गांवभर में दुख के साथ-साथ दहशत का भी माहौल है। गांव के लोग बार-बार यही कह रहे हैं कि अब घर में किसी को भी शरण देना मौत को दावत दे सकता है।
लव्वा गांव में शुक्रवार को हुए कत्लेआम की घटना हर तरफ शोक की लहर है। हर तरफ चर्चा है कि एक नौकर ने परिवार के विश्वास का बेरहमी से कत्ल कर दिया है। ऐसे में अन्य लोगों का अपने नौकर से भरोसा उठना स्वाभाविक है। दस साल पूर्व नौकर के रूप में परिवार में पहुंचा हत्यारा प्रताप सिंह अब घर के मुखिया की तरह रह रहा था। घर में उसकी अनुमति के बाद ही किसी काम को करने या ना करने का फैसला होता था। घर के सभी सदस्य प्रताप को अपने पारिवारिक सदस्य की तरह मानते थे। प्रताप की ओर से उठाए गए इस प्रकार के कदम से अन्य लोगों का भी अपने नौकरों से भरोसा उठ रहा है। जिन लोगों के घर में नौकर हैं वे भी इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति अपने साथ होने का अंदेशा जता रहे हैं। क्षेत्र में ऐसे नौकरों की संख्या करीब 450 के करीब है। जिन लोगों के खेतों और घरों में वे बाहरी लोग काम कर रहे हैं उन्होंने उन लोगों का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया। घटना के बाद से लव्वा, गीसईदपुर, सिसौना, मक्खनपुर, भगवानपुर, रायपुर, खुब्बनपुर समेत आसपास के गांव में शोक का माहौल है। क्षेत्र के किसानों में दहशत है। घटना के बाद घरों में काम कर रहे मजदूरों का मकान मालिकों ने पुलिस वेरिफिकेशन कराने का अब मन बनाया है।
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अब लाडली बिटिया को कौन देगा विदाई
संजय पाल
भगवानपुर।
30 अप्रैल को जिस लाडली बिटिया को मां-बाप को घर से विदा करना था, वे मां-बाप खुद इस दुनिया से विदा हो गए। इस गम से लाडली ही नहीं समूचा गांव गमजदा है। बिटिया का एक भाई भी इस अनहोनी में असमय काल के मुंह में समा गया। लाडली की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। शादी से ठीक तीन दिन पहले हुए इस व्रजपात ने मानो उससे उसका संसार छीन लिया है। देहरादून से आईटीआई कर रहा भाई घर पहुंचा तो बहन उससे लिपटकर फूट-फूटकर रोई। परिवार में चाचा और ताऊ के घर में भी मात पसरा हुआ है। अचानक हुए इतने बड़े हादसे के चलते गांव के अधिकतर चूल्हे नहीं जले।
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शायद ही किसी को यह गुमान था कि दस साल पहले जिस ‘सांप’ को दूध पिलाकर पाला जा रहा था, एक दिन वही पूरे परिवार को डस लेगा। हत्यारा नौकर पूरे परिवार के लिए दस साल पहले काल बनकर घर में दाखिल हुआ था। तीन दिन बाद होने वाली शादी के घर में जहां पिछले कई दिनों से चहल पहल बढ़ती जा रही थी। रिश्तेदारी में मामी और उनकी लड़कियां, मामा, बुआ और अन्य रिश्तेदारों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। शादी से पहले की गीत-संगीत आदि की रस्में भी शुरू होने वाली थी कि अचानक सब कुछ खत्म हो गया। इस दौरान घर आई मामी ने तो हत्यारे से किसी तरह मनुहार कर खुद को बचा लिया, लेकिन उसकी बेटी शिवानी हत्यारे के फरसे से खुद को नहीं बचा पाई। शिवानी इस समय जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि नौकर के मन में किसी भी प्रकार का क्षोभ पनप रहा हो, लेकिन जिन लोगों ने उसे आश्रय और रोटी दी, उसी ने कत्ल कर मानवता को दागदार कर दिया है। लोग कह रहे हैं कि जो लोग इस दुनिया से चले गए उनकी आत्मा को तो पता नहीं शांति मिलेगी या नहीं, लेकिन जिस बिटिया की तीन दिन बाद इस घर से डोली उठनी थी, उसके लिए जिंदगी भर यह गम मौत से भी बढ़कर सजा बन गया है। बिटिया मानसी को यह भी नहीं सूझ पा रहा है कि वह इतने बड़े दुख के पहाड़ के बोझ आंसूओं के जरिए कैसे कम करे। उसकी इस हालत को देखकर ग्रामीण भी गमजदा हैं।
फरसा बनाने वाले से भी पुलिस करेगी पूछताछ
घटना से कई दिन पहले प्रताप ने परिवार को मौत के घाट उतारने की पठकथा लिख दी थी। मकान मालिक की ओर से उसे घर से निकालने की भनक लगने के बाद से वह अपने आप को कुंठित सा महसूस करने लगा था। उस दौरान उसने नौ पेज का सुसाइड नोट भी लिखा। परिवार के लोगों का कत्ल करने के लिए फरसा भी बनवाया। घटना के बाद पुलिस ने उसके कमरे से फरसा बरामद कर लिया है। पुलिस फरसा बनाने लुहार से पूछताछ करेगी। फिलहाल लुहार का पता लगाया जा रहा है।