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गतिविधि आधारित शिक्षण को करें प्रोत्साहित : सुंदरम
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मीनाक्षी सुंदरम
- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
विद्यालयी शिक्षा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के लिए सभी इकाइयों को एकजुट होना होगा। आजादी के बाद चरणबद्ध तरीके से शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले हैं।
आर. मीनाक्षी सुंदरम सोमवार को रिंग रोड स्थित एक होटल में एससीईआरटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में ‘विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता के मुद्दे’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें संख्यात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ गुणात्मक रूप से शिक्षा को देखना होगा। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए हमें बच्चों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही रोडमैपिंग के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया जाए तो वित्तीय कमी भी आड़े नहीं आती है।
निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने कहा कि गतिविधि पुस्तिका, बालिका पंचायत, मासिक परीक्षा आदि के जरिये गुणवत्ता उन्नयन के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में हो रहे शैक्षिक नवाचारों को राज्य में लागू करने को लेकर कार्यनीति बनाने पर जोर दिया। अपर निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार नौडियाल ने कहा कि डायट स्तर पर किए जा रहे शैक्षिक प्रयासों के जरिये शैक्षिक गुणवत्ता को नया आयाम मिलेगा। संयुक्त निदेशक कुलदीप गैरोला ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये एससीईआरटी के कार्यों की जानकारी दी। गुजरात एससीईआरटी के निदेशक डॉ. टीएस जोशी ने कहा कि गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी आयाम शिक्षक हैं। सीमैट विभागाध्यक्ष एसबी जोशी ने कहा कि गुजरात की तर्ज शैक्षिक कार्यक्रमों को लागू करने पर जोर दिया। निदेशक एससीईआरटी दिल्ली के प्रतिनिधि डॉ. अनिल कुमार तेवतिया ने मिशन बुनियाद कार्यक्रम की जानकारी दी।
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सेमिनार में संयुक्त निदेशक एससीईआरटी प्रदीप रावत, सहायक निदेशक समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश डीआर चौहान, कंचन देवराड़ी, आशा पैन्यूली, राकेश जुगरान, विनोद कुमार ढौंडियाल, डॉ. एसपी सिंह, राय सिंह रावत, डॉ. पुष्पारानी वर्मा, सुभाष भट्ट, किरन बहुखंडी, विक्रम सिंह नेगी, मधुबाला रावत, वर्षा भारद्वाज, पुष्पा जोशी, डॉ. सुनीता भट्ट, डॉ. राकेश गैरोला, मनोज कुमार शुक्ला, डॉ. हरेंद्र सिंह अधिकारी, डॉ. अजय चौरसिया, डॉ. दिनेश रतूड़ी के साथ ही सभी डायटों के प्रतिनिधि, मुख्य शिक्षाधिकारी, उप शिक्षाधिकारी आदि मौजूद रहे।
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विद्यालयी शिक्षा सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता के लिए सभी इकाइयों को एकजुट होना होगा। आजादी के बाद चरणबद्ध तरीके से शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया गया। इसके अच्छे परिणाम भी देखने को मिले हैं।
आर. मीनाक्षी सुंदरम सोमवार को रिंग रोड स्थित एक होटल में एससीईआरटी की ओर से आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में ‘विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता के मुद्दे’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि हमें संख्यात्मक उपलब्धियों के साथ-साथ गुणात्मक रूप से शिक्षा को देखना होगा। शिक्षा की गुणवत्ता के लिए हमें बच्चों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में रखते हुए गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सही रोडमैपिंग के साथ शैक्षिक कार्यक्रमों को प्रस्तुत किया जाए तो वित्तीय कमी भी आड़े नहीं आती है।
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निदेशक अकादमिक शोध एवं प्रशिक्षण सीमा जौनसारी ने कहा कि गतिविधि पुस्तिका, बालिका पंचायत, मासिक परीक्षा आदि के जरिये गुणवत्ता उन्नयन के लिए कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में हो रहे शैक्षिक नवाचारों को राज्य में लागू करने को लेकर कार्यनीति बनाने पर जोर दिया। अपर निदेशक एससीईआरटी अजय कुमार नौडियाल ने कहा कि डायट स्तर पर किए जा रहे शैक्षिक प्रयासों के जरिये शैक्षिक गुणवत्ता को नया आयाम मिलेगा। संयुक्त निदेशक कुलदीप गैरोला ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के जरिये एससीईआरटी के कार्यों की जानकारी दी। गुजरात एससीईआरटी के निदेशक डॉ. टीएस जोशी ने कहा कि गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी आयाम शिक्षक हैं। सीमैट विभागाध्यक्ष एसबी जोशी ने कहा कि गुजरात की तर्ज शैक्षिक कार्यक्रमों को लागू करने पर जोर दिया। निदेशक एससीईआरटी दिल्ली के प्रतिनिधि डॉ. अनिल कुमार तेवतिया ने मिशन बुनियाद कार्यक्रम की जानकारी दी।
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सेमिनार में संयुक्त निदेशक एससीईआरटी प्रदीप रावत, सहायक निदेशक समग्र शिक्षा हिमाचल प्रदेश डीआर चौहान, कंचन देवराड़ी, आशा पैन्यूली, राकेश जुगरान, विनोद कुमार ढौंडियाल, डॉ. एसपी सिंह, राय सिंह रावत, डॉ. पुष्पारानी वर्मा, सुभाष भट्ट, किरन बहुखंडी, विक्रम सिंह नेगी, मधुबाला रावत, वर्षा भारद्वाज, पुष्पा जोशी, डॉ. सुनीता भट्ट, डॉ. राकेश गैरोला, मनोज कुमार शुक्ला, डॉ. हरेंद्र सिंह अधिकारी, डॉ. अजय चौरसिया, डॉ. दिनेश रतूड़ी के साथ ही सभी डायटों के प्रतिनिधि, मुख्य शिक्षाधिकारी, उप शिक्षाधिकारी आदि मौजूद रहे।