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74.35 करोड़ में दे दिया, 28करोड़ का काम
Updated Sun, 22 Jul 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
एक सड़क को बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग को 28 करोड़ की निविदा मिली। लेकिन बाद उसका ठेका एक निजी फर्म को 76 करोड़ 35 लाख रुपये में दे दिया गया। निजी फर्म ने सड़क बनाई भी तो वह भी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गई। राज्य आधारभूत एवं औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सिडकुल) के इस कारनामे का खुलासा वित्त विभाग के विशेष ऑडिट में हुआ है।
दरअसल, सचिव (वित्त) अमित सिंह नेगी ने इस विशेष ऑडिट की रिपोर्ट जारी कर दी है। इसमें वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कुल 46 पैरा बनाए गए हैं। अंतरिम रिपोर्ट में सिडकुल प्रबंधन से जवाब मांगे गए थे, लेकिन ज्यादातर प्रकरणों पर प्रबंधन के पास कोई माकूल जवाब नहीं है। इस संबंध में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि रिपोर्ट पर जो भी यथोचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिन्हें ‘अमर उजाला’ सिलसिलेवार सामने लाएगा।
इनमें एक गंभीर गड़बड़ी सड़क को दोबारा बनाने और उसकी मरम्मत से जुड़ी है। वर्ष 2014 में ऊधमसिंह नगर जिले में गदरपुर-मटकोटा-दिनेशपुर के बीच 114.80 किमी की इस सड़क का एस्टीमेट लोक निर्माण विभाग से तैयार कराया गया था। लोनिवि ने 30.56 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया। लोनिवि टेंडर मागें तो उसे इस कार्य के लिए 28 करोड़ रुपये की निविदा भी मिल गई। लेकिन यह काम स़िडकुल ने देहरादून की हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को 74 करोड़ 35 लाख रुपये में दे दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक सहायक अभियंता सिविल की एक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ कि सड़क पर बिटुमिन्स सर्फेस कुछ स्थानों पर करीब 15 मीटर से 20 मीटर लंबाई के भागों में टूट गया है। यानी काम की गुणवत्ता भी बेहद खराब थी।
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इंसेट
92.22 करोड़ के ठेकों में भी मनमानी
सिडकुल पंतनगर में 92 करोड़ 22 लाख 92 हजार रुपये लागत की एक परियोजना की एक निविदा आमंत्रित नहीं गई, बल्कि उसे छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर दिया गया। काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने से प्रबंधन को सक्षम स्तर (शासन) से अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी। लेकिन प्रबंधन ऐसा करके अधिप्राप्ति नियमावली 2008 के नियम 3(10) का उल्लंघन किया। नियमावली के प्रावधानों के अनुसार निम्नतम दरों का लाभ लेने के लिए अधिकतम टेंडर एक साथ किया जाना चाहिए था। ऑडिट ने इस पर भी सवाल उठाया है।
कोट
रिपोर्ट को गंभीरता से देखने के बाद जिस प्रकार की भी कार्रवाई की आवश्यकता होगी, पूरी दृढ़ता के साथ की जाएगी।- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव
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एक सड़क को बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग को 28 करोड़ की निविदा मिली। लेकिन बाद उसका ठेका एक निजी फर्म को 76 करोड़ 35 लाख रुपये में दे दिया गया। निजी फर्म ने सड़क बनाई भी तो वह भी कई स्थानों से क्षतिग्रस्त हो गई। राज्य आधारभूत एवं औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (सिडकुल) के इस कारनामे का खुलासा वित्त विभाग के विशेष ऑडिट में हुआ है।
दरअसल, सचिव (वित्त) अमित सिंह नेगी ने इस विशेष ऑडिट की रिपोर्ट जारी कर दी है। इसमें वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित कुल 46 पैरा बनाए गए हैं। अंतरिम रिपोर्ट में सिडकुल प्रबंधन से जवाब मांगे गए थे, लेकिन ज्यादातर प्रकरणों पर प्रबंधन के पास कोई माकूल जवाब नहीं है। इस संबंध में मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह का कहना है कि रिपोर्ट पर जो भी यथोचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं, जिन्हें ‘अमर उजाला’ सिलसिलेवार सामने लाएगा।
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इनमें एक गंभीर गड़बड़ी सड़क को दोबारा बनाने और उसकी मरम्मत से जुड़ी है। वर्ष 2014 में ऊधमसिंह नगर जिले में गदरपुर-मटकोटा-दिनेशपुर के बीच 114.80 किमी की इस सड़क का एस्टीमेट लोक निर्माण विभाग से तैयार कराया गया था। लोनिवि ने 30.56 करोड़ रुपये का एस्टीमेट बनाया। लोनिवि टेंडर मागें तो उसे इस कार्य के लिए 28 करोड़ रुपये की निविदा भी मिल गई। लेकिन यह काम स़िडकुल ने देहरादून की हिंदुस्तान स्टील वर्क्स कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को 74 करोड़ 35 लाख रुपये में दे दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक सहायक अभियंता सिविल की एक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ कि सड़क पर बिटुमिन्स सर्फेस कुछ स्थानों पर करीब 15 मीटर से 20 मीटर लंबाई के भागों में टूट गया है। यानी काम की गुणवत्ता भी बेहद खराब थी।
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92.22 करोड़ के ठेकों में भी मनमानी
सिडकुल पंतनगर में 92 करोड़ 22 लाख 92 हजार रुपये लागत की एक परियोजना की एक निविदा आमंत्रित नहीं गई, बल्कि उसे छोटे-छोटे भागों में विभाजित कर दिया गया। काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटने से प्रबंधन को सक्षम स्तर (शासन) से अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं पड़ी। लेकिन प्रबंधन ऐसा करके अधिप्राप्ति नियमावली 2008 के नियम 3(10) का उल्लंघन किया। नियमावली के प्रावधानों के अनुसार निम्नतम दरों का लाभ लेने के लिए अधिकतम टेंडर एक साथ किया जाना चाहिए था। ऑडिट ने इस पर भी सवाल उठाया है।
कोट
रिपोर्ट को गंभीरता से देखने के बाद जिस प्रकार की भी कार्रवाई की आवश्यकता होगी, पूरी दृढ़ता के साथ की जाएगी।- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव