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बांध विस् थापितों को मुआवजा, नौकरी नही मिली तो उग्र आंदोलन
Updated Wed, 18 Jul 2018 01:48 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
गढ़वाल के श्रीनगर में निर्माणाधीन बांध के 435 विस्थापितोें को मुआवजा और नौकरी देने की मांग के लिए उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच ने आंदोलन की चेतावनी दी है। मंच के प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर व प्रदेश सचिव टीसी माथुर का कहना है कि बांध विस्थापित सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए और सरकार व कंपनी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर का कहना है कि बांध विस्थापित कई दिनों से धरना दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। इसके अलावा कंपनी द्वारा विस्थापितों को दिए गए चेक बाउंस हो रहे हैं। दोनों पदाधिकारियों ने बांध विस्थापितों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की बात कही है। उल्लेखनीय है कि बांध विस्थापितों की मांग को लेकर उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बांध विस्थापितों ने सोमवार को सचिवालय कूच किया था। इस दौरान उनकी पुलिस से जमकर नोकझोंक भी हुई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भी फटकारनी पड़ी थीं। इसमें कई महिलाएं चोटिल भी हो गई थीं। सचिवालय कूच उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच की ओर से किया गया था, जिसे उक्रांद ने भी समर्थन दिया था।
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गढ़वाल के श्रीनगर में निर्माणाधीन बांध के 435 विस्थापितोें को मुआवजा और नौकरी देने की मांग के लिए उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच ने आंदोलन की चेतावनी दी है। मंच के प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर व प्रदेश सचिव टीसी माथुर का कहना है कि बांध विस्थापित सैकड़ों परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए और सरकार व कंपनी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है।
प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर का कहना है कि बांध विस्थापित कई दिनों से धरना दे रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी सुध लेने कोई नहीं पहुंचा। इसके अलावा कंपनी द्वारा विस्थापितों को दिए गए चेक बाउंस हो रहे हैं। दोनों पदाधिकारियों ने बांध विस्थापितों की समस्याओं का जल्द समाधान नहीं होने पर उग्र आंदोलन की बात कही है। उल्लेखनीय है कि बांध विस्थापितों की मांग को लेकर उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और बांध विस्थापितों ने सोमवार को सचिवालय कूच किया था। इस दौरान उनकी पुलिस से जमकर नोकझोंक भी हुई थी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठियां भी फटकारनी पड़ी थीं। इसमें कई महिलाएं चोटिल भी हो गई थीं। सचिवालय कूच उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच की ओर से किया गया था, जिसे उक्रांद ने भी समर्थन दिया था।
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